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  • Apr 3 2018 11:55AM

संताल में दूध व्यवसाय से आत्मनिर्भर हो रहे किसान

संताल में दूध व्यवसाय से आत्मनिर्भर हो रहे किसान

 संजीव मिश्रा


संताल परगना में बीपीएल महिलाओं को 90 फीसदी अनुदान पर गाय देने की योजना कारगर साबित हो रही है. महिलाएं दूध उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर हो रही हैं. देवघर जिले के विभिन्न प्रखंडों में चार हजार के करीब दुधारू मवेशियों का वितरण किया जा चुका है. 2016 से संताल के तीन जिलों में दूध का अच्छा उत्पादन हो रहा है.

दूध उत्पादन बढ़ने से गांवों में बढ़ने लगा बाजार
दूध उत्पादन की क्षमता बढ़ने से झारखंड मिल्क फेडरेशन ने गांवों में अब बाजार का विस्तारीकरण करना तेजी से प्रारंभ कर दिया है. विभाग की ओर से दूध संग्रहण केंद्र में तैयार उत्पादों को बेचा जा रहा है.

अधिक उत्पादन को देखते हुए सारठ में अधिक क्षमता वाले प्लांट का होगा निर्माण
संताल परगना में लगातार दूध उत्पादन में तेजी की वजह से देवघर प्रोसेसिंग प्लांट को अपग्रेड करते हुए सारठ में 50 हजार लीटर क्षमता का प्लांट लगाया जा रहा है. बता दें कि देवघर में आठ हजार लीटर दूध की क्षमता को अपग्रेड करते हुए 15 हजार लीटर क्षमता किया गया था.

दो साल में एकाएक हो गयी वृद्धि
झारखंड मिल्क फेडरेशन के तहत वर्ष 2016 में जहां दूध मित्रों की संख्या 976 थी, वहीं 2018 में इसकी संख्या बढ़ कर 3367 हो गयी है. 2016 में दूध उत्पादन 908 लीटर के करीब था, जो 2018 में 17,980 लीटर से अधिक हो गया है.

किसानों को किया जा रहा है प्रोत्साहित
झारखंड मिल्क फेडरेशन की ओर से किसानों को लगातार मदद दी जा रही है. मवेशियों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच, अनुदान राशि पर चारा व दवाइयों के अलावा दूध संग्रहण के लिए करीब 50 केंद्र का संचालन किया जा रहा है.

दूध उत्पादन के प्रति किसान हो रहे जागरूक : मिलन मिश्रा
मिल्क फेडरेशन के अधिकारी मिलन मिश्रा कहते हैं कि दुग्ध उत्पादन में वृद्धि की तीन मुख्य वजह है. पहला किसानों के खाते में हर 10 दिनों में डीबीटी से राशि का भुगतान, दूसरा हरा चारा की जानकारी देकर वितरण करना और तीसरा कैटल फीट (चारा) भी समय-समय पर अनुदान राशि पर किसानों को दिया जाना है. इससे किसान दुग्ध उत्पादन के प्रति गंभीर हो रहे हैं.