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  • Oct 5 2017 1:35PM

हैं परेशान, तो यहां है समाधान

हैं परेशान, तो यहां है समाधान

मनरेगा खोल रहा रोजगार का द्वार

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक रोजगार गारंटी योजना है. इसके तहत प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है. इस अधिनियम का उद्देश्य ग्रामीणों की आजीविका को बढ़ावा देना है. इसके तहत कई सुविधाएं दी जा रही हैं. मनरेगा के तहत आपको कैसे काम मिले, मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया, ससमय काम नहीं मिलने पर कैसे बेरोजगारी भत्ता मिले समेत अन्य कई जानकारियां दी जा रही हैं, ताकि आप इसका भरपूर लाभ उठा सकें.

काम की मांग 

  • मनरेगा के तहत काम मिले, इसके लिए सबसे पहले आपको पंचायत भवन जाकर मुखिया या पंचायत सेवक या ग्राम रोजगार सेवक को काम के लिए आवेदन देना होगा
  • आवेदन देने के बाद रसीद लेना न भूलें
  • रसीद लेते समय यह जरूर देखें कि आवेदन लेनेवाले का हस्ताक्षर व तारीख उस रसीद पर अंकित है या नहीं
  • जॉब कार्ड बनने के बाद आप या आपका परिवार साल में 100 दिन काम पाने के हकदार बन जायेंगे
  • काम मांगने के लिए कोई उम्र सीमा नहीं है. अगर आप 60 साल के हैं व वृद्धा पेंशनधारी हैं, तो भी मनरेगा के तहत काम मिलेगा
  • काम मांगने के लिए योजनाओं की स्वीकृति या शुरू होने का इंतजार नहीं करना है
  • आप कम-से-कम 14 दिनों के लिए काम मांग सकते हैं
  • आवेदन करने के 15 दिनों के अंदर आपको काम मिलने का अधिकार है
  • अगर समय पर काम नहीं मिला, तो आप बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार हैं. बेरोजगारी भत्ता पाने के लिए आवेदन करें
  • काम अपने ही गांव या टोले में मिलना है

मजदूरी भुगतान 

  • काम करने के 15 दिनों के अंदर मजदूरी भुगतान करना निर्धारित किया गया है
  • आपकी मजदूरी का भुगतान बैंकों के माध्यम से होगा, न कि बिचौलियों के माध्यम से
  • अगर मजदूरी समय से नहीं मिलती है, तो बेरोजगारी भत्ता के तौर पर मुआवजा मिलेगा
  • ससमय काम नहीं उपलब्ध करा पाने की स्थिति में मुआवजे की राशि जिम्मेवार अधिकारी या कर्मी से वसूली जायेगी
  • अगर मजदूरी भुगतान लंबित है, तो तुरंत ग्राम पंचायत व प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित शिकायत करें और मनरेगा के हेल्पलाइन नंबर भी फोन कर अपनी समस्या बतायें

कार्यस्थल पर सुविधाएं 

  • मजदूरों को पानी पिलाने का काम उपयुक्त है, इसके लिए आपको मजदूरी भी मिलेगी 
  • अगर कार्यस्थल पर छह साल से कम उम्र के पांच या उससे अधिक बच्चे हों, तो उनकी देखरेख के लिए एक महिला होगी, जिसे मनरेगा के तहत मजदूरी मिलेगी, साथ ही बच्चों को कार्यस्थल पर सत्तू भी मिलेगा
  • कार्यस्थल पर एक बोर्ड होगा, जिस पर योजना का नाम, योजना संख्या, योजना के लिए स्वीकृत राशि जैसी जरूरी जानकारी लिखी होगी

बारिश में भी चलता है काम 

  • बारिश के मौसम में भी मनरेगा के तहत काम होता है, जैसे-भूमि समतलीकरण, मेढ़बंदी, स्टैगर्ड ट्रेंच, 30X40 मॉडल शेड, वृक्षारोपण आदि
  • अब योजना बनाओ अभियान के तहत ग्रामसभा द्वारा चयनित बरसात के लिए उपयुक्त योजनाओं पर काम होगा - ग्राम पंचायत कार्यकारिणी समिति योजनाओं को छांट कर उनकी सूची तैयार करेगी और प्रखंड विकास पदाधिकारी इन योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देंगे
  • मेट से मनरेगा का पर्यवेक्षण 
  • सभी योजनाओं का पर्यवेक्षण ग्रामसभा द्वारा चयनित मेट करेंगे
  • 40 परिवारों के लिए एक मेट का चयन होगा
  • हर सीएफटी प्रखंडों में केवल महिला मेटों एवं अन्य प्रखंडों में 50 फीसदी महिला मेटों का चयन होगा
  • प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी हर चयनित मेट को एमआइएस में पंजीकृत करेंगे और मेटों को प्रशिक्षण मिलेगा
  • मेट को योजना की तकनीकी प्राक्कलन में दिये गये मानक के अनुसार अर्द्ध-कुशल मजदूरी मिलेगी
  • वार्ड सदस्यों के साथ चर्चा कर निर्णय लिया जायेगा, फिर आपको ग्राम पंचायत कार्यादेश व योजना की तकनीकी प्राक्कलन देगी
  • कहां से मिलेगी जानकारी : मनरेगा के तहत कार्यों की जानकारी के लिए आप अपने मुखिया, पंचायत सेवक, ग्राम रोजगार सेवक या प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं, साथ ही मनरेगा से संबंधित कोई शिकायत हो, तो वाट्सअप नंबर 73690-18090 पर अपनी 
  • शिकायत या फोटो भेज सकते हैं. इसके अलावा टॉल फ्री नंबर 1800-345-6527 या 0651-2401768 पर किसी भी कार्यदिवस को कार्यालय अवधि में कॉल कर सकते हैं. 

केस स्टडी

इटाम पंचायत के आठ मजदूरों को मिला बेरोजगारी भत्ता

गुमला जिले के बसिया प्रखंड अंतर्गत इटाम पंचायत के आठ मजदूरों को ससमय काम उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में प्रखंड प्रशासन ने बेरोजगारी भत्ता दिया. पंचायत सचिवालय भवन में छह मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता के तौर पर 7,812 रुपये दिये गये, वहीं 18 अगस्त, 2017 को शेष दो मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता दिया गया. इटाम पंचायत के इन आठ मजदूरों ने आठ मई 2017 को काम की मांग की थी. प्रखंड प्रशासन की ओर से काम मांगने के 15 दिनों के अंदर उन्हें काम मुहैया नहीं कराया गया. इससे क्षुब्ध होकर मजदूरों ने महिला विकास मंडल के माध्यम से 29 मई, 2017 को प्रखंड प्रशासन को आवेदन देकर बेरोजगारी भत्ता की मांग की. इसके बावजूद प्रखंड प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होता देख इटाम पंचायत के मुखिया ने अपने स्तर से इन मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता दिलाया. इस संबंध में मुखिया ने एक लिखित आवेदन देकर प्रखंड प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए बेरोजगारी भत्ता के तौर पर दी जानेवाली शेष राशि प्रशासनिक कर्मचारी से वसूलने की मांग की. उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत कार्यों की जवाबदेही प्रखंड प्रशासन और अधीनस्थ कर्मचारियों की है और यह साफ देखने को मिल रहा है कि प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों से भाग रहा है. दूसरी तरफ पंचायत, मजदूरों को उनका अधिकार दिलाने में साझा पहल कर रही है. इसी तरह आर्या पंचायत में भी 10 मजदूरों ने फरवरी में काम के लिए आवेदन दिया था, बावजूद इसके आज तक उन्हें काम नहीं दिया गया. आपको बता दें कि बसिया प्रखंड में यह कोई नयी बात नहीं है. इससे पहले भी बसिया और कुम्हारी पंचायत में प्रखंड प्रशासन की लापरवाही के कारण मजदूरों को सही समय पर काम नहीं मिला, जिसके कारण उन मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता देने को बाध्य होना पड़ा. महिला विकास मंडल और नरेगा सहायता केंद्र पिछले एक साल से निरंतर मजदूरों के मुद्दों को प्रशासन के सामने लाता रहा है.

सुंदरपहाड़ी के 28 मजदूरों को मिला 7,056 रुपये बेरोजगारी भत्ता

गोड्डा जिले के सुंदरपहाड़ी प्रखंड में 28 मजदूरों को 7,056 रुपये बेरोजगारी भत्ता दिया गया. इन मजदूरों को ससमय काम उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में प्रखंड प्रशासन ने बेरोजगारी भत्ता दिया. इसके लिए जिम्मेवार ग्राम पंचायत सेवक और रोजगार सेवक से राशि वसूली गयी. कुशमाहा पंचायत सचिवालय में एक कार्यक्रम आयोजित कर मजदूरों के बीच राशि वितरित की गयी. इस कार्यक्रम में पंचायत के मुखिया, उप मुखिया, प्रखंड स्तरीय महिला संघ, स्वयंसेवी संस्था प्रदान, सीएफटी कार्यकर्ताओं के अलावा काफी संख्या में मजदूर शामिल हुए.  सुंदरपहाड़ी प्रखंड के कुशमाहा पंचायत के कुशमाहा गांव के इन मजदूरों ने 27 जून, 2017 को काम की मांग की थी. 15 दिनों तक काम नहीं मिलने पर मजदूरों ने 25 जुलाई, 2017 को प्रखंड में बेरोजगारी भत्ता के लिए आवेदन दिया. मनरेगा के तहत अगर काम मांगने के आवेदन देने से 15 दिनों के अंदर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो मजदूर बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होते हैं. पहले एक महीने वर्तमान मजदूरी दर का एक चौथाई तथा उसके बाद मजदूरी दर के आधा के बराबर बेरोजगारी भत्ता मिलने का प्रावधान है. इधर, बेरोजगारी भत्ता मिलने पर मजदूरों में खुशी देखी गयी. मजदूर मानवेल हांसदा ने 252 रुपये बेरोजगारी भत्ता मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि हमें उम्मीद नहीं थी कि बेरोजगारी भत्ता मिल पायेगा. यह सीएफटी सदस्य और सहायता केंद्र की दीदियों के संघर्ष का परिणाम है कि हम मजदूरों को बेरोजगारी भत्ता मिल पाया है. कुशमाहा पंचायत के रोजगार सेवक निर्मल सोरेन ने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक कानून है. इस कानून का उल्लंघन करने पर जुर्माना का प्रावधान है.