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  • Sep 3 2019 12:42PM

दीनदयाल ग्राम स्वावलंबन योजना, ग्रामीण ही बनायेंगे अपने गांव को आदर्श

दीनदयाल ग्राम स्वावलंबन योजना, ग्रामीण ही बनायेंगे अपने गांव को आदर्श

समीर रंजन 

गांवों को आदर्श बनाना है, तो वहां के ग्रामीणों की सहभागिता जरूरी है. बिना ग्रामीणों को साथ लिये कोई भी गांव आदर्श नहीं बन सकता. इसी परिकल्पना को ध्यान में रखकर झारखंड सरकार ने दीनदयाल ग्राम स्वावलंबन योजना की शुरुआत की है. पहले चरण में खूंटी जिले के तीन प्रखंड के गांवों को इस योजना में शामिल किया गया है. धीरे-धीरे खूंटी जिले के सभी 760 गांवों में इस योजना को क्रियान्वित किया जायेगा. इसकी सफलता को देख कर राज्य के अन्य गांवों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में कार्य किया जायेगा

760 गांवों के ग्रामीण बनेंगे स्वावलंबी
गांवों को आदर्श बनाने के लिए राज्य सरकार ने दीनदयाल ग्राम स्वावलंबन योजना की शुरुआत की है. इस योजना के क्रियान्वयन के लिए खूंटी जिले को पायलट प्रोजेक्ट जिले के रूप में चयन किया गया है. इसके तहत जिले के 760 गांवों को आदर्श बनाने की पहल की जायेगी. पहले चरण में खूंटी जिले के तीन प्रखंड कर्रा, तोरपा व रनिया के गांवों को आदर्श गांव बनाने की मुहिम शुरू की गयी है. इसके लिए गांव की सक्रिय महिलाएं लोकप्रेरक की भूमिका निभायेंगी.

इस योजना की जरूरत क्यों पड़ी
आजादी के बाद से ही हर गांव से गरीबी खत्म करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं क्रियान्वित की है, लेकिन आज तक गांव से गरीबी दूर नहीं हो पायी. जमीनी स्तर पर योजनाओं का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन नहीं होने के कारण ग्रामीण सही मायने में जागरूक नहीं हो पाये. इसके कारण योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन हो पाया. यही कारण है कि गांवों में चलाया गया गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम अपने उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सका. इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से दीनदयाल ग्राम स्वावलंबन योजना की शुरुआत हुई. इसके तहत ग्रामीणों को ही अपने गांव को आदर्श बनाने की जिम्मेवारी सौंपी जायेगी. इन ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाने में लोकप्रेरक दीदियां अहम भूमिका निभायेंगी.

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इन कारकों पर होगा विशेष ध्यान
ग्रामीणों को जागरूक करना
ग्रामसभा को प्रभावी बनाना
ग्रामसभा के माध्यम से ग्रामीणों में वैचारिक जागृति व सामाजिक सरोकार विकसित करना

योजना का मूलमंत्र
1.
समय का निवेश : ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाना है, तो गांवों में समय देना होगा. बिना ग्रामीणों की जरूरतों को समझे गांव में योजनाएं देने से वह अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकती हैं.

2. ग्रामसभा स्तर पर संगठित व एकीकृत : ग्रामसभा की अनुमति के बिना योजनाएं सही रूप से धरातल पर नहीं उतर सकती हैं. इसलिए ग्रामसभा स्तर पर ग्रामीणों को संगठित करते हुए उन्हें एकीकृत करना होगा.

3. लोक शिक्षण : ग्रामीणों को लोक शिक्षण के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराना होगा. उन्हें बार-बार गांवों की बेहतरी के लिए समझाना होगा. इस कार्य में लोकप्रेरक दीदियां महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगी.

गांव की गुरु बनेंगी लोकप्रेरक दीदियां
ग्राम संगठन के माध्यम से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का चयन किया जायेगा, जिन्हें लोकप्रेरक दीदी नाम दिया गया है. इन्हें एक या दो सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जायेगा. इसके बाद शुरुआती दौर में लोकप्रेरक दीदियों के जिम्मे दो राजस्व गांव की जिम्मेवारी दी जायेगी. लोकप्रेरक दीदियों का पहला बैच पांच सितंबर 2019 से शुरू हो रहा है. हर बैच में 40 लोकप्रेरक दीदियां प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी. पहले बैच की 40 दीदियां तीन प्रखंड के गांवों में अपना कार्य शुरू कर देंगी. पहले बैच के लिए गुमला और पश्चिमी सिंहभूम जिले की 40 लोकप्रेरक दीदियों का चयन हुआ है. धीरे-धीरे अन्य लोकप्रेरक दीदियां प्रशिक्षण प्राप्त कर खूंटी जिले के सभी 760 गांवों में अपना कार्य शुरू करेंगी. इन लोकप्रेरक दीदियों को दोनों में से किसी एक गांव में ही निवास करना है, ताकि ग्रामीणों को अच्छी तरह से समझ सकें. गांव में निवास करने के दौरान गांव के विभिन्न वर्गों से परिचय होने के बाद उन्हें संगठित करने का कार्य करेंगी. ग्रामीणों को साप्ताहिक ग्रामसभा में भाग लेने व ग्रामीण जीवन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण विषयों पर सामूहिक विचार-विमर्श करने के लिए प्रेरित करेंगी. ग्रामवासियों को जागरूक करते हुए उन्हें शिक्षित व जलछाजन सिद्धांत को अपना कर जल स्वावलंबन से ग्राम स्वावलंबन की अवधारणा पर चर्चा करेंगी.

