blog

  • Dec 23 2016 8:07AM

मंजिलें और भी हैं...

मंजिलें और भी हैं...

बी-पॉजिटिव

विजय बहादुर

vijay@prabhatkhabar.in

रो जाना नए स्टार्टअप खुलने और साथ में बंद होने की भी चर्चा सुनने में आती है. इन सभी के बीच बेंगलुरु के एक स्टार्ट अप गोजूमो.कॉम के बारे में पढ़ा. कैसे एक मुकाम पर जाने के बाद इसे शुरू करने वाले युवाओं ने इससे एग्जिट (बंद) करने का फैसला लिया. लेकिन, उससे भी महत्वपूर्ण बात थी कि कैसे कंपनी के सीइओ व को-फाउंडर अर्णव कुमार और उनके पार्टनर्स ने इन्वेस्टर्स का पैसा लौटा दिया, जबकि उनके पास कंपनी चलाने के लिए दो वर्ष का फंड मौजूद था. फिर पता चला कि अर्णव कुमार मूल रूप से रांची से ही हैं और उनकी स्कूली शिक्षा डीएवी श्यामली, रांची में ही हुई है. उनकी माता डॉ माया कुमार 17 वर्षों से चिरंजीवी पब्लिक स्कूल चलाती हैं और उससे पहले नवोदय स्कूल में टीचर थीं. पिताजी फिलहाल संत जेवियर कॉलेज में फिजिक्स के हेड ऑफ दि डिपार्टमेंट हैं. 

रांची से आइआइटी खड़गपुर और फिर नौकरी का सफर : अर्णव मानते हैं कि परिवार में शैक्षणिक माहौल होने के कारण किताबों के प्रति प्रेम और कुछ नया करने की चाहत बचपन से रही. जेइइ की तैयारी दसवीं कक्षा से ही शुरू कर दी, लेकिन पहले प्रयास में वे असफल रहे. उनके लिए यह किसी सदमे से कम नहीं था लेकिन दूसरे प्रयास में उनका दाखिला आइआइटी खड़गपुर में हो गया. 

आइआइटी में महत्वाकांक्षी और प्रतिभाशाली दोस्तों के साथ पढ़ना बहुत ही अनोखा अनुभव था. हर किसी के लिए एकेडमिक्स के साथ अपनी अभिरुचि और लीडरशिप स्किल को निखारने का बेहतरीन माहौल था. आइआइटी खड़गपुर के इसी माहौल ने उन्हें बेहतर इंसान बनने में मदद की. ग्रेजुएट होते ही अर्णव ने deutsche बैंक कैपिटल मार्केट मुंबई में नौकरी शुरू की जो किसी भी युवा के लिए एक शानदार शुरुआत थी और वहीं फाइनेंशियल मार्केट को समझने का मौका भी मिला. इसके बाद अर्णव ने एक स्टार्टअप urbantouch.com में कैटगरी मैनेजर के रूप में ज्वाइन किया. urbantouch.com को बाद में fashionandyou.com ने खरीद लिया. urbantouch.com जैसे स्टार्टअप में काम करना उनके लिए बहुत ही बेहतरीन अनुभव था. 

अर्णव कहते हैं कि स्टार्टअप एक सरल बिजनेस मॉडल नहीं है. इसमें आपको कल्पना करने के बाद उसे पूरा करने की विषम चुनौती लेनी पड़ती है. साथ में बहुत सारे रोल में अपने आपको फिट भी करना पड़ता है. किसी भी स्टार्टअप में लगातार जूझने, विकसित करने और समय के साथ जरूरत के हिसाब से परिवर्तन करने की जरूरत होती है. कोई एक क्षण नहीं होता है जब आप विराम ले सकते हैं क्योंकि फीडबैक बहुत कम समय में ही मिल जाता है. आप बहुत कम समय में अपने किये हुए काम का बढ़िया परिणाम देखना चाहते हैं. मन में ये विचार हमेशा चलता रहता है कि कैसे चीजों को दस गुना बेहतर तरीके से किया जाए. 

आगे मंजिल और भी है : अर्णव कहते हैं कि गोजूमो.कॉम का बंद होना उन्हें हतोत्साहित नहीं करता बल्कि और मजबूती से बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है और शायद इसलिए स्टार्टअप की रोमांचकारी दुनिया में नया मुकाम तलाशने की कोशिश कर रहा हूं. नयी मंजिल के लिए गोजूमो.कॉम एक सबक है, जो आपने अच्छा किया है उसे आगे बढ़ाएं और जो सही नहीं हुआ उसे बेहतर करें. कोशिश करें, असफल हों तो फिर कोशिश करते रहें. 

खुद का स्टार्टअप (गोजूमो.कॉम) शुरू करना 

urbantouch.com में काम के दौरान ही अर्णव की समान विचार वाले युवाओं के साथ एक बेहतरीन टीम बन गयी और उन्होंने मिलकर खुद का स्टार्टअप गोजूमो.कॉम शुरू किया. गोजूमो.कॉम पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री का एक ऑनलाइन मार्केट प्लेस था जहां बिना किसी बिचौलिये के लोग खुद से गाड़ियों की खरीद बिक्री कर सकते थे. अर्णव मानते हैं कि एक जैसे विचार वालों के साथ कुछ नया काम करना और ये महसूस करना कि यह जो हमलोगों ने किया है, यह कुछ अलग है और इससे लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव हो रहा है. किसी भी स्टार्टअप का एक सपना और एक लक्ष्य होता है. जड़ता को तोड़कर 10 गुना बेहतर चीज का सृजन करना बहुत ही आनंदायक होता है. 

गोजूमो.कॉम की चुनौतियां

अर्णव कहते हैं कि प्रत्येक उद्यमी के लिए चुनौती है कि वह बाजार में एक ऐसा प्रॉडक्ट लेकर आये, जो लोगों को पसंद आये और लोग उसे खरीदें. मार्केट की जरूरत को समझ कर सॉल्यूशन बनाकर लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंचाना किसी भी बिजनेस की सफलता का मूल मंत्र होता है. इसका कोई सरल फार्मूला नहीं है. इसलिए किसी भी अच्छी कंपनी को सफल होने में वर्षों लग जाते हैं. गोजूमो.कॉम की चुनौती भी इससे कुछ अलग नहीं थी. पूरी टीम ने बहुत ही ऊर्जा के साथ शुरुआत की लेकिन काम को प्रवीणता से करने के लिए जरूरी अनुभव की कमी थी. अर्णव कहते हैं कि उनकी टीम को लगता था कि काम करना ही सफलता का मूल मंत्र है. 

लेकिन बाद में यह महसूस हुआ की टाइमिंग ज्यादा महत्वपूर्ण है. हरेक आइडिया के सफल होने का एक सही समय होता है. छोटी-सी खिड़की किसी भी अवसर को सफल होने के लिए काफी नहीं होती है. बड़ा अवसर तब पैदा होता है, जब वर्तमान तकनीक या डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल में बुनियादी परिवर्तन होता है. और इस समय को पहचान कर सही समय पर शुरुआत करना ही सफलता की गारंटी है. समय से पहले या बाद में शुरुआत करने का कोई लाभ नहीं है. शायद यही वजह थी की हमलोगों ने गोज़ूमों.कॉम को बंद करने का निर्णय लिया.

युवाओं के लिए संदेश 

अर्णव कहते हैं कि हम सभी युवा वैसे समय में हैं जब तकनीक में हर दिन कुछ नया हो रहा है, जिसने जीवन को बहुत ही आरामदायक बना दिया है और आने वाले समय में भी कोर तकनीक में विकास के कारण चीजें और बेहतर होंगी. इसलिए अगर युवाओं के लिए सबसे सफल करियर टेक्नोलॉजी रिसर्च और तकनीक के कमर्शियल उपयोग वाले क्षेत्रों में होगा. 

तकनीक का नया विकास जीनोम सिक्वेंसिंग, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, बायो डाटा प्रबंधन, कमर्शियल स्पेस ट्रेवल, इंटेलीजेंट क्रिप्टोकरेंसी, एडवांस रोबॉटिक्स, 3 डी प्रिंटिंग जैसे क्षेत्रों में होगा. तकनीक के विकास के साथ इकॉनॉमिक पिरामिड नीचे की तरफ बढ़ रहा है और ये छोटे शहर के उद्यमियों के लिए नए अवसर खोल रहा है. छोटे शहर के युवाओं में जूझने का माद्दा ज्यादा होता है, इसलिए उनके लिए जमीनी समस्या को पहचान कर बड़ी कंपनी बनाने के अवसर ज्यादा हैं.