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  • Jan 27 2017 6:45AM

अभाव चुनौती है, तो जुझने का साहस भी

अभाव चुनौती है, तो जुझने का साहस भी
आइआइटी में पहुंचने वाले अमरदीप की कहानी
विजय बहादुर
vijay@prabhatkhabar.in
 
पत्तों पर ठिठके ओस और आंचल में सिमटे बच्चे का अगला पड़ाव कहां होगा शायद यह कोई नहीं जानता. अमरदीप भी मेरे सुपर 30  के पत्तों पर ओस की बूंदों की तरह बिखरा था. कुछ वर्षों पहले माफियाओं द्वारा मुझ पर हमला हुआ था और अमरदीप मेरे अंगरक्षक के रूप में कई वर्षों तक मेरे साथ रहने वाले प्रदीप चौधरी का पुत्र है. बचपन से ही सुपर 30 के आंगन में वह अपने पिता के साथ आया था और उसके पिता जिनके कंधों पर छह संतानों के साथ-साथ माता-पिता की भी जिम्मेवारी थी, मन ही मन सदा यही सोचकर मुस्कुराते रहते थे कि एक न एक दिन मेरा बेटा भी सुपर 30 का हिस्सा बनेगा और फिर वह दिन आ ही गया. 
 
पिता को कई बार बहुत अच्छी  जगह पर दूसरे थाने में जाकर नौकरी करने का ऑफर भी मिला लेकिन उन्होंने वह स्वीकार नहीं किया. मुझ पर हुए हमले के दरमियान प्रदीप चौधरी ने अपनी जान की परवाह किए बगैर अपनी ड्यूटी निभायी. आज अमरदीप अपने पिता के कुल का दीपक बनकर चमक रहा है. वह आइआइटी,  खड़गपुर में फर्स्ट इयर का स्टूडेंट है. पिता का सीना गर्व से ऊंचा हो गया है. दो महीने पहले उसके पिता का प्रमोशन भी हो गया. अब वो मेरे साथ नहीं हैं. लेकिन आज अमरदीप जब वह दुर्गा पूजा की छुट्टी में घर आया हुआ है तब वह मुझसे मिलने आया. उससे मिलकर ऐसा लगा जैसे ओस की वह छोटी-सी बूंद आज आशा की बड़ी नदी बन गयी है. बस मैं तो यही चाहता हूँ कि हर ओस की अंत एक बड़ी आशा की नदी के रूप में ही हो.
 
सुपर थर्टी से हर साल आइआइटी में सफल होने वाले विद्यार्थियों की लंबी फेहरिस्त होती है लेकिन  किसी विशेष के बारे में अगर आनंद कुमार इस तरह की भावना व्यक्त करते हैं तो मान लीजिए की उसकी सफलता की दास्तां में कुछ खास तो जरूर होगा.अमरदीप कुमार ने इस साल अपने दूसरे प्रयास में आइआइटी में सफलता हासिल की है. अमरदीप  बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से है. 
 
अमरदीप के  दादा और दादी ने मजदूरी कर उसके पिताजी प्रदीप चौधरी को इंटर तक की शिक्षा दिलायी. उसके बाद प्रदीप चौधरी की नियुक्ति बिहार सरकार में सिपाही के रूप में हो गयी.  साल 2007 में प्रदीप कुमार की ड्यूटी सुपर 30 के आनंद कुमार के अंगरक्षक के रूप में लगी. शायद यही अमरदीप के जीवन का टर्निंग प्वाइंट था.  प्रदीप चौधरी के जीवन का एकमेव लक्ष्य था  अमरदीप की अच्छी शिक्षा,  ताकि जीवन में जो वो नहीं कर सके वो उनका बेटा हासिल कर उनके सपनों को सच करे. प्रदीप चौधरी ने आनंद कुमार से एक ही आग्रह किया कि वो अमरदीप की शिक्षा की व्यवस्था किसी अच्छे स्कूल में कर दें क्योंकि एडमिशन फी देना उनके बुते के बाहर की बात थी.  
 
आनंद कुमार के आर्थिक सहयोग के कारण अमरदीप का साल 2009 में नामांकन बीडी पब्लिक स्कूल, बुद्धा कॉलोनी में हो सका. साल 2013 में 10वीं पास करने के बाद अमरदीप ने सत्यम इंटरनेशनल स्कूल, गौरियाचक में नामांकन लिया साथ में आनंद कुमार के सुपर थर्टी में भी पढाई शुरू कर दी. 2016 का वर्ष अमरदीप के लिए खास था क्योंकि उसका दाखिला आइआइटी, खड़गपुर में इंडस्ट्रियल एंड सिस्टम इंजीनियरिंग विभाग में हो गया.
 
आज अमरदीप वैसी जगह पहुंच गया है, जहां से वो आगे नयी मंजिलों की  तरफ बढ़ सकता है. अमरदीप से जब मैंने पूछा की गरीबी और मुफलिसी में रहने का मतलब क्या है? उसने बहुत ही सहजता से कहा की जहां गरीबी एक तरफ चुनौतियां देती है वही उससे जूझने का साहस भी देती है. गरीब को पता होता है की पढ़ाई ही एक दीया है जो उसे और उसके परिवार को गरीबी से दूर ले जा सकता है लेकिन साथ में उसे यह भी पता होता है कि उसके पास गलती की गुंजाइश के लिए कोई जगह नहीं है. गरीब के पास खोने को कुछ नहीं होता है लेकिन पाने के लिए सारा संसार होता है. 
 
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सोशल ऑडिट में करें सर्टिफिकेट कोर्स शुरू
 
राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (हेहेल) ने सोशल ऑडिट में प्रखंड स्त्राेत व्यक्ति यानी (ब्लॉक रिप्रेंजेटेटिव पर्सन- बीआरपी) के लिए 30 दिनों का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया है. इस कोर्स को केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान (हैदराबाद) और टाटा सामाजिक विकास संस्थान (टीआइएसएस) के सहयोग से तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य सोशल ऑडिट में योगदान देने वालों में कौशल विकास और प्रभावी तरीके से कार्य कार्यान्वित करना मुख्य है. झारखंड में सात बैच में बीआरपी को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. 
 
झारखंड ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव एनएन सिन्हा, पंचायती राज विभाग की सचिव वंदना दादेल, मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी और सोशल ऑडिट यूनिट के राज्य समन्वयक गुरजीत सिंह तथा राज्य स्रोत समूह के बलराम और ब्योमकेश कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रजवलित कर इस प्रशिक्षण की विधिवत शुरुआत की. इस अवसर पर ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव एनएन सिन्हा ने सोशल ऑ़डिट को सामाजिक क्रांति बताया और प्रशिक्षुओं से इस कार्य में निष्ठापूर्वक जुड़ने की अपील करते हुये कहा कि हाल के वर्षों में ग्रामीण विकास विभाग ने कई उपलब्धियां हासिल की है. 
 
यह एक और मील का पत्थर साबित होगा, इसमें कोई शक नहीं. पंचायती राज विभाग की सचिव वंदना दादेल ने कहा की यह प्रशिक्षण देशव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत सोशल ऑडिट के कार्य को प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने की दक्षताओं को विकसित किया जा सकता है. राज्य समन्वयक गुरजीत सिंह ने कहा कि झारखंड में आदर्श सोशल ऑडिट के लिए हर तैयारी की जा रही है और लोगों को उनके हक और अधिकार के संबंध में जागरूक व संगठित तथा सूचित करने के हर प्रयासों में हमारी भूमिका रहेगी.