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  • Nov 20 2017 11:51AM

सिंचाई का साधन होता, तो अच्छी होती फूलों की खेती

सिंचाई का साधन होता, तो अच्छी होती फूलों की खेती
शेख कलीम
धनबाद जिले के बलियापुर प्रखंड के भिखराजपुर गांव के किसान फूलों की खेती कर जीवन-यापन करते हैं. इस गांव की आबादी करीब ढाई हजार है. यहां के 80 फीसदी किसान फूलों की खेती पर निर्भर हैं. इसके जरिए उनके परिवार का भरण-पोषण होता है. सरकारी सुविधाओं के नाम पर ज्यादा कुछ नहीं है. इसके बावजूद खुशबू की खेती कर न सिर्फ परिवार का गुजारा कर रहे हैं, बल्कि दूसरों की जिंदगी को भी खुशगंवार बना रहे हैं.
 
कई फूलों की करते हैं खेती
इस गांव के किसान बेली, जूही, गेंदा, लाल कली समेत अन्य कई प्रकार के फूलों की खेती करते हैं. सुविधाओं के अभाव के बाद भी वह पुश्तैनी धंधे को आगे बढ़ा रहे हैं. इन फूलों को झरिया, धनबाद, गोविंदपुर, सिंदरी समेत अन्य शहरों में जाकर बेचते हैं. इन किसानों को सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता. इससे सरकार के खिलाफ इनमें काफी आक्रोश है.
 
भिखराजपुर का  नहीं हुआ विकास
भिखराजपुर मोजा में प्रखंड और अंचल कार्यालय दोनों है. इसके बाद भी इसका अपेक्षित विकास नहीं हुआ है, जबकि अन्य गांवों में विकास दिखता है. गांव के किसान कहते हैं कि सिंचाई की समुचित व्यवस्था नहीं है. इसके कारण फूलों की अच्छी खेती नहीं हो पाती. सरकार द्वारा सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था की जाती, तो यहां बड़े पैमाने पर फूलों की खेती होती और किसान आर्थिक रूप से समृद्ध हो पाते.
 
किसानों का दर्द
 
सिंचाई व्यवस्था में सरकार करे मदद
75 वर्षीय मोहम्मद शहाबुद्दीन कहते हैं कि हमारे पूर्वज फूलों की खेती करते थे. यह काम उन्हें विरासत में मिला है. फूलों की खेती से ही परिवार का पालन-पोषण होता है. सिंचाई का पर्याप्त साधन नहीं है. इसकी व्यवस्था की जाती, तो किसानों की हालत भी सुधर जाती.
 
मोहम्मद इस्तार कहते हैं कि सिंचाई के साधन उपलब्ध नहीं हैं. इसके कारण फूलों की खेती पर भी असर पड़ता है. सरकार इस दिशा में सकारात्मक पहल करती, तो निश्चित तौर पर यहां फूलों की बेहतर खेती होती. इससे हम िकसानों की आमदनी भी बढ़ती.
 
हाजी मोहम्मद ऐनुल का कहना है कि भिखराजपुर में ही प्रखंड व अंचल कार्यालय है, जहां से विकास की किरणें सुदूर गांवों तक पहुंचती हैं. अन्य गांवों की हालत में कुछ सुधार है, लेकिन भिखराज गांव की सूरत नहीं बदली. सरकार इस गांव की तरफ ध्यान नहीं दे रही है.
 
मोहम्मद वहाब युवा किसान हैं. वह कहते हैं कि फूलों की अच्छी खेती के लिए सरकार की ओर से किसानों को प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है. सिंचाई की सुविधा का भी अभाव है. इसके बावजूद फूलों की खेती कर गुजर-बसर कर रहे हैं.
 
मोहम्मद करीम ने कहा कि खेतों में तरह-तरह के फूल लगे हैं. इन्हें बेचने के लिए पास में बाजार नहीं है. इस कारण अन्य शहरों में जाना पड़ता है. आसानी से फूलों की बिक्री हो पाती, तो उन्हें थोड़ी राहत मिलती.
 
मोहम्मद कुर्बान गांव के किसान हैं. फूल बेच कर घर-बार चलाते हैं. वह कहते हैं कि सरकार अगर उन जैसे किसानों को सुविधाएं मुहैया कराती, तो न सिर्फ फूलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता, बल्कि किसान भी समृद्ध होते.