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  • Oct 19 2016 1:08PM

ट्रेनिंग से जाग रहा है महिलाओं में आत्मविश्वास

ट्रेनिंग से जाग रहा है महिलाओं में आत्मविश्वास
दिनेश कुमार
बेटी हूं मैं बेटी, तारा बनूंगी
तारा बनूंगी, मैं सहारा बनूंगी
 
स्वयं सहायता समूह(एसएचजी) के ग्राम संगठन के प्रशिक्षण कार्यक्रम में यह गीत महिलाओं को सुनायी जा रही थी तथा गीत के धुन पर महिलाएं नृत्य कर रही थीं. ट्रेनर उमा देवी बताती हैं कि यह गीत, बेटी हूं मैं... इन ग्रामीण महिलाओं को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहा है और नृत्य इनमें आत्मविश्वास भर रहा है. दरअसल एसएचजी के विभिन्न ग्राम संगठनों के कार्यकारिणी सदस्यों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम रांची में आयोजित हुई. प्रशिक्षण शिविर में आयी महिलाओं को कई जानकारी विस्तार से दी गयी.  
 
महिलाएं एसएचजी से मिले ऋण को किन कार्यों में लगाए जिससे इनकी आजीविका में सुधार हो तथा समूह को पैसा भी लौटा सके. एसएचजी से लेकर ग्राम संगठन के कार्यों का कैसे प्रबंधन हो, आसपास की परिस्थितियों के आधार पर कौन-सी खेती करें, इन सभी पहलुओं पर आंध्र प्रदेश से आयी दो महिला ट्रेनरों ने प्रशिक्षण देने का काम किया. इस दौरान दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, लाह की खेती कैसे करें समेत आजीविका के कार्यों के संबंध में उपस्थित महिलाओं को बताया गया. 
 
महिला ग्राम संगठन
 
तीन दि‌वसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में नामकुम प्रखंड की जामगाई आजीविका महिला ग्राम संगठन, रामपुर आजीविका महिला ग्राम संगठन, नचदाग आजीविका महिला ग्राम संगठन, किसकी आजीविका महिला ग्राम संगठन, तुंबगुट्टू आजीविका महिला ग्राम संगठन, कुटियातु आजीविका महिला ग्राम संगठन, राजाउलातु आजीविका महिला ग्राम संगठन, लोदमा आजीविका महिला ग्राम संगठन की महिलाओं ने शिरकत की.
 
बकरी पालन से मुर्गी फार्म तक का सफर : सोहानी देवी
 
रांची जिला के नामकुम प्रखंड स्थित लोधमा गांव की सोहानी देवी एसएचजी से जुड़ने के बाद जीवन में आये परिवर्तन को व्यक्त करते हुए भावुक हो जाती है. कहती हैं, बेटे के बीमारी के दौरान पैसों के इंतजाम के लिए बहुत भटकना पड़ा. किसी तरह अपने बेटे का इलाज करवा सकी. 
इस घटना के बाद सोहानी देवी एसएचजी समूह से जुड़ी. समूह से 3000 रुपये ऋण लेकर तीन बकरी खरीदी. सोहानी के पास आज कुल 13 बकरी है और बकरी पालन से होती आमदनी से अपने बच्चों को पढ़ाते हुए अपनी गृहस्थी बखूबी चला रही है. इस वर्ष सोहानी ने समूह से 50,000 रुपये का ऋण लिया है और इन पैसों से मुर्गी फार्म खोलना चाहती है. मुर्गी फार्म खोलने के लिए विशेषज्ञों से सलाह ले रही हैं. आने वाले कुछ महीने में सोहानी पोल्ट्री फार्म का व्यवसाय शुरू कर देंगी. 
 
एसएचजी से जुड़ने से लेकर मुर्गी फार्म खोलने के विचार तक के सफर में साथ देने के लिए सोहानी समूह की सदस्यों को धन्यवाद देती है. सोहानी, सरकार से एसएचजी सदस्यों को व्यक्तिगत तौर पर लोन दिलाने की मांग की है ताकि एसएचजी सदस्य कुछ बड़ा व्यवसाय कर सके. अभी तक समूह से ही लोन मिलता है. वे अपनी मांग के समर्थन में एक उदाहरण देती हैं. एक समूह में कम से कम 10 सदस्य होते हैं. अगर समूह को एक लाख रुपये का ऋण मिलता है तो प्रत्येक सदस्य को 10,000 रुपये ही ऋण मिल पायेगा. 
 
एसएचजी ने बनाया 84 हजार की मालकिन : अनीता 
 
नामकुम प्रखंड के कुटीयातु गांव की अनीता देवी कहती है, ऋण के नाम पर आज भी कई महिला डरती है. पहले हमें भी डर लगा लेकिन साहस कर 10 हजार रुपये का ऋण समूह से लिया और उससे सूकर पालन शुरू किया. एक साल बाद ही 30 हजार रुपये में सूकरों को बेचा. ऋण लिए 10 हजार रुपये को समूह को वापस करते हुए अनीता को 20 हजार रुपये की आमदनी हुई.
 
अनीता ने एक बार फिर 30 हजार रुपये का दूसरा ऋण लिया. इस ऋण से इन्होंने अपने गांव में एक किराने की दुकान खोली है जिसे इनके पति चलाते हैं. अनिता कहती हैं कि अब पति-पत्नी दोनों को रोजगार मिल गया है, जिससे हमारे जीवन-स्तर में सुधार आया है. समूह से पैसा लेकर ही इन्होंने अपने बच्चों का स्कूल में नामाकंन कराया है. इस तरह अनीता खुद अपना और अपने बच्चों का भविष्य सवार रही हैं. ऋण लिए 30 हजार रुपये को अनीता 500 रुपये प्रति महीना के हिसाब से एसएचजी को लौटा रही हैं. 
 
अनीता दुकान चलाने के साथ सूकर पालन का व्यवसाय भी जारी रखी है. अब इनके पास सूकरों की संख्या 12 हो गया है. बाजार में एक सूकर की कीमत 7000 रुपये होता है. जगह और दाना के लिए पूंजी की कमी के कारण अनीता कम सूकरों का पालन कर रही है. इस तरह अनीता एसएचजी से जुड़कर 84 हजार रुपये की मालकिन भी बन गयी है और अपने पति को दुकान खुलवा कर रोजगार देने का काम भी किया है.