gram savraj

  • Aug 20 2019 12:17PM

झारखंड बनेगा कृमि मुक्त, 4 सितंबर को खिलायी जायेगी एल्बेंडाजोल की दवा

झारखंड बनेगा कृमि मुक्त, 4 सितंबर को खिलायी जायेगी एल्बेंडाजोल की दवा

झारखंड को कृमि मुक्त बनाने के लिए सरकार कृतसंकल्पित है. इसके तहत कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जा रहा है. एक से 19 आयु वर्ग के बच्चों में कृमि रोग यानी पेट में कृमि न हो, इसके लिए सरकार प्रयासरत है. कृमि से कई बीमारियां होती हैं. जैसे खून की कमी, कुपोषण, आंतों में रुकावट, एलर्जी आदि. ये जानलेवा साबित हो सकती हैं. चार सितंबर 2019 को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया गया है. इसके तहत एल्बेंडाजोल की दवा बच्चों को खिलायी जायेगी

सवाल : राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस क्या है.
जवाब : राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार का एक फ्लैगशिप कार्यक्रम है, जो पूरे भारत में फरवरी माह में आयोजित किया जाता है. कृमि की व्यापकता के आधार पर झारखंड सहित कई राज्यों में वर्ष में दो बार (फरवरी एवं अगस्त) में आयोजित किया जाता है. झारखंड में कृमि व्यापकता 43 फीसदी होने के कारण कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन वर्ष में दो बार किया जाता है.

सवाल : झारखंड में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कब आयोजित किया जा रहा है.
जवाब : झारखंड में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस चार सितंबर 2019 को आयोजित करने का निर्णय लिया गया है. जो बच्चे किसी कारणवश चार सितंबर को दवा खाने से वंचित रह जायेंगे, उन्हें यह दवा 11 सितंबर 2019 को खिलायी जायेगी.

सवाल : कृमि मुक्ति कार्यक्रम का लक्षित आयु वर्ग क्या है. उन आयु वर्ग के बच्चों तक दवा पहुंचाने की क्या योजना है.
जवाब : 01-19 आयु वर्ग के सभी बच्चों को कृमि मुक्त करने का लक्ष्य है. 1-5 वर्ष के सभी बच्चों को आंगनबाड़ी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से तथा 06-19 वर्ष के सभी बच्चों को विद्यालय में शिक्षकों द्वारा कृमि नाशक दवा खिलायी जायेगी. दवा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा शिक्षकों की उपस्थिति में उनके सामने ही खिलायी जायेगी. किसी भी बच्चों को दवा घर ले जाने के लिए नहीं दी जायेगी. वैसे बच्चे, जो न तो स्कूल जाते हैं और न ही आंगनबाड़ी जाते हैं, वैसे बच्चों की सूची सहिया द्वारा तैयार की जायेगी तथा उन्हें आंगनबाड़ी केंद्र में ही दवा खिलायी जायेगी.

सवाल : झारखंड के कितने जिले में कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है.
जवाब : देवघर को छोड़कर राज्य के सभी 23 जिलों में कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जा रहा है. देवघर को केंद्र सरकार द्वारा एलएफ एंड एमडीए जिला घोषित किया गया है. जहां एलएफ कार्यक्रम के अंतर्गत एल्बेंडाजोल दवा खिलायी जायेगी. इसी कारण देवघर में यह कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा रहा है.

सवाल : सितंबर 2019 में राज्य ने कितने बच्चों को कृमि मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है.
जवाब : सितंबर 2019 राउंड में राज्य के कुल एक करोड़ 52 लाख बच्चों को कृमि मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है.

सवाल : कृमि क्या है.
जवाब : कृमि परजीवी है, जो मनुष्य की आंत में रहते हैं और जीवित रहने के लिए मानव शरीर के जरूरी पोषक तत्वों को खाते हैं.

सवाल : कृमि कितने प्रकार के होते हैं.
जवाब : कृमि तीन प्रकार के होते हैं. हुक कृमि, व्हिप कृमि और राउंड कृमि.

सवाल : कृमि कैसे फैलते हैं.
जवाब : कृमि संक्रमण अस्वच्छता के कारण होता है. संक्रमित मिट्टी के संपर्क से कृमि संक्रमण होता है.

सवाल : कृमि संक्रमण के क्या लक्षण हैं.
जवाब : कृमि संक्रमण के निम्नलिखित लक्षण हैं.
कृमि की जितनी अधिक मात्रा (तीव्रता) होगी, संक्रमित व्यक्ति के लक्षण उतने ही अधिक होंगे
हल्के संक्रमण वाले बच्चों में आमतौर पर कोई लक्षण दिखायी नहीं देते हैं
तीव्र संक्रमण से कई लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं जैसे- दस्त, पेट में दर्द, कमजोरी, उल्टी और भूख में कमी.

सवाल : कृमि संक्रमण बच्चों की पोषण संबंधी स्थिति को किस प्रकार से हानि पहुंचाता है.
जवाब : कृमि पोषक ऊतकों से भोजन लेता है जैसे- खून, जिससे खून की कमी हो जाती है.
कुपोषण में वृद्धि और शारीरिक विकास पर खास असर पड़ता है
कृमि बच्चों के शरीर के लिए महत्वपूर्ण पोषक तत्वों को खा लेता है. इससे खून की कमी, कुपोषण और वृद्धि में रुकावट आ जाती है
राउंड कृमि आंत में विटामिन-ए को अवशोषित कर लेते हैं

सवाल : बच्चों पर कृमि संक्रमण का क्या प्रभाव पड़ता है.
जवाब : कृमि के तीव्र संक्रमण से बच्चों की शिक्षा एवं लंबे समय की कार्यक्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिससे बच्चे अक्सर बीमार या थका हुआ-सा महसूस करते हैं और पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगा पाते या बिल्कुल भी स्कूल या आंगनबाड़ी नहीं जा पाते. कृमि संक्रमण से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण भविष्य में उनकी कार्यक्षमता और औसत आय में कमी आती है.

सवाल : कृमि संक्रमण से बचाव के तरीके क्या हैं.
जवाब : - नाखून साफ और छोटे रखें
हमेशा साफ पानी पीयें
खाने को ढंक कर रखें
साफ पानी से फल व सब्जियां धोयें
अपने हाथ साबुन से धोयें. विशेषकर खाने से पहले और शौच जाने के बाद
आस-पास साफ-सफाई रखें
जूते पहनें
खुले में शौच न करें. हमेशा शौचालय का प्रयोग करें

सवाल : कृमि नियंत्रण के क्या फायदे हैं.
जवाब : कृमि नियंत्रण के निम्न फायदे हैं :
सीधे फायदे :
यह खून की कमी में सुधार लाता है
पोषण के स्तर को बेहतर बनाता है

अनुमानित फायदे :
स्कूल और आंगनबाड़ी में उपस्थिति तथा सीखने की क्षमता में सुधार लाने में मदद करता है
व्यस्क होने पर भविष्य में काम करने की क्षमता और आय में बढ़ोतरी में मदद करता है
वातावरण में कृमि की संख्या कम होने पर समुदाय को लाभ मिलता है

सवाल : कृमि संक्रमण का इलाज कैसे करें.
जवाब : केंद्र सरकार द्वारा 01 से 19 आयु वर्ग के सभी बच्चों को उनकी आयु के अनुसार एल्बेंडाजोल की दवा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर नि:शुल्क खिलायी जायेगी. शिक्षक एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बच्चों को यह दवा खिलायेंगे.
एल्बेंडाजोल की दवा बच्चे व व्यस्क दोनों के लिए एक सुरक्षित दवा है. इसका प्रयोग दुनिया भर में करोड़ों लोगों में कृमि संक्रमण का इलाज करने के लिए किया जाता है
बड़े बच्चे भी गोली को चबा कर ही खायें और आवश्यकतानुसार पानी पीयें. बिना चबाये खाये गये एल्बेंडाजोल दवा का प्रभाव कम हो सकता है. अत: दवा को चबा कर ही खायें
एल्बेंडाजोल की दवा पर गहन शोध किये गये हैं और विश्वभर में कृमि संक्रमण का उपचार करने के लिए करोड़ों लोगों ने इसका उपयोग किया है.

कैसे खिलायें एल्बेंडाजॉल दवा :
आयु खुराक तरीका
1-2
साल आधा इस आयु वर्ग के बच्चों को आधी गोली खिलाएं. गोली को दो चम्मच के बीच रख कर पूरी तरह चूर्ण कर दें और फिर पानी में मिलाकर ही खिलाएं

2-3 साल पूरी इस आयु वर्ग के बच्चों को एक पूरी गोली खिलाएं. गोली को दो चम्मच के बीच रख कर पूरी तरह चूर्ण कर दें और फिर पानी में मिला कर ही खिलाएं

3-19 साल पूरी इस आयु वर्ग के बच्चों को हमेशा दवाई चबा कर खाने की सलाह दें. बिना चूरा या चबा कर खायी गयी दवाई का प्रभाव महत्वपूर्ण रूप से कम हो सकता है. पीने का पानी साथ रखें. आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने सामने ही चम्मच से हर बच्चे को दवाई खिलाएं. दवाई घर ले जाने न दें.