gram savraj

  • Jan 19 2017 9:34AM

मुर्गी पालन से ग्रामीणों को जोड़ते जुनूल हेंब्रम

मुर्गी पालन से ग्रामीणों को जोड़ते जुनूल हेंब्रम
एमपी कुरैशी
 
अभी कुछ दिन पूर्व ही खूंटी जिला के तोरपा प्रखंड जाना हुआ. तोरपा प्रखंड कार्यालय से पक्की सड़क होते हुए लगभग दस किलोमीटर तक पहुंचने के बाद करीब 15 किलोमीटर दूर कच्ची व संकीर्ण मार्ग तय करते हुए बरकोली पंचायत के मालादोन गांव पहुंचे. इस गांव में लगभग बीस से पच्चीस मिट्टी के घर हैं, जिसमें करीब डेढ़ सौ लोग रह रहे हैं. जैसे ही इस गांव में प्रवेश किया, तो देखा कि एक नहीं बल्कि कई मुर्गी फार्म के शेड बने हुए हैं. यहां मुर्गी शेड बहुत नजदीक-नजदीक में बने हुए हैं और इसकी लंबाई लगभग बीस फीट क्षेत्र में फैली हुई है. एक मुर्गी फार्म शेड में लगभग 400 से 500 मुर्गा-मुर्गियों का पालन किया जा रहा है. इस तरह लगभग बीस से अधिक मुर्गी फार्म बनाये गये हैं. दो हजार से अधिक मुर्गियों का पालन गांव के लोग कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को लाखों की आमदनी हो रही है और यह सब संभव हो पाया है नक्सल प्रभावित गांव में पले-बढ़े दिहाड़ी मजूदर जुनूल हेंब्रम के प्रयास से. 
 
कौन है जुनूल हेंब्रम : जुनूल हेंब्रम खूंटी के रहने वाले हैं और बिरसा कॉलेज से इंटरमीडीएट तक ही पढ़ाई की है. वर्ष 2001 में घर की परिस्थति सुधारने के लिए रांची और इसके आस-पास क्षेत्रों में लोगों के यहां मजदूरी करने लगे. जुनूल बताते हैं कि खूटी जिला नक्सल प्रभावित होने के कारण असंवेदनशील माना जाता है और मालादोन गांव भी प्रभावित है. यहां के लोग मजदूरी और पलायान करने को मजबूर हैं. जुनूल कहते हैं कि मजदूरी में मन नहीं लगा तो वापस अपने गांव आ गये लेकिन गांव में काम नहीं रहने के कारण फिर बेरोजगार हो गये. एक दिन रेडियो में किसान कार्यक्रम सुन रहे थे. यहीं से मुझे प्रेरणा मिली और रोजगार करने के लिए उत्सुकता पैदा हुई. लेकिन, पैसे के अभाव में यह होना मुश्किल था. तभी गैर सरकारी संस्थान प्रदान के लोगों से भेंट हुई और उनके कार्यों से प्रभावित होकर स्वयं सहायता समूह से जुड़ गये. समूह से जुड़ने के बाद कई जानकारी मिलने लगी और कुछ पैसे आये तो पॉल्ट्री फार्म खोलने को सोचा और सोच कार्य में बदल गया. वर्ष 2003 से धीरे-धीरे गांव के लोंगो को भी रोजगार से जोड़ने लगे. 
 
मुर्गी पालन के लिए प्रशिक्षण : जुनूल हेंब्रम ने कहा कि समय-समय पर मुर्गी विशेषज्ञों को बुलाकर कैंप लगवाते है और ग्रामीणों को मुर्गी पालन का प्रशिक्षण दिलाते हैं. उसके खान-पान से लेकर रख-रखाव में किस तरह से सावधानियां बरतनी चाहिए, मुर्गी के चूजें को ठंड से बचाने के लिए बल्ब से रौशनी देने, अन्य मौसम में चूजों की देखभाल करने, चूजों को दाना देने के अलावा अन्य बातों के संबंध प्रशिक्षण में विस्तार से बताया जाता है. जुनूल कहते हैं कि चूजों को रौशनी देने के लिए सोलर लाइट की भी व्यवस्था की है. कहते हैं कि गांव में हर ओर पॉल्ट्री फार्म देखने को मिल जायेगा.
 
कैसे आया बदलाव
 
वर्ष 2003 के बाद जुनूल हेंब्रम ने तोरपा ग्रामीण पॉल्ट्री को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमेटेड नामक संस्था बनायी. इसे विस्तार देने के लिए आइडीबीआइ बैंक खूंटी शाखा से करीब 25 लाख ऋण लिया और धीरे-धीरे इसे चