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  • Oct 5 2017 2:05PM

खेती से दूर कृषि मंत्री का गांव शहरजोरी

खेती से दूर कृषि मंत्री का गांव शहरजोरी

झारखंड के किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने के उद्देश्य से राज्य सरकार काम कर रही है. सिंगल विंडो सेंटर लागू कर झारखंड देश का पहला राज्य बन गया है. किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्यमंत्री किसान राहत हेल्पलाइन की शुरुआत हुई है. किसानों के प्रति गंभीर दिखनेवाली रघुवर सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री रणधीर सिंह के पैतृक गांव में विकास योजनाएं कहां तक पहुंची हैं. यह गांव देवघर जिले के सारठ प्रखंड के आसनबनी पंचायत में आता है.

गांव में कई काम हुए हैं और अभी भी कई काम करने बाकी हैं. शहरजोरी गांव के आदिवासी टोले में पेयजल की किल्लत है. सुविधा संपन्न लोगों की प्यास तो बुझ जाती है, लेकिन गरीब तबके के लोगों की हलक आज भी सूखी है. स्वास्थ्य उपकेंद्र नौनी की स्थिति सब कुछ बयां कर देती है. पंचायत क्षेत्र के कई घरों में आज भी शौचालय नहीं है. पंचायत की महिला मुखिया शौचालय निर्माण की बात कहती हैं, लेकिन जिस युद्धस्तर से इसका निर्माण होना चाहिए, वैसा देखने को नहीं मिलता है. हालांकि, सूबे के कृषि मंत्री यह कहते नहीं थकते कि ग्रामीणों को मुझसे काफी आशाएं हैं और उन्हें निराश भी नहीं किया जा सकता है. सरकार ग्रामीणों की इच्छाओं की पूर्ति के लिए प्रतिबद्ध है. पढ़िए मिथिलेश सिन्हा की पूरी रिपोर्ट.

देवघर जिला मुख्यालय से 38 किलोमीटर दक्षिण दिशा में देवघर-जामताड़ा मुख्य पथ के किनारे चारों ओर जगलों से घिरा गांव है शहरजोरी. सारठ प्रखंड का शहरजोरी गांव आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है. इसी गांव से राज्य के कृषि मंत्री रणधीर सिंह आते हैं. यह गांव राज्य को कृषि मंत्री दे चुका है. सारठ प्रखंड के आसनबनी पंचायत के शहरजोरी गांव में तीन टोले हैं. ऊपर टोला, नीचे टोला एवं आदिवासी टोला. गांव की कुल जनसंख्या 520 है. इसमें अनुसूचित जाति की संख्या मात्र सात है. वहीं अनुसूचित जनजाति की संख्या 134, ओबीसी की संख्या 69 एवं सामान्य की संख्या 283 है. गांव के तीनों टोलों में घरों की संख्या करीब साठ है, जिसमें अधिकतर परिवार नौकरी, व्यापार एवं संवेदक (ठेकेदार) के पेशे से जुड़ा है. गांव में कई परिवार करोड़पति है.

पंचायत के जरिये हो रहा है गांव का विकास
आसनबनी पंचायत की महिला मुखिया रसोदी किस्कू कहती हैं कि पंचायत के सभी गांवों का विकास हो रहा है. शहरजोरी गांव में दो पीसीसी सड़क स्वीकृत करायी गयी है. पंचायत सचिवालय का सौंदर्यीकरण भी हुआ है. मनरेगा के तहत दो वर्षों में लगभग 32 सिंचाई कूप, 35 डोभा, 15 नाडेप टैंक एवं सात नाले का निर्माण कराया है.

प्राथमिक विद्यालय की स्थिति सही

प्राथमिक विद्यालय शहरजोरी में नामांकित छात्रों के विरुद्ध एक सरकारी एवं एक पारा शिक्षक कार्यरत हैं. विद्यालय भवन अपेक्षाकृत सही है. गांव के बच्चे इस विद्यालय के अलावा डीएवी चितरा एवं अन्य विद्यालयों में पढ़ने को जाते हैं.

कई घरों में नहीं है शौचालय

आदिवासी टोला में कई घरों में शौचालय नहीं है. आज भी टोले के लोग खुल में शौच जाने पर विवश हैं, हालांकि पंचायत के कुछ गांव में शौचालय निर्माण का काम शुरू हो चुका है. पंचायत की महिला मुखिया जल्द-से-जल्द गांव के सभी घरों में शौचालय निर्माण का आश्वासन देती हैं.


स्वास्थ्य उपकेंद्र रहता है बंद
पंचायत में स्वास्थ्य उपकेंद्र, नोनी है, जो अक्सर बंद ही रहता है. स्वास्थ्य उपकेंद्र में एएनएम नियुक्त हैं, लेकिन वह नियमित नहीं आती हैं. प्रभारी सीएचसी डॉ. विधु विबोध के अनुसार, यहां सिर्फ गुरुवार को टीकाकरण का कार्य पास के एएनएम से कराया जाता है, हालांकि तीन किमी दूर चितरा कोलियरी का अस्पताल है, जिसमें लोग इलाज कराते हैं. कुल मिला कर स्वास्थ्य सुविधा की स्थिति काफी खराब है. संपन्न लोग देवघर, जामताड़ा व अन्य शहरों में इलाज करा लेते हैं, लेकिन आदिवासी टोला एवं पंचायत के अन्य गांवों के लोगों को इलाज कराने में आज भी काफी परेशानी होती है.

विभाग किसानों के लिए प्रयत्नशील : गणेश
गांव के किसान व कृषक मित्र गणेश सिंह कहते हैं कि शहरजोरी गांव चारों तरफ से जंगलों से घिरा हुआ है. देवघर जिले में सबसे बड़ा जंगल है. स्थानीय लोग जंगल किसी को काटने नहीं देते हैं. विभाग द्वारा किसानों की सुविधा के लिए पावर ट्रीलर दिया गया है. समय-समय पर खाद-बीज भी अनुदानित दर पर वितरित किया गया है. कई किसानों ने केसीसी के लिए आवेदन दिया है, जिसे पास कर बैंकों को भेज दिया गया. जल्द ही कई किसानों को केसीसी मिल जायेगा. गणेश कहते हैं कि शहरजोरी गांव में सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है. गांव में कोयला खदान है, जो अब बंद पड़ा हुआ है. गांव के पास कोयला खदान होने के कारण चापानल से जो पानी आता है, वो पीने लायक नहीं होता है. प्रदूषित पानी को व्यवहार में लाने से लोग बीमार पड़ जाते हैं. संपन्न लोग तो बोतल व सप्लाई पानी को पेयजल के रूप में इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन आदिवासी टोला के ग्रामीण पेयजल को लेकर काफी परेशान रहते हैं.

गांव में कम ही परिवार खेती पर हैं आश्रित

कृषि मंत्री के पैतृक गांव शहरजोरी में ज्यादातर लोग नौकरी एवं अन्य व्यवसाय से जुड़े हैं. इस कारण कम ही लोग खेती-बारी करते हैं. नक्शे में भले ही शहरजोरी गांव हो, पर यहां का लुक किसी शहरी क्षेत्र से कम नहीं है, हालांकि जो परिवार खेती करते हैं, उन्हें साधन मिल गया है. सिंचाई के लिए गांव में बना तालाब काफी उपयोगी है. जंगलों से घिरा हुआ गांव है शहरजोरी. आसनबनी पंचायत के राउतरा एवं शहरजोरी गांव से मात्र नौ किसानों का आत्मा कार्यालय में निबंधन हुआ है. कृषि विभाग द्वारा पैक्स के माध्यम से समय-समय पर धान का बीज उपलब्ध कराया जाता है. इस संबंध में कई किसानों ने कहा कि इस बार समय पर रोपनी हो गयी है, लेकिन समय पर बारिश नहीं होने से धान की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.