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  • Jun 21 2017 1:34PM

दर्द: नदी में समाता जा रहा है पिंडाटांड़ गांव

दर्द: नदी में समाता जा रहा है पिंडाटांड़ गांव

मुन्ना प्रसाद

कहा जाता है कि नदियां प्रकृति की वरदान हैं, लेकिन गिरिडीह मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित पिंडाटांड़ गांव का चारों ओर नदियों से घिरा रहना परेशानी का सबब बन गया है. नदी के तेज बहाव से कट रही मिट्टी ग्रामीणों की रैयती जमीन को नष्ट कर रही है. साथ ही इनके खेतों ने अब नदी का रूप लेना शुरू कर दिया है. गिरिडीह शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है पिंडाटांड़ गांव. वर्तमान में यह गांव नदी के तेज पानी के बहाव से हो रही मिट्टी के कटाव से सिकुड़ता जा रहा है. चारों ओर नदियों से घिरे इस गांव के किसानों की जमीन दिनों-दिन नदी में समा रही है. हर साल बारिश के दौरान नदी में बाढ़ आने से लगातार मिट्टी का कटाव होने से गांव के लोग परेशान हैं. नदी के तेज बहाव के कारण हर साल गांव के किनारे की औसतन आठ से दस फीट तक की मिट्टी बह जा रही है. कोरंगो व उसरी नदी के द्वारा गांव को चारों ओर से मिट्टी की कटाई कर पिंडाटांड़ गांव का नक्शा ही बदल दिया है. कल तक जहां खेती हो रही थी, आज उन खेतों में नदी की पानी बह रही है. आसपास का पूरा खेत नदी में समा गया है. नदी इससे होकर धीरे-धीरे सीधी बहने लगी है. बड़े पैमाने पर किसानों की जमीन नदी में समा गयी है. इससे किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है. 

खेती पर निर्भर हैं ग्रामीण : पिंडाटांड़ के अधिकतर ग्रामीण खेती पर निर्भर हैं. ग्रामीण सालों भर नदी के पानी से सब्जियां व अन्य फसल उगाते हैं. इस गांव से प्रतिदिन करीब 60 क्विंटल से भी अधिक भिंडी बाजार पहुंचती है. इसके अलावा यहां के किसान झिंगा, लौकी, टमाटर, हरी मिर्च, करेला, बैगन, परसबीन, बोड़ा, शिमला मिर्च समेत अन्य तरह की लगभग 50 क्विंटल साग-सब्जियां उगाते हैं और बाजार में बेचते हैं. खेती के लिहाज से एक ओर जहां कोरंगो और उसरी नदी गांव के लिए वरदान हैं, वहीं दूसरी ओर मिट्टी के कटाव से यह नदी अभिशाप भी बनती जा रही है. 

चारों ओर नदी से घिरा है गांव : लगभग दो हजार की आबादी वाला पिंडाटांड़ गांव चारों ओर से दो नदियों से घिरा है. दो तरफ जहां कोरंगो नदी ने इस गांव को घेर रखा है, वहीं शेष भाग को उसरी नदी ने घेरा है. जिस ओर से नदियां बही हैं, उनके किनारे मौजूद खेतों को नदियां निगल भी चुकी है. खेतों की मिट्टी को काट कर नदी लगभग एक सौ से डेढ़ सौ मीटर गांव की ओर करवट ले चुकी है. इससे गांव के दर्जनों किसानों के 50 हेक्टेयर से भी अधिक भूमि नदी में समा चुकी है.

1980 में आयी थी भयंकर बाढ़ : 1980 में उसरी नदी में भयंकर बाढ़ आयी थी. उस तरह की बाढ़ उसके बाद नहीं आयी है. उस दौरान बाढ़ का पानी घरों में भी घुस गया था. बाढ़ के पानी के तेज बहाव ने नदी का रुख ही बदल दिया. घुमावदार नदी सीधी हो गयी. नदी का बहाव पलटने से गांव के खेतों की मिट्टी हर साल कटती जा रही है. नदी में गांव के सहदेव महतो, निर्मल प्रसाद वर्मा, कार्तिक महतो, भूटन महतो, विजेंद्र महतो, महानंद महतो, होरिल महतो व सरजू महतो समेत कई किसानों की जमीन  समा चुकी है.

क्या कहती हैं मुिखया

ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए सभी को आगे आना होगा : कंचन वर्मा

बरसात में नदी के तेज बहाव से पिंडाटांड़ गांव के किनारे की जमीन की मिट्टी का तेजी से कटाव हो रहा है. इससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है. यहां के किसान जिस नदी के पानी से सिंचाई कर प्रतिदिन लगभग सौ क्विंटल से भी अधिक सब्जियां बाजार को उपलब्ध कराती है, वही नदी किसानों के खेतों को निगल रही है. मुखिया के पास इतना फंड नहीं है कि नदी में गार्डवाल बनाया जा सके. इसके लिए कई बार ग्रामीणों ने प्रतिनिधियों से गुहार लगायी है. गांडेय विधायक प्रो. जयप्रकाश वर्मा ने गार्डवाल निर्माण कराने का आश्वासन दिया है. इसमें जिला प्रशासन को भी सहयोग करने की आवश्यकता है. तभी ग्रामीणों को इससे राहत मिल सकेगी.

क्या कहते हैं ग्रामीण

गार्डवाल से खेत होंगे सुरक्षित : सरजू

नदी का तेज बहाव हर साल यहां की लगभग आठ से दस फीट मिट्टी औसतन काट कर बहा ले जाती है. नदी के किनारे पर जिस भाग में पत्थर है, वहां की मिट्टी सुरक्षित बची है. शेष भागों में मिट्टी तेजी से कट रही है. मिट्टी के कटाव के कारण ग्रामीण काफी परेशान है. नदी के किनारे यदि गार्डवाल बना दिया जाये, तो किसानों का खेत सुरक्षित रह सकता है. साथ ही फसलों की पैदावार भी अधिक से अधिक कर सकेंगे. गार्डवाल बनाने को लेकर प्रतिनिधियों को पहल करनी चाहिए.

नदी की धार के प्रति चिंतित हों लोग : अनिल 

नदी में कई किसानों की रैयती जमीन समा चुकी है. जो जमीन नदी में गयी है, उसमें बड़े पैमाने पर पहले खेती हुआ करती थी. नदी में अपनी जमीन खोनेवाले किसानों को लाखों का नुकसान हो रहा है. जिस गति से हर साल नदी गांव के खेतों की मिट्टी को काट रही है, उस पर राेक नहीं लगी, तो आनेवाले दिनों में स्थिति ओर विकराल हो जायेगी. यदि नदी अपना रुख सीधी कर ली, तो लोगों को विवश होकर गांव छोड़ना होगा. इस विषय में सभी को मंथन करने की जरूरत है. 

नदी हर साल निगल रही है खेत : घनश्याम 

अभी तक करीब तीन कट्ठा जमीन नदी में समा चुकी है. नदी में उनके हिस्से में समायी जमीन रैयती है. नदी में जमीन समा जाने से उन्हें करीब तीन लाख का नुकसान पहुंचा है. उसरी और कोरंगो नदी में आनेवाली बाढ़ हर साल किसानों की जमीन को निगल रही है. समय रहते हुए उपाय करने की जरूरत है. इस पर जनप्रतिनिधियों के साथ प्रशासन को भी पहल करने की जरूरत है.