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  • Sep 20 2017 1:12PM

2020 तक झारखंड को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य

2020 तक झारखंड को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य
पंचायतनामा डेस्क
झारखंड को वर्ष 2020तक पूर्ण साक्षर राज्य बनाने के उद्देश्य से राज्य के करीब सौ मुखियाओं को सम्मानित किया गया. इसके अलावा शिक्षा प्रेरक, साक्षरता स्वयंसेवक शिक्षक एवं नव साक्षरों को भी सम्मानित किया गया. मौका था अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के अवसर पर राजधानी रांची के धुर्वा स्थित प्रभात तारा मैदान में आयोजित कार्यक्रम का. इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के हाथों 20महिलाएं सम्मानित हुईं. सम्मानित होनेवालों में पांच पूर्ण साक्षर पंचायत की मुखिया, पांच प्रेरक, पांच साक्षरता स्वयंसेवक शिक्षक एवं पांच नव साक्षर थीं. साक्षरता के क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभाने के कारण इन्हें सम्मानित किया गया. 
 
शिक्षा के बगैर विकास संभव नहीं : वेंकैया नायडू
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा कि आत्मनिर्भरता, सशक्तीकरण, शोषण, भ्रष्टाचार और अत्याचार से मुक्ति के लिए शिक्षा जरूरी है. शिक्षा के बगैर देश, राज्य व समाज का विकास संभव नहीं है. उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की 20 फीसदी आबादी अनपढ़ है, जो हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती है.
 
तीन वर्षों में 32 लाख लोग हुए साक्षर : रघुवर दास
झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में झारखंड में 32लाख लोग साक्षर हुए हैं. इनमें 70फीसदी महिलाएं हैं. उन्होंने कहा कि राज्य की साक्षरता दर 66.41फीसदी है, जिसमें पुरुष साक्षरता दर76.84और महिला साक्षरता दर55.42फीसदी है. मुख्यमंत्री ने नारी शिक्षा का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया.उन्होंने कहा कि हम पढ़ेंगे, पढ़ायेंगे, तभी राज्य संपूर्ण साक्षर बन पायेगा. वर्तमान में राज्य की 500से अधिक पंचायतें पूर्ण साक्षर हो चुकी हैं. मुख्यमंत्री ने राज्य को वर्ष2019-20तक पूर्ण साक्षर संबंधी लक्ष्य प्राप्ति के लिए सभी से सहयोग की अपील भी की.
 
क्या कहती हैं सम्मानित महिला मुखिया
निरक्षर को साक्षर बनाने से मिला आत्मसंतोष : रेखा सिंह
बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड की तेनुघाट पंचायत को पूर्ण साक्षर घोषित किया गया है. इस पंचायत में एक भी व्यक्ति निरक्षर नहीं है. यह तेनुघाट पंचायत के लोगों और मुखिया के लिए गर्व की बात है. विश्व साक्षरता दिवस के मौके पर तेनुघाट को पूर्ण साक्षर बनाने के लिए तेनुघाट की मुखिया रेखा सिंह को उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सम्मानित किया.

मुखिया रेखा सिंह बताती हैं कि तेनुघाट की मुखिया के तौर पर यह उनका दूसरा कार्यकाल है और उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है. इस कार्य में उनके पति समेत सभी ग्रामीणों का भरपूर सहयोग मिला है. शुरुआती दौर में परेशानी तो अायी, लेकिन सभी के सहयोग से निरक्षर को साक्षर बना पायी. यह बहुत बड़ी उपलब्धि है. साक्षरता के साथ-साथ अपनी पंचायत को आदर्श पंचायत बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है. विकास कार्यों का नियमित निरीक्षण करने का ही परिणाम है कि पिछले कार्यकाल में बनायी गयी नाली आज भी बिल्कुल वैसी ही है. तेनुघाट पंचायत में जिला जज के कार्यालय के अलावा सब डिविजनल कोर्ट, सिविल कोर्ट, डीसी, एसडीओ और एलआरडीसी का कार्यालय भी है. 
 
इस पंचायत के वोटर पढ़े-लिखे हैं.  इस पंचायत में एक डिग्री कॉलेज, एक इंटर कॉलेज, नवोदय विद्यालय, कस्तूरबा विद्यालय और एक निजी स्कूल भी संचालित है. इतने संस्थान होने के कारण यहां काफी लोग पहले से ही शिक्षित थे, पर जो लोग पढ़े-लिखे नहीं थे, उन्हें पढ़ाई से जोड़ना एक बड़ी समस्या थी. उन लोगों को पढ़ाई में रुचि जगाने के उद्देश्य से मुखिया ने एक नया प्रयोग किया. इसके तहत लोगों को कहा गया कि अगर वो पढ़ना-लिखना नहीं सीखेेंगे,तो उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं दिया जायेगा. इसका असर दिखा और निरक्षर पढ़ाई को लेकर जागरूक होने लगे. इस दौरान करीब225लोग साक्षर हो गये. पंचायत में अब सिर्फ चार से पांच लोग ही ऐसे हैं, जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते हैं, क्योंकि वो काफी बूढ़े हो चुके हैं. बच्चों के लिए संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में काफी संख्या में छोटे बच्चे आते हैं. पंचायत में ड्रॉप आउट रेट जीरो है. सम्मानित होने के बाद उत्साहित मुखिया रेखा सिंह कहती हैं कि अपने पंचायत क्षेत्र का विकास करना और सभी लोगों तक  सुविधाएं पहुंचाना उनकी पहली प्राथमिकता है.
 
दो साल के अथक प्रयास से पंचायत को बनाया पूर्ण साक्षर : पूनम देवी
दुमका जिले के जरमुंडी प्रखंड में नोनीहाट पंचायत है. यहां की महिला मुखिया पूनम देवी भी नोनीहाट को पूर्ण साक्षर पंचायत बनाने को लेकर सम्मानित हुई हैं. अब नोनीहाट पंचायत के तीनों गांवाें के लगभग सभी लोग पढ़ना-लिखना जानते हैं. मुखिया पूनम देवी कहती हैं कि पंचायत को साक्षर बनाना इतना आसान नहीं था. पिछड़ा इलाका होने के कारण लोगों को जागरूक करना एक बड़ी समस्या थी. पहले तो लोगों को पढ़ने के लिए तैयार करने में बहुत समस्याएं आयीं. बच्चे तो पढ़ने के लिए तैयार हो जाते थे, पर बड़ों को बहुत समझाना पड़ता था, फिर वो पढ़ने के लिए तैयार होते थे. वोलेंटियर टीचर्स उन्हें पढ़ाते थे.  पंचायत में 80वीटी और दो प्रेरक बनाये गये थे.

सभी ने मिल कर नव साक्षर लोगों को समझाया और सभी पंचायत के तीनों गांवों में उन्हें हर रोज पढ़ाने लगे. लगभग दो साल तक यह प्रक्रिया चली और आखिरकार पंचायत को साक्षर बनाने का सपना साकार हो गया. अब पंचायत के तीनों गांवों के लोग अपना हस्ताक्षर खुद करते हैं. इस पंचायत के तीन गांवों में लगभग साढ़े छह हजार की आबादी है. तीनों गांवों में एक-एक स्कूल है. नोनीहाट में एक हाइस्कूल भी है. ऊपरबेड़ा और हेठबेड़ा गांव में प्राथमिक विद्यालय है. गांव के सभी बच्चे निरंतर स्कूल जा रहे हैं कि नहीं, इसके लिए समय-समय पर निगरानी भी की जाती है. इसी का परिणाम है कि पंचायत में ड्रॉप आउट रेट शून्य है. मुखिया पूनम देवी मानती हैं कि शिक्षा से बड़ा बदलाव आता है.