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लोकप्रेरक दीदियों के कार्य
1.
सामाजिक :
ग्रामसभा की नियमित साप्ताहिक बैठक
ग्रामीणों द्वारा अपने-अपने गांव की नियमित साफ-सफाई
मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी के सिद्धांत पर कार्य
श्रमदान
नशामुक्ति
झगड़ामुक्त
सहकार (सामूहिक कार्य) के महत्व
बाल विवाह
बाल श्रम
जनसंख्या नियंत्रण (छोटे परिवार का महत्व)
महिलाओं के खिलाफ हिंसा
डायन प्रथा
दहेज प्रथा
खेल व योग के महत्व

2. स्वास्थ्य
शत-प्रतिशत टीकाकरण
शत- प्रतिशत संस्थागत प्रसव
सभी आयुवर्ग को एनिमिया से मुक्ति
कुपोषण से मुक्ति
आदर्श आंगनबाड़ी प्रबंधन
स्वास्थ्य शिक्षा
खुले में शौच से मुक्ति

3. शिक्षा
प्राथमिक विद्यालय में शत-प्रतिशत नामांकन
जीरो ड्रॉप आउट
सेकेंडरी व हायर सेकेंडरी में शत-प्रतिशत नामांकन
शत-प्रतिशत साक्षरता
ग्राम पुस्तकालय की स्थापना
मूल्य आधारित शिक्षा

इस पर रहेगा जोर
बोरवेल पर प्रतिबंध
रसायनमुक्त खेती
जैविक खेती
वन संरक्षण
चराइबंदी
अवैध पातन
कुल्हाड़ीबंदी
वन भूमि अतिक्रमण बंदी
आग से वनों की सुरक्षा
वृक्षारोपण
पारंपरिक कृषि के साथ-साथ फल, फूल एवं सब्जी उत्पादन
दुग्ध उत्पादन, मधुमक्खी पालन, सूकर, मत्स्य, बकरी एवं बतख पालन

लोकप्रेरक दीदियों को मिलेगा मानदेय
लोकप्रेरक दीदियों को प्रति कार्य दिवस पांच सौ रुपये मानदेय मिलेगा. इस तरह से हर महीने उन्हें करीब 15 हजार रुपये की आमदनी हो जायेगी. ये लोकप्रेरक दीदियां एक चक्र में तीन से चार सप्ताह अपने लिये निर्दिष्ट गांव में रहकर कार्य करेंगी. इसके बाद उन्हें एक सप्ताह की छुट्टी दी जायेगी. अवकाश अवधि में उन्हें मानदेय नहीं मिलेगा.

ग्रामीणों में गरीबीमुक्त गांव का भाव जगाना जरूरी : सिद्धार्थ त्रिपाठी
मनरेगा आयुक्त सिद्धार्थ त्रिपाठी ने कहा कि हर गांव की अपनी ताकत है. अगर हर गांव को आदर्श देखना है, तो ग्रामीणों को आदर्श बनाना जरूरी है. आदर्श गांव या गरीबीमुक्त गांव तब तक नहीं बनेगा, जब तक ग्रामीणों के दिमाग से गरीबीमुक्त होने की भावना न जागृत हो. ग्रामीणों को सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर या रोजी-रोजगार देकर बिना ग्रामीणों को विश्वास में लेकर कोई कार्य करेंगे, तो उसका अपेक्षित परिणाम नहीं आयेगा. इसी को ध्यान में रख कर कार्य किया और कोडरमा जिले के सिमरकुंडी व रांची जिले के आरा-केरम गांव में इसके अपेक्षित परिणाम आये. इसी सफलता को देखते हुए दीनदयाल ग्राम स्वावलंबी योजना खूंटी जिले के गांवों में लागू की जा रही है. आशा है कि अगले छह महीने में कई गांव आदर्श गांव की श्रेणी में आ जायेंगे.