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  • Apr 22 2017 1:26PM

आपसी सामंजस्य बना कर विकास करने के सिखे गुर

आपसी सामंजस्य बना कर विकास करने के सिखे गुर
समीर रंजन:
जिला परिषद, ग्राम पंचायत व पंचायत समिति के बीच बेहतर तालमेल हो, इसी उद्देश्य को ध्यान में रख कर जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्षों का प्रशिक्षण शिविर आयोजित हुआ. यह आयोजन तेलंगाना राज्य की राजधानी हैदराबाद में 20 से 24 मार्च को आयोजित हुआ. इस प्रशिक्षण शिविर में झारखंड के करीब सभी जिले (दुमका, पाकुड़, देवघर व लातेहार जिले को छोड़) के जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्षों ने शिरकत की. राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान, हैदराबाद की ओर से आयोजित इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण सह पंचायत भ्रमण का आयोजन हुआ. 

इसके तहत जिप अध्यक्ष व उपाध्यक्षों को जहां दूसरे राज्य के जिला परिषद के कार्यों को सामने से देखने का अनुभव प्राप्त हुआ, वहीं वारंगल जिला परिषद और गंगादेवपल्ली ग्राम पंचायत के उत्कृष्ट कार्यों को देखने व समझने का मौका मिला. प्रशिक्षण में झारखंड के जिला परिषद के कार्यों को एक नयी दिशा मिलने की संभावना है. प्रशिक्षण के अंतिम दिन एनआइआरडी के महानिदेशक डब्ल्यूआर रेड्डी ने झारखंड के जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को बेहतर तरीके से काम करने के लिए प्रोत्साहित किया. इस पांच दिनी कार्यशाला में एनआइआरडी के मुख्य व्याख्याता एसएन राव, रजनीकांत, केशव राव व ज्ञानमुद्रा ने सत्र को संबोधित किया. 
 
प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिला परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्षों को प्रशिक्षण व भ्रमण के द्वारा जिला परिषद की विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराना था. साथ ही जिला परिषद, ग्राम पंचायत व पंचायत समिति के बेहतर समन्वय स्थापित करना इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य था. इसके अलावा झारखंड में दूसरे पंचायत चुनाव के उपरांत निर्वाचित जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को प्रशिक्षण ट्रेनिंग नहीं दी गयी थी. 

इसी को ध्यान में रखते हुए पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने इस बार राज्य के जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्षों का प्रशिक्षण आयोजित किया. इस प्रशिक्षण शिविर में जिला परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को दूसरे राज्यों के जिला परिषद के कार्यों से अवगत कराया गया. इसके अलावा गुड गवर्नेंस, लीडरशिप, जीआइएस मैपिंग की पंचायती राज व्यवस्था में भूमिका, जल प्रबंधन आदि विषयों के बारे में भी जिला परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों को विस्तार से बताया गया. 
 
वारंगल जिला परिषद का भ्रमण 
झारखंड से गये विभिन्न जिलों के जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्षों को वारंगल जिला परिषद के उपाध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक पदािधकारी, प्रतिनिधियों एवं निर्वाचित प्रतिनिधियों व कर्मयों के साथ जिला परिषद के शक्तियों, अधिकार, कार्य एवं आय के साधन में वृद्धि एवं तीनों स्तर की पंचायतों में समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गयी.
 
गंगादेवपल्ली पंचायत की खासियत 
तेलंगाना की गंगादेवपल्ली ग्राम पंचायत देश की अग्रणी ग्राम पंचायतों में से एक है. यह पंचायत शत-प्रतिशत साक्षरता, नल द्वारा जल की उपलब्धता, हर घर में शौचालय के अलावा इस पंचायत के लोगों के बीच एक रुपये में 20 लीटर शुद्ध पेयजल की उपलब्ध है. साथ ही साफ-सफाई की उत्तम व्यवस्था और नशामुक्त है यह पंचायत. इस पंचायत को मंडल और जिला स्तर पर उत्कृष्ट पंचायत का पुरस्कार भी मिला चुका है.
 
एनआइआरडीपीआरआइ 
यह शीर्षस्थ प्रशिक्षण संस्थान है, जो ग्रामीण विकास और पंचायतों के पदाधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देती है. इस प्रशिक्षण शिविर में राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआइआडीपीआरआइ) के पदाधिकारियों ने झारखंड के जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्षों को जिला परिषद की कार्यप्रणाली संबंधी प्रावधानों, प्रक्रिया, सहभागी योजना बनाने की प्रक्रिया, योजना निर्माण में भू-क्षेत्रीय सूचना प्रणाली की भूमिका, आय के श्रोत एवं नेतृत्व कौशल विकास के संदर्भ में जानकारी और उसके सफलतापूर्वक संचालन के गुर सिखाये.
 
प्रशिक्षण का मुख्य विषय 
झारखंड में पंचायती राज संस्थाओं से संबंधित प्रावधान एवं उनके क्रियान्वयन की स्थिति
विकेंद्रीकृत एवं सहभागी नियोजन में जिला परिषद की भूमिका
विकेंद्रीकृत एवं सहभागी नियोजन को सही रूप में धरातल पर उतारने के तरीके, साधन व प्रक्रिया
ग्राम पंचायत विकास योजना में जिला परिषद की भूमिका (तेलंगाना में ग्राम पंचायत विकास योजना के अच्छे अभ्यासों के संदर्भ में) 
विकेंद्रीकृत एवं सहभागी नियोजन में रिमोट सेसिंग एवं जीआइएस एप्लीकेशन की महत्ता, उपयोगिता एवं प्रयोग में लाये जाने की विधि 
विकास के बदलते स्वरूप विशेषत: जलवायु परिवर्तन में पंचायती राज संस्थाओं की भूमिका 
जिला परिषद के निर्वाचित प्रतिनिधियों के प्रभावी नेतृत्व एवं संचार व्यवस्था के तरीके
पेसा से संबंधित प्रावधान एवं आदिवासी-स्वशासी व्यवस्था का सशक्तीकरण
जिला परिषद के अपने आय के साधनों के सृजन के उत्कृष्ट उदाहरण और
स्थानीय स्वशासन के अच्छे उदाहरण एवं संभावित तरीके
 
क्या कहते हैं पंचायत जनप्रतिनिधि
पंचायत जनप्रतिनिधि अपने दायित्वों के प्रति हों सचेत
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शािमल होनेवाली कोडरमा के िजला परिषद अध्यक्ष शालिनी गुप्ता कहती हैं िक िजला परिषद के कार्यों को बेहतर ढंग से करने व पंचायती राज प्रतिनिधियों को अपने दायित्वों के प्रति सचेत कराते हुए बेहतर ढंग से पदाधिकारियों के साथ समन्वय बना कर विकास कार्यों को धरातल पर उतारने के लिए सजग किया गया. इसमें झारखंड राज्य में पंचायती राज की योजना, कार्यान्वयन व सहभागिता, ग्राम पंचायत विकास योजना पर चर्चा हुई. जिप अध्यक्ष कहती हैं कि भ्रमण के दौरान मैंने जो जानकारी हासिल की, उसके अनुसार तेलंगाना राज्य में मन्नावरू, आवर प्लान पर जीपीडीपी के माध्यम से बनाया गया था. इसके लिए सरकार की ओर से 1000 करोड़ रुपये का बजट तैयार हुआ था. चूंकि सरकार ने बजट का प्रावधान किया, तब जा कर जीपीडीपी रूट लेवल पर सही ढंग से क्रियान्वित हो सकी. इसके अलावा 14वें फाइनांस, प्रति व्यक्ति फंड, स्टेट फाइनांस कमीशन आदि के माध्यम से ग्राम पंचायत वित्तीय रूप से सशक्त हुआ, जिसके फलस्वरूप तेलंगाना राज्य की पंचायतें टैक्स, नॉन टैक्स के माध्यम से अपने आय स्रोत का सृजन कर पा रही है. कहती हैं कि झारखंड में भी ऐसी व्यवस्था हो जाये, तो पंचायती राज व्यवस्था धरातल पर सशक्त दिखेगा. राज्य में ‘हमारी योजना हमारा विकास’ कार्यक्रम चलाया जा रहा है, लेकिन यह योजना सीधे सरकार को प्रेषित कर दी जाती है, जबकि तेलंगाना राज्य में वित्तीय वर्ष के एक्शन प्लान प्रखंड और जिला परिषद के स्तर पर समेकित कराते हुए सरकार को प्रेषित की जाती है. तेलंगाना में वित्त आयोग सक्रिय है, जबकि यहां निष्क्रिय. अगर राजस्व की बात की जाये, तो तेलंगाना राज्य में राजस्व का स्रोत बालू घाट की नीलामी, खनन और रेवेन्यू सीधे तौर पर जिला परिषद को मिलती है, जबकि झारखंड में ऐसी व्यवस्था नहीं है. इतना ही नहीं, देश में सबसे अधिक मानदेय तेलंगाना राज्य में दिया जाता है. जिला परिषद को एक लाख रुपये और अन्य सदस्यों को 10 हजार रुपये तक का मानदेय दिया जाता है. 
 
समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे विकास योजना
त्रि-स्तरीय पंचायत प्रतिनिधि झारखंड के संयोजक सह पलामू जिला परिषद उपाध्यक्ष संजय सिंह भी इस कार्यशाला में शामिल हुए. हैदराबाद में आयोजित पांच दिनी इस कार्यशाला से लौटने के बाद उन्होंने कहा कि जिला परिषद के कार्यों को प्रभावी तरीके से लागू करने तथा पंचायती राज प्रतिनिधियों को उनके दायित्वों का बोध कराने के लिए आयोजित प्रशिक्षण काफी अच्छा रहा. झारखंड के पंचायत प्रतिनिधियों ने पंचायती राज के सशक्तीकरण, जिला परिषद के अधिकार व आय के साधनों में वृद्धि जैसे विषयों पर वहां पर जानकारी ली. तेलंगाना राज्य में सफल पंचायती राज के मॉडल को झारखंड में अपना कर अच्छा किया जा सकता है. वहां के मॉडल को पलामू जिले में भी लागू कराने की बात कही. साथ ही पलामू में भी अन्य पंचायत जनप्रतिनिधियों को इस तरह के प्रशिक्षण की व्यवस्था कराने की कोशिश होगी. उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं को पहुंचाने के लिए जिला परिषद संकल्पित है.
 
ई-शासन से बेहतर हुआ गांवों का प्रशासन
देश में सूचना क्रांति से ग्रामीण जनजीवन में भी बदलाव आया है. ई-शासन व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण प्रशासन सशक्त हुआ है. ई-शासन से जहां आमजन की समस्याओं का जल्द निबटारा हो रहा है, वहीं ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था को भी एक नई दिशा मिल रही है. केंद्र सरकार ने देश में ई-शासन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय ई-शासन योजना को 18 मई, 2006 को स्वीकृति प्रदान की, जिसमें 27 मिशन मोड परियोजनाएं और 8 भाग हैं. ई-शासन के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर मुख्य रूप से करीब 30 सूत्री कार्यक्रमों को जोड़ा गया है. इसके अलावा 150 अन्य योजनाओं को भी इसमें शामिल किया गया है. इन प्रमुख 30 सूत्री कार्यक्रमों में ग्राम पंचायत प्रशासन, जल संसाधन, डेयरी, मत्स्य पालन, सामाजिक कार्य, चुनाव, लघु उद्योग, हाउसिंग, सड़क निर्माण, तकनीकी शिक्षा, उच्च शिक्षा, सांस्कृतिक कार्यक्रम, बाजार, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, महिला एवं बाल कल्याण, मजदूर कल्याण, लोक कल्याण आदि को शामिल किया गया है. इस तरह ग्राम पंचायतें ई-शासन के जरिये अपनी प्रशासनिक क्षमता का भी विकास कर रही हैं.