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  • Dec 31 2018 4:58PM

पर्यटकों का मन-मोहते सात समुंदर पार से आये साइबेरियन सीगल

पर्यटकों का मन-मोहते सात समुंदर पार से आये साइबेरियन सीगल

सचिंद्र कुमार दास
सरायकेला

सरायकेला-खरसावां जिले का चांडिल व पालना, राजनगर के काशीदा डैम व चालियामा तथा खरसावां के केरकेट्टा डैम समेत विभिन्न क्षेत्रों में इन दिनों सात समंदर पार से विदेशी पंक्षियों के पहुंचने का दौर शुरू हो गया है. काफी संख्या में विदेशी पक्षी यहां पहुंचे हैं. सुबह-शाम चहचहाती इन पक्षियों की आवाज से मन को सुकून मिलता है. लाखों मिल दूरी तय कर आये ये साइबेरियन पक्षी देखने में देसी बगुले जैसे होते हैं. इनकी गरदन पर बादामी रंग चढ़ा रहता है, जो इनकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है

प्रजनन के लिए यहां पहुंचती है विदेशी पक्षी
जानकार बताते हैं कि विदेशी साइबेरियन पक्षियों को सरायकेला-खरसावां समेत पूर्वी भारत का हिस्सा खूब भाता है. खास कर प्रजनन के लिए. नवंबर माह के अंत तक साइबेरियन पक्षियों का यहां जमावड़ा लगा रहता है. करीब चार-पांच माह यहां रहने के बाद अप्रैल के आस-पास अपने बच्चों के साथ स्वदेश लौट जाते हैं.

पक्षियों की सुरक्षा का विशेष ख्याल
विदेशी पक्षियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. पूर्व में प्रवासी पक्षियों का लोग चोरी-छिपे शिकार करते थे, लेकिन अब इन पक्षियों की सुरक्षा की जा रही है. पक्षियों का शिकार पूरी तरह से बंद है. चांडिल डैम में बनाये गये केज के साथ-साथ बड़े-बड़े पेड़ इन पक्षियों के रहने का अस्थायी ठिकाना हैं. इससे इनकी संख्या में आये दिन बढ़ोतरी हो रही है.

पक्षियों को खूब भा रहा मछलियों का दाना
चांडिल डैम के केज में मछलियों को भोजन के रूप में दिया जानेवाला दाना इन साइबेरियन पक्षियों को खूब भा रहा है. इन दानों को वे बड़े चाव से खाते हैं.

पक्षियों को देखने के लिए पहुंच रहे हैं सैलानी
साइबेरियन पक्षियों को नजदीक से देखने के लिए काफी संख्या में सैलानी चांडिल डैम पहुंच रहे हैं. इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल रहा है. झारखंड, बंगाल व ओड़िशा के लोग भी इन पक्षियों को देखने आते हैं