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  • Jul 4 2017 1:17PM

खेतों में उतरीं महिलाएं बढ़ी इनकी आत्मनिर्भरता

खेतों में उतरीं महिलाएं बढ़ी इनकी आत्मनिर्भरता
शैलेंद्र सिन्हा
झारखंड की महिला किसान अब पुरुषों पर निर्भर नहीं हैं. वह बाजार से खुद खाद व बीज लाती हैं. धान की रोपनी एवं पशुपालन के माध्यम से अपनी आमदनी को बढ़ा रही हैं. वह गरीबी को चुनौती के रूप में लेकर आत्मनिर्भर बनने को ठानी है. महिला किसान विजन और मिशन के तहत स्वयं सहायता समूह के माध्यम से गरीबों को सशक्त बना रही हैं. 
आदिवासी गांवों में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं में गजब का आत्मविश्वास झलकता है. आज वे खेती श्रीविधि से कर रही हैं. इससे प्रति परिवार उनकी आय में बढ़ोतरी भी हो रही है. दुमका जिला के मसलिया प्रखंड के जियोड़ साकाम स्वयं सहायता समूह, पूजा स्वयं सहायता समूह एवं चमेली स्वयं सहायता समूह की महिलाएं सामूहिक खेती कर आत्मनिर्भर बन रही हैं.
 
आधुनिक खेती को अपना कर महिलाएं बढ़ाती हैं आमदनी : मीणा
चमेली स्वयं सहायता समूह की सचिव मीणा हांसदा कहती हैं कि महिलाओं ने श्रीविधि से खेती कर धान की उपज प्रति हेक्टेयर में बढ़ाया है. इससे उनकी आमदनी भी बढ़ी है. आज उनकी आय प्रतिमाह लगभग पांच हजार तक जा पहुंची है. कहती हैं कि अब इलाके की महिलाएं पुरुषों पर निर्भर नहीं हैं. महिला ग्रुप की सदस्य प्रखंड एवं जिला स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्र से मशरूम एवं आत्मा से जुड़ कर आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं का लाभ ले रही हैं. 
 
महिलाओं को सशक्त करने में आजीविका का पूरा सहयोग : सुमिता
चमेली स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष सुमिता सोरेन कहती हैं कि झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी से जुड़ी महिलाओं को खेती बारी के आधुनिक गुर बताने में आत्मा संस्था भी सहयोग कर रही है. जेएसएलपीएस मसलिया प्रखंड में वर्ष 2015 में आयी और महिलाओं को सशक्त कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में भरपूर सहयोग कर रही है. मसलिया प्रखंड के 190 गांव में 1240 एसएचजी ग्रुप की महिलाएं जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से लाभ ले रही हैं. गरीबी उन्मूलन की दिशा में उनके प्रयास को सबका साथ मिल रहा है. 
 
खेती बारी को लेकर महिला किसानों का नजरिया
ससमय किसानों को नहीं मिलता खाद-बीज : सूरजमुनी सोरेन
महिला किसान सूरजमुनी सोरेन बताती हैं कि खेती बारी के साथ-साथ पशुपालन एवं जैद यानी लतावाले सब्जी के उत्पादन से उनकी आय बढ़ी है. महिला किसान खरीफ और रबी के सीजन में भी खेती कर रही हैं. वे धान, मकई, बोदी, अरहर एवं सब्जी का उत्पादन कर रही हैं. सोरेन कहती हैं कि सरकार की ओर से किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध नहीं मिल रहा है, जिससे बाध्य होकर किसान बाजार से खाद-बीज खरीद रहे हैं. 
 
आज भी किसान मॉनसून पर निर्भर : पानमुनी टुडू
महिला किसान पानमुनी टुडू कहती हैं कि यदि किसानों को सिंचाई की सुविधा, पानी पटाने का मशीन व पंपिंग सेट सरकार समय पर देती, तो खेती और भी बेहतर होता. झारखंड में किसानों के लिए कोई कारगर नीति काम नहीं कर रही है. किसान आज भी माॅनसून पर निर्भर हैं. हालांकि महिला किसानों में आत्मनिर्भरता बढ़ी है. वे बकरी पालन, सूकर पालन, मुर्गी पालन एवं बतख पालन के द्वारा अपनी आय को बढ़ा रही है.
 
14 जिलों की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश : प्रदीप कुमार
महिला किसानों के संदर्भ में जेएसएलपीएस के कॉ-ऑर्डिनेटर प्रदीप कुमार कहते हैं कि जेएसएलपीएस ने महिला सशक्तीकरण के द्वारा गरीबी उन्मूलन की दिशा में मिशन के तहत खेती बारी का प्रशिक्षण दिला कर महिलाओं में आत्मविश्वास जगाया है. राज्य के लगभग 14 जिलों में ग्रामीण महिलाओं के बीच पिछले चार सालों से सोसाइटी कार्यरत है. इसी का परिणाम है कि आज दलहन, तिलहन से लेकर धान के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है. कहते हैं कि एसएचजी ग्रुप की महिला किसानों के बीच कृषि संयंत्र पंपिंग सेट, धान झाड़ने की मशीन, पावर टिलर सहित कई यंत्र वितरित किये गये हैं.
 
महिलाओं के जीवन में बदलाव का 
मतलब परिवर्तन है : लक्ष्मी व सीमा
मनोहरपुर प्रखंड के तिरला गांव की जागो महिला समूह की पशु सखी लक्ष्मी खालको और सीमा सिंह मुंडा गांव में पशुओं को बीमारी से बचाने में सहयोग कर रही है. वे कहती हैं कि हमारी कोशिश है कि किसी भी पशु की मौत बीमारी से ना हो. खुद गरीबी से लड़ कर अपना मुकाम हासिल करनेवाली दोनों दीदियां पशु सखी बन कर कई महिलाओं के जीवन में बदलाव ला रही हैंै. आज वह पशु चिकित्सक के तौर पर गांवों में जानी जाती है. महिलाओं के जीवन में बदलाव का मतलब परिवर्तन है. जेएसएलपीएस का उद्देश्य निर्धन ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रभावी संस्थागत आधार तैयार करना है, ताकि वे आजीविका में वृद्धि के जरिये अपनी आय बढ़ा सके.
 
गरीबी दूर करने में समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका : बलदेव
झारखंड में प्रखंड स्तर पर कृषक सलाहकार समिति का गठन किया गया है. कृषक सलाहकार बलदेव कुमार हेंब्रम कहते हैं कि अब तक सैकड़ों किसानों को उन्होंने बागवानी, मछली पालन के साथ अच्छी खेती बारी के गुर बताये हैं. मसलिया प्रखंड के रामखुडी, गुआसोल एवं सीतापहाड़ी की महिला किसान आत्मनिर्भर हो चुकी हैं. आज ग्रामीणों की गरीबी दूर करने में समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका है