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  • Sep 20 2017 1:15PM

मालश्रृंग पंचायत में बदलाव की जरूरत

मालश्रृंग पंचायत में बदलाव की जरूरत
पंचायतनामा डेस्क
रांची जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर कांके प्रखंड के मालश्रृंग पंचायत में बदलाव की नयी इबारत लिखी जा रही है. मालश्रृंग पंचायत रांची से सटी एक ऐसी पंचायत है, जो एनएच से काफी दूर है. रांची लोहरदगा पथ और रांची पतरातू पथ के बीचोबीच प्रकृति की खूबसूरत वादियों की बीच बसी है. पंचायत में कुल पांच राजस्व ग्राम सांगा, मान्हा, मालश्रृंग, सिरांगो, और करकट्टा है. इसके अलावा सियार टोली और जतरा टांड़ दो टोले भी हैं. पंचायत की कुल आबादी लगभग10 हजार है. पंचायत में 16 वार्ड हैं. ग्रामीण खेती-बारी से ही जीविकोपार्जन करते हैं. इसके ठीक उलट अब मालश्रृंग की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने की ओर अग्रसर है, क्योंकि मालश्रृंग के सांगा गांव में देश की प्रतिष्ठित ट्रिपल आइटी के निर्माण के लिए जमीन चिह्नित की गयी है और जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है. इससे सांगा गांव और इस पंचायत को नयी पहचान मिलेगी और क्षेत्र का विकास होगा.
 
पंचायत में ड्रॉप आउट की संख्या शून्य 
मालश्रृंग पंचायत में सभी गांव दूर-दूर बसे हुए हैं. इसके कारण पढ़ाई करने में बच्चों को थोड़ी परेशानी होती है. मान्हा, मालश्रृंग, सिरांगों और सांगा में प्राथमिक और मिडिल स्कूल है. गांव में हमेशा जागरूकता अभियान के जरिये लोगों को जागरूक किया जाता है. यही वजह है कि सभी ग्रामीण अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं. शिक्षा को लेकर ग्रामीणों में काफी जागरूकता आयी है. इस पंचायत के गांवों में जाकर हमेशा यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे और यह प्रयास सफल भी हुआ है. इस पंचायत में ड्रॉप आउट रेट शून्य है. आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन भी नियमित होता है, जिससे बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मिल रही है. पंचायत में 75 फीसदी लोग साक्षर हैं. मुखिया झानो देवी बताती हैं कि इलाके में हाइस्कूल की जरूरत है, क्योंकि हाइस्कूल के लिए बच्चों को 10 किलोमीटर दूर रातु, पिठोरिया या कांके जाना पड़ता है, जिससे बच्चों को काफी परेशानी होती है. यही कारण है कि कई बच्चे खास कर छात्राओं की पढ़ाई छूट जाती है. मुखिया कहती हैं कि इलाके में हाइस्कूल खोलने की दिशा में काम हो रहा है और जमीन मिल जाने पर काम शुरू हो जायेगा. उन्होंने कहा कि इलाके के बच्चों की सहूलियत और अच्छी शिक्षा के लिए हाइस्कूल का निर्माण कराना उनकी प्राथमिकता है.
 
शौचालय और स्वच्छता
मालश्रृंग पंचायत में शौचालय निर्माण का कार्य जोर-शोर से चल रहा है. मुखिया झानो देवी उम्मीद जताती हैं कि अक्तूबर के अंत तक मालश्रृंग पंचायत ओडीएफ घोषित हो जायेगा. तीन गांवों में महिला समूह के द्वारा शौचालय निर्माण का कार्य कराया जा रहा है. शेष दो गांवों में मुखिया और जलसहिया शौचालय का निर्माण करा रही हैं. मुखिया बताती हैं कि ग्रामसभा और स्कूली बच्चों के माध्यम से गांव के लोगों को शौचालय निर्माण के लिए जागरूक किया गया, तब जाकर अब लोग खुद सामने आकर शौचालय निर्माण में भागीदारी निभा रहे हैं. लगभग 75 फीसदी शौचालय का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और उम्मीद है कि अक्तूबर माह तक पंचायत ओडिएफ घोषित हो जायेगा. साफ-सफाई को लेकर पंचायत में हमेशा जागरूकता अभियान चलाया जाता है. स्कूली बच्चों की रैली निकाली जाती है, ताकि लोग जागरूक हो सकें. इसका असर भी अब दिखने लगा है. ग्रामीण साफ-सफाई को लेकर पहले की अपेक्षा अब काफी जागरूक हो गये हैं. ग्रामसभा के माध्यम से भी ग्रामीणों को साफ-सफाई के प्रति हमेशा जागरूक किया जाता है.
 
बुनियादी सुविधाओं की है जरूरत
पंचायत तक जानेवाली सड़कों की हालत काफी जर्जर है. कई जगहों पर पुल टूटे हुए हैं. मुखिया कहती हैं कि ग्रामीणों के श्रमदान और अपने प्रयास से मान्हा गांव की एक सड़क को चलने लायक बनाया गया. हालांकि, आज भी ग्रामीणों को सड़क की समस्याओं से दो-चार होना पड़ता है. खास कर बारिश के दिनों में स्थिति तो और भी खराब हो जाती है. आलम यह है कि बड़े वाहन गांव तक पहुंच ही नहीं पाते हैं. मुखिया के प्रयास से कुछ मुख्य सड़कों पर मुरूम और ईंट के टुकड़े डाल कर चलने लायक बनाया गया है. मालश्रृंग पंचायत के सभी गांवों के ग्रामीण आजीविका के लिए आज भी कृषि पर निर्भर हैं.

सड़क जर्जर होने के कारण किसानों को अपनी सब्जियों को बाजार तक पहुंचाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. गांव की पीसीसी सड़कों की बात करें, तो अभी इस दिशा में काफी काम करने की जरूरत है. सिर्फ दो गांवों में ही पीसीसी पथ का निर्माण कराया गया है. इस मामले में मुखिया का कहना है कि इस बार कई पीसीसी पथों के लिए योजना स्वीकृत हुई है और उन योजनाओं पर जल्द ही काम शुरू हो जायेगा. यहां के लोगों का मुख्य पेशा कृषि है. इसे ध्यान में रखते हुए इलाके में जल स्त्रोतों को लेकर विशेष कार्य किये गये हैं. मनरेगा और जलछाजन के माध्यम से पूरे पंचायत में 25 नये डोभों का निर्माण किया गया है. पांच कुएं बने हैं. इससे इलाके मेें कृषि को और रफ्तार मिला है. कृषक मित्र के माध्यम से किसानों को लाभ मिल रहा है. किसानों को उन्नत और आधुनिक तरीके से खेती करने के बारे में जानकारी दी गयी है. इस साल कई किसानों को केसीसी कार्ड दिया गया. इससे किसानों को खेती में काफी फायदा हो रहा है. सिंचाई के लिए पर्याप्त साधन इलाके में उपलब्ध हैं. हालांकि पंचायत के कुछ गांवों में अभी भी सिंचाई की समस्या है. बावजूद इसके पंचायत के कई गांवों से आज भी हर दिन एक से दो ट्रक सब्जी दूसरे जगहों पर भेजी जाती है.

पंचायत में लैम्पस का न होना किसानों को थोड़ा परेशान जरूर करता है. पंचायत में लैम्पस के निर्माण को लेकर मुखिया की ओर से प्रयास किये जा रहे हैं. पीने के पानी की बात करें, तो पंचायत के सभी राजस्व गांवों में सौर ऊर्जा से संचालित मोटर लगाये गये हैं और पानी की टंकी बनायी गयी है. जिससे पीने के पानी को लेकर ग्रामीणों की समस्याएं कुछ हद तक कम हुई हैं. इस साल गर्मी के मौसम में पूरे पंचायत क्षेत्र में करीब 70 चापाकलों की मरम्मत कराई गयी है. बिजली की बात करें, तो पंचायत के सभी गांवों में बिजली उपलब्ध है और इस साल मुखिया के प्रयास से सभी राजस्व गांवों में बड़े ट्रांसफॉर्मर लगाये गये हैं, ताकि गांवों में निर्बाध रूप से बिजली की आपूर्ति की जा सके.

सभी को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास : झानो देवी
मुखिया झानो देवी कहती हैं कि जो भी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं सरकार द्वारा चलायी जा रही हैं, वो पंचायत के लोगों तक पहुंचे. वृद्धा पेंशन का लाभ सभी लाभुकों को मिले, इसे हमेशा सुनिश्चित किया जाता है. इसके अलावा जो लाभुक इस योजना से वंचित हैं, उन्हें पेंशन योजना से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है. विधवा पेंशन का लाभ भी जरूरतमंदों को मिल रहा है, लेकिन यह शत प्रतिशत नहीं है. अभी भी कई लोग छूटे हुए हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई लाभुकों को लाभ मिला है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 300 आवेदन जमा किये गये हैं. इन सबके बावजूद अभी भी पंचायत के विकास के लिए काफी कार्य करने बाकी हैं. पंचायत के सभी गांवों में निरंतर ग्रामसभा का आयोजन किया जाता है और कोशिश रहती है कि जो भी योजनाएं बनायी जायें, उसमें ग्रामसभा की सहमति हो. ग्रामसभा की सहमति से ही योजना बनायी जाती है. शराब बंदी को लेकर भी ग्रामसभा बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी निभा रही है. इसके कारण काफी हद तक शराब के सेवन में कमी आयी है. शराब को लेकर लोगों को जागरूक करने का अभियान भी समय-समय पर चलाया जाता है. महिला समूह की महिलाएं इस अभियान में अपनी अहम भागीदारी निभा रही हैं.

फंड की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित : अटल बिहारी सिंह
सांगा गांव के वार्ड संख्या-14 के वार्ड सदस्य अटल बिहारी सिंह कहते हैं कि मालश्रृंग पंचायत में काफी हद तक विकास कार्य हुए हैं, इसके बावजूद अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है. सांगा गांव में पीने के पानी को लेकर काफी समस्याएं हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए एक पानी की टंकी लगायी गयी, लेकिन इससे सांगा गांव के ग्रामीणों की प्यास नहीं बुझ पा रही है. पानी की समस्या को दूर करना उनके लिए चुनौती है. गांव में पीसीसी सड़क और नाली होनी चाहिए, पर फंड की कमी के कारण जनप्रतिनिधियों को विकास कार्य करने में काफी परेशानी हो रही है. मुखिया के कार्यों का जिक्र करते हुए वार्ड सदस्य कहते हैं कि मुखिया बेहतर कार्य कर रही हैं और सबके सहयोग से मालश्रृंग पंचायत का विकास होगा. वार्ड सदस्य के तौर पर उनके द्वारा गांव में साफ-सफाई को लेकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं शौचालय निर्माण कार्य को शत-प्रतिशत करने पर भी जोर दिया जा रहा है. 
 
काम तो हुआ है, लेकिन और काम होना चाहिए : तिलक
सांगा गांव के तिलक कहते हैं कि मुखिया के कार्यों से वो खुश तो हैं, लेकिन संतुष्ट नहीं हैं. पंचायत में अभी और काम करने की जरूरत है. सड़कों का हाल किसी से छिपा नहीं है. सांगा समेत आसपास के गांवों में पानी की समस्या है. हालांकि इससे निजात दिलाने के लिए मुखिया द्वारा सौर ऊर्जा से संचालित पानी की टंकी लगवायी गयी है, लेकिन पेयजल को लेकर और सुविधाएं उपलब्ध करानी होगी. तिलक कहते हैं कि पंचायत में अभी और काम होना चाहिए.