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  • Sep 20 2017 1:04PM

मार्डन तकनीक की खेती से बंपर उत्पादन

मार्डन तकनीक की खेती से बंपर उत्पादन
पंचायतनामा डेस्क
रांची जिले के कांके प्रखंड का एक गांव है पिठोरिया. इस गांव के एक किसान ने अपनी लगन व मेहनत के बल पर अपनी अलग पहचान बनायी है. किसान राम प्रसाद गोप को वैसे तो खेती विरासत में मिली है, लेकिन अपनी मेहनत की बदौलत वह लगातार आगे बढ़ रहे हैं. राम प्रसाद की मानें, तो खेती-किसानी एक अच्छा पेशा है और अपना होता है. किसी के आगे झुकना नहीं पड़ता है.

अपने खेतों में मेहनत करते हैं और वही उनकी असली पूंजी है. राम प्रसाद मैट्रिक पास करने के बाद से खेती-बारी में जुट गये. आज खेती-किसानी से उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है. उनके खेतों में रोजाना चार से पांच लोग काम करते हैं. वहीं खेती के दम पर राम प्रसाद और लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं. राम प्रसाद पिठोरिया के जागरूक किसान हैं. वह आधुनिक तकनीक से खेती करते हैं, जिससे अच्छा उत्पादन होता है. एक साल में उनके खेतों से तीन फसल निकलती है. इसके अलावा राम प्रसाद आकाशवाणी में किसानों के लिए आयोजित कार्यक्रम में खेती-किसानी संबंधी जानकारी भी देते हैं. 

ऐसे हुई शुरुआत 
राम प्रसाद अपने दादा और पिता को खेतों में काम करते देख बड़े हुए. खेती-किसानी की बारीकियों को समझने वाले राम प्रसाद14साल की उम्र से ही खेतों में काम करने लगे. खेती योग्य पुस्तैनी जमीन थी, जिस पर खेती करने में कोई परेशानी नहीं हुई. शुरुआती दिनों में अपने खेत से सिर्फ अरहर और उरद की पैदावार होती थी. राम प्रसाद जब बड़े हुए, तो वह सब्जियां उगाने लगे. अब साल में सब्जी के साथ-साथ धान और दलहन फसलों का उत्पादन हो रहा है.अभी राम प्रसाद के खेतों में फूलगोभी, पत्तागोभी, बोदी, सेम और धनिया लहलहा रही है. उन फसलों को देख कर राम प्रसाद की आंखों की चमक बढ़ जाती है. राम प्रसाद ने बताया कि इस बार की बारिश में फूलगोभी के बिचड़े बर्बाद हो गये, जिसके बाद उन्होंने हाजीपुर से फूलगोभी के बिचड़े मंगा कर खेतों में लगाया.

आधुनिक खेती से बढ़ती है उपज
राम प्रसाद आधुनिक तकनीक से खेती करते हैं. किस मौसम में कौन-सी खेती करनी है और खेतों में कितना रासायनिक और जैविक खाद डालने की जरूरत है, इसकी पूरी जानकारी उन्हें है. यही वजह है कि खेती उनके लिए मुनाफे का कारोबार साबित हो रहा है. राम प्रसाद गोप जैविक खेती पर ज्यादा जोर देते हैं. कहते हैं कि अगर जमीन की उर्वरता बरकरार रखनी है, तो जैविक खेती पर ध्यान देना होगा. अधिकतर किसानों को रासायनिक खाद के सही इस्तेमाल की जानकारी नहीं होती है, जिसके कारण उनके खेतों की उर्वरक क्षमता कम होती जा रही है, साथ ही मौसम को समझना और मंडी का आंकलन करना भी सफल किसान के लिए महत्वपूर्ण है, तभी जाकर उन्हें अपनी फसल और सब्जियों के अच्छे दाम मिल पायेंगे. खेती एक ऐसा व्यवसाय है, जहां अगर फसल के अच्छे दाम मिल जायें, तो कमायी अच्छी हो जाती है, वर्ना लागत भी नहीं निकल पाता है. राम प्रसाद बताते हैं कि उन्हें भी कई बार नुकसान उठाना पड़ा है. सिंचाई के लिए संसाधन की कमी होने के कारण उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है. उनके खेत में दो कुएं हैं, पर गर्मी आते-आते कुएं सूख जाते हैं, जिसके कारण काफी दूर स्थित तालाब से उन्हें अपने खेतों में पानी लाना पड़ता है.
 
बिना लगन व मेहनत के नहीं बने सकते सफल किसान  : रामप्रसाद गोप
राम प्रसाद गोप कहते हैं कि खेतों में लगी सब्जियों और फसलों को बच्चों की तरह देखभाल करना होता है, तब जाकर अच्छा उत्पादन होता है. मौजूदा दौर में खेती-किसानी आसान नहीं है. हर मौसम में सुबह से शाम तक खेतों में रहना पड़ता है, तब जाकर दो पैसे आते हैं. उस पर भी अगर मौसम की बेरुखी हुई, तो नुकसान तय है. सरकार की नीतियां भी किसानों के लिए कारगर नहीं हैं. राम प्रसाद कहते हैं कि आज तक उन्हें फसल बीमा का लाभ नहीं मिला है. लैम्पस इलाके में है ही नहीं. पिठोरिया की पहचान कृषि क्षेत्र के रूप में होती है, लेकिन इलाके में अभी तक एक भी कोल्ड स्टोरेज नहीं है, जिसके कारण किसान अपनी बची हुई सब्जियों को या तो औने-पौने दामों में बेच देते हैं या फिर उसे फेंकने को मजबूर होते हैं.

राम प्रसाद कहते हैं कि प्रखंड से जो धान के बीज मिलते हैं, वो उसे नहीं लेते हैं, क्योंकि कई बार खराब गुणवत्ता वाले धान के बीज बांटे गये, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा. कहते हैं कि पिठोरिया में 365 दिन बाजार लगता है, जिसके कारण यहां के किसानों को थोड़ी सहूलियत होती है. पिठोरिया से सब्जियां कोलकाता, आसनसोल के अलावा देश के कई राज्यों के बाजारों में भेजी जाती है. राम प्रसाद कहते हैं कि मंत्रियों द्वारा सिर्फ बड़े-बड़े मंचों से भाषण देने से किसानों के हालात नहीं सुधरेंगे. उन्हें किसानों के खेतों में आना होगा और किसानों के लिए सकारात्मक सोच के साथ कार्य करना होगा, तभी किसानों के हालात सुधरेंगे.