gram savraj

  • Apr 3 2018 12:48PM

हरित क्रांति के लिए मुराल में किसान पंचायत, 50 गांवों के जुटे किसान

हरित क्रांति के लिए मुराल में किसान पंचायत, 50 गांवों के जुटे किसान

प्रखंड : चाकुलिया
जिला : पूर्वी सिंहभूम

पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत चाकुलिया प्रखंड के मुराल में किसान पंचायत का आयोजन किया गया. इस किसान पंचायत में छह पंचायतों के 50 गांवों के किसान और पंचायत जनप्रतिनिधि शामिल हुए. इसका आयोजन भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेशानंद गोस्वामी के सौजन्य से 21 मार्च को किया गया. इस अवसर पर किसानों ने अपनी समस्याएं व खास कर सिंचाई की समस्या को रखा तथा समाधान की मांग की. डॉ. गोस्वामी ने कहा कि खेत तक पानी पहुंचे, तो किसान सालों भर खेती कर पायेंगे. इससे किसान समृद्ध होंगे और देश समृद्ध होगा. उन्होंने कहा कि विभिन्न गांवों में सिंचाई के लिए डीप बोरिंग किया जायेगा.

मुराल में आयी हरित क्रांति
कई साल पूर्व मुराल के किसानों ने सिंचाई के लिए बिजली संयोजन के लिए ट्रांसफॉर्मर की मांग की थी. डॉ. गोस्वामी के प्रयास से ट्रांसफॉर्मर उपलब्ध कराया गया था. खेतों तक बिजली पहुंची और बोरिंग से किसानों ने सिंचाई शुरू की. किसान सालों भर खेती कर रहे हैं. एक हजार एकड़ से अधिक खेतों में गरमा धान की फसल लहलहा रही है.

लगेंगे डीप बोरिंग
डॉ. गोस्वामी ने किसानों को आश्वस्त किया कि जल्द ही जमुआ, मौरबेड़ा, माचाडीहा समेत अन्य गांवों में डीप बोरिंग की जायेगी. इससे ग्रामीणों को पेयजल भी मिलेगा और खेत की सिंचाई भी होगी.

किसानों ने किया दर्द बयां
1.
जमुआ के छह टोलों में पेयजल का घोर संकट है. जब पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है, तो खेत की सिंचाई कैसे होगी. सरकार पीने का पानी उपलब्ध कराएं. सिंचाई की व्यवस्था की जाये.
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प्रफुल्ल मुंडा, किसान, जमुआ

2.
कालियाम पंचायत के कई गांवों में सिंचाई की व्यवस्था नहीं है. किसान निजी स्तर से की गयी डीप बोरिंग से सिंचाई करते हैं. इसमें खर्च अधिक पड़ता है. एक बीघा खेत की सिंचाई के लिए दो से तीन हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं.
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शशांक पाल, किसान, कालियाम पंचायत

3.
गांव के किसान खेती के लिए बरसात और नदी पर निर्भर हैं. नदी से सटे खेत में सालोंभर खेती होती है. ऊपर की भूमि सिंचाई के अभाव में परती पड़ी रहती है. सरकार डीप बोरिंग कराये.
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प्रबोध महतो, किसान, कालियाम पंचायत

4.
गांव में नदी-नाले नहीं हैं. सिंचाई की कोई सुविधा नहीं है. किसान बरसात के पानी पर आश्रित हैं. वर्षा होने से खेती होती है अन्यथा नहीं. किसान खेती करने के इच्छुक हैं, मगर सिंचाई का साधन नहीं है. गांव में डीप बोरिंग करायी जाये.
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शरदेंदु मुर्मू, किसान, माचाडीहा