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  • Apr 20 2017 12:40PM

पूर्व मुखिया कान्हू मुर्मू की मेहनत लायी रंग, लाइब्रेरी बना कर युवाओं को जोड़ने की मुहिम

पूर्व मुखिया कान्हू मुर्मू की मेहनत लायी रंग, लाइब्रेरी बना कर युवाओं को जोड़ने की मुहिम

वीरेंद्र कुमार सिंह

जमशेदपुर प्रखंड के केरुआडूगड़ी पंचायत अंर्तगत एक गांव है छोटा तालसा. यह गांव चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है. इस गांव के परिधि में ही भारत सरकार का एक प्रतिष्ठान तुरामडीह यूरेनियम प्रोजेक्ट है. इसके बावजूद विकास की किरणें यहां तक नहीं पहुंची, लेकिन यहां के युवकों के मन में कुछ करने का जज्बा है. युवाओं की मंशा को पूरा करने के लिए संसाधन बना है एक छोटा-सा लाइब्रेरी. इसे सिदो-कान्हू लाइब्रेरी के नाम से जानते हैं. लाइब्रेरी में लगभग सौ की संख्या में किताबें भी है. पूर्व मुखिया कान्हू मुर्मू के प्रयास से टीएसआरडीएस के द्वारा लाइब्रेरी में किताबें मुहैया करायी गयी. यहां के कई युवकों ने इस लाइब्रेरी में ही पढ़ कर सरकारी व अन्य कंपनियों में नौकरी पायी है. सुबह छह बजे से नौ बजे और फिर दस से शाम चार बजे तक यह लाइब्रेरी खुली रहती है. लाइब्रेरी में सभी वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं. गांव के ही अध्ययनरत छात्र मिल-जुल कर इस लाइब्रेरी का संचालन भी करते हैं. 

इसी लाइब्रेरी से अध्ययनरत नंदी मुर्मू बीएससी कर एक साल से एटोमिक मिनरल डिविजन, दाशमत मुर्मू एनआइटी जमशेदपुर से बीटेक, बाबूलाल हांसदा, राजकुमार बेसार टिस्को अप्रेंटिसशिप में काम कर रहा है. इतना ही नहीं,  लाइब्रेरी का समुचित उपयोग कर अब तक दर्जनों छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए हैं. शाम पांच बजे से रात आठ बजे तक यहां क्लास भी चलता है. पूर्व सांसद डाॅ अजय कुमार ने यहां सोलर लाइट की व्यवस्था की थी ताकि छात्रों को पढ़ने में कोई परेशानी ना हो. ऐसी बात नहीं है कि लाइब्रेरी में केवल उच्च वर्ग के ही छात्र पढ़ते हैं, बल्कि यहां के सीनियर छात्र जूनियर छात्रों को भी पढ़ाते हैं. फिलहाल पहली कक्षा से लेकर ग्रेजुएशन तक 126 छात्र-छात्राएं इस लाइब्रेरी में प्रतिदिन अपने समयानुसार आते हैं और अध्ययन करते हैं. कुल मिलाकर यह लाइब्रेरी कम संसाधन में भी बच्चों में पढ़ाई के प्रति जज्बा पैदा कर रहा है. 

पढ़ाई के प्रति जज्बा पैदा करने की कोशिश

पूर्व मुखिया कान्हू मुर्मू कहते हैं, पहले पढ़ाई के प्रति यहां के बच्चों में रूचि नहीं के बराबर थी. यहां ज्यादातर लोग नशे के शिकार थे. कहते हैं, सबसे पहले यहां लोगों में नशापान बंद कराया. वह भी यहां के युवकों के जन-जागरण के द्वारा. इसके बाद 2014 में लाइब्रेरी की स्थापना की तथा युवकों को इससे जोड़ा. आज इस लाइब्रेरी से काफी संख्या में छात्र-छात्राएं लाभ उठा रहे हैं.