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  • Sep 13 2017 12:50PM

बोकारो के गोबर से रामगढ़ के खेतों में छायी हरियाली

बोकारो के गोबर से रामगढ़ के खेतों में छायी हरियाली

सीपी सिंह
रामगढ़ जिला अंतर्गत गोला क्षेत्र के सब्जी उत्पादन से अन्य जिलों को भी बल मिलता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि रामगढ़ की खेतों में हरियाली बोकारो की वजह से है. दरअसल रामगढ़ (गोला) के खेतों में जैविक खाद बोकारो से आ रहा है. हर माह 550 ट्रैक्टर से अधिक गोबर खाद बोकारो से मंगाया जा रहा है, जिससे गोला में खेती का स्तर बढ़ रहा है और बदले में बोकारो के पशुपालकों को अच्छी आमदनी भी हो रही है. 

जिला में साढ़े तीन लाख से अधिक पशुधन

पशुपालन पदाधिकारी अरूण कुमार सिन्हा की माने, तो बोकारो में साढ़े तीन लाख से अधिक पशुधन हैं. इसमें एक लाख 52 हजार 704 मादा पशु (देशी व विदेशी नस्ल), एक लाख 59 हजार 44 नर पशु व 35,755 भैंस हैं. एक पशु एक दिन में औसतन 25 किलो गोबर देता है. इस गोबर में से 20 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो जाता है, जबकि 35 प्रतिशत हिस्सा जलावन व अन्य काम में प्रयोग होता है. शेष हिस्सों को बेच दिया जाता है, जो खाद के रूप में उपयोग किया जाता है.

350 से 600 रुपये के हिसाब से बिकता है गोबर 

गोबर सप्लाई के लिए ट्रैक्टर व 709 ट्रकों का इस्तेमाल होता है. पशुपालकों की माने, तो ट्रैक्टर व ट्रकों में लगे डाले की साइज के हिसाब से गोबर का दाम तय होता है, जो 350 रुपये से लेकर 600 रुपये के बीच होती है. अकेले सेक्टर- 09 बड़ा खटाल से हर दिन 15-20 गाड़ी गोबर की सप्लाई होती है, जबकि सेक्टर-12 खटाल से 08-10 गाड़ी गोबर रामगढ़ के गोला क्षेत्र में जाता है. रामगढ़ में खटाल की सीमित संख्या के कारण गोबर की मांग की पूर्ति बोकारो से होती है.

पशुपालकों को होता है ज्यादा फायदा

वैसे तो पशुपालक गोबर के बदले भी कुछ कमायी कर लेते हैं, लेकिन एक और तरीके अपना कर इनकी कमायी दोगुनी तक हो सकती थी. गोबर को सीधा किसानों को बेचने की जगह बायो गैस का उत्पादन करने से पशुपालकों को ज्यादा लाभ होता. एक तो बायो गैस से रसोई में मदद मिलती. साथ ही अवशिष्ट को सूखे खाद के रूप में बेचा जा सकता है. सूखे खाद की कीमत प्रति किलो 10 रुपये होती है, जो पशुपालक के लिए ज्यादा फायदेमंद होता.

बोकारो में हो चुकी है पहल

बोकारो में बायो गैस उत्पादन के लिए पहल हो चुकी है. दुंदीबाद में विधायक मद के 15 लाख रुपये से सार्वजनिक शौचालय बना कर इसे नि:शुल्क संचालित करने के लिए सेनिटेशन एंड हेल्थ राइट्स इन इंडिया फाउंडेशन संस्था को दिया गया है. संस्था का हेडक्वार्टर अमेरिका में है. झारखंड में यह संस्था बोकारो में पहले शौचालय का संचालन कर रही है. यह संस्था शौचालय के लिए बने सेफ्टी टैंक से निकलने वाली बायो गैस को पाइप लाइन के जरिये उपयोग कर जेनरेटर चला रही है, जबकि रसोई गैस के रूप में चूल्हा भी जला रही है. संस्था के को-डायरेक्टर प्रवीण कुमार का कहना है कि जेनरेटर चलाना व चूल्हा जलाने का प्रयोग सफल रहा.

पशुपालकों की कहानी, उनकी जुबानी

गोला से बोकारो में सब्जी लेकर आनेवाली मालवाहक गाड़ी गोबर लेकर वापस जाती है. बरसात के बाद सर्दी में गोबर की आपूर्ति अधिक होती है.

कमलेश कुमार, पशुपालक

बायो गैस प्लांट के बारे में जानकारी देनेवाला कोई नहीं है. प्रशासन की तरफ से कोई जानकारी नहीं दी जा रही है. अगर मदद मिलेगी, तो प्लांट लगायेंगे.

प्रदीप यादव, पशुपालक

प्रति वाहन 350 से 600 रुपये के हिसाब से गोबर की कीमत मिलती है. जो पहले आता है, उसे ही गोबर दे देते हैं. यहां से हर दिन 10 ट्रैक्टर गोबर जाता है.

कृष्ण यादव, पशुपालक

जानकारी के अभाव में लोग गोबर सीधे बेच देते हैं. यदि प्रशासन पहल करे, तो बोकारो में बड़ी बायो गैस संयंत्र स्थापित की जा सकती है.

ललन प्रसाद यादव, पशुपालक