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  • Feb 16 2017 9:23AM

अयंग जला रहा है शिक्षा का लौ

अयंग जला रहा है शिक्षा का लौ
रांची जिला के मांडर प्रखंड स्थित कैम्बो पंचायत के सुदूरवर्ती गांव गुड़गुड़जारी में युवाओं की टीम अयंग (एसोसिएशन ऑफ आदिवासी फॉर नेशन्स ग्रोथ) शिक्षा का अलख जगा रहा है. स्कूल का नाम अयंग शिक्षा निकेतन है, जहां ग्रामीण बच्चें नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. 
 
इस स्कूल में विशेष कर वैसे बच्चे पढ़ रहे हैं, जो गरीब और अनाथ हैं. स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को भी स्कूल से जोड़ा जा रहा है. यहां करीब 45 वैसे बच्चे हैं, जो अनाथ हैं, उनके लिए अयंग शिक्षा निकेतन की ओर से बाल छात्रावास की व्यवस्था की गयी है. देहात होने के कारण इस गुड़गुड़जारी गांव में कई ऐसे परिवार हैं, जो दूसरे काम की तलाश में गांव से पलायन कर जाते हैं, उनके बच्चों को भी अयंग शिक्षा दे रहा है. 
 
कोई चावल, तो कोई सब्जी से करता मदद
 
अयंग शिक्षा निकेतन के बच्चों के पढ़ने के अलावा अनाथ 45 बच्चों के लिए बाल छात्रावास बनाया गया, जहां उनके खाने-पीने, पढ़ने और रहने की सारी व्यवस्था अयंग द्वारा की जाती है. अयंग में स्थानीय ग्रामीणों के अलावा कई ऐसे लोग भी हैं, जो अच्छे पदों पर कार्यरत हैं. 
अयंग शिक्षा निकेतन को चलाने में स्थानीय ग्रामीणों के अलावा अयंग से जुड़े सभी लोग अपने-अपने स्तर से सहयोग देते हैं, जहां नौकरी करने वाले लोग हरसंभव मदद देते हैं, वहीं स्थानीय ग्रामीण भी इस सहयोग में पीछे नहीं रहते हैं. कोई अपने खेत में उपजाए गये चावल को देता है, तो कोई अपने गांव की बाड़ी में उगी सब्जियों को देता है. इसी तरह सभी के सहयोग से अयंग चल रहा है और शिक्षा का ज्योत हर बच्चे में जलाया जा रहा है. गुड़गुड़जारी िस्थत सामुदाियक भवन जर्जर अवस्था में था, अयंग ने इस भवन की मरम्मत कर इसी भवन में शिक्षा का केंद्र स्थापित करने का निर्णय लिया और उसे अयंग शिक्षा निकेतन का नाम देकर स्थानीय बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का काम शुरू िकया. 
 
संस्कार की भी शिक्षा देता है अयंग
 
अयंग शिक्षा निकेतन में सिर्फ शिक्षा ही नहीं बल्कि अपने समाज, भाषा, संस्कार से भी बच्चों को रू-ब-रू कराया जाता है ताकि आने वाले भविष्य अपनी संस्कृति को न भूले. विभिन्न खेलों के जरिये बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास भी होता है. अयंग अपने लक्ष्य को पूरा करने में अग्रसर है, लेकिन कई परेशानियां भी सामने आती है. बच्चों की संख्या जिस तेजी से बढ़ रही है, इससे कठिनाई भी हो रही है. सीमित संसाधनों के बावजूद अयंग सभी बच्चों को अपनी छत्रछाया में शिक्षा दे रहे हैं. 
 
शिक्षा के प्रति बच्चों में जागरूकता बढ़ाना मुख्य उद्देश्य : हेमू टोप्पो
 
अयंग शिक्षा निकेतन के स्कूल प्रबंधन के अध्यक्ष हेमू टोप्पो कहते हैं कि अयंग का लक्ष्य शिक्षा से वंचित ग्रामीण क्षेत्र के आदिवासी व अन्य बच्चों को स्कूली शिक्षा देना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है. कहते हैं कि अयंग सामाजिक विकास के उद्देश्य से काम कर रही है, इसमें सभी को आगे आना चाहिए. इस दिशा में अयंग सीमित संसाधनों के बावजूद अपने कामों को निरंतर आगे बढ़ा रही है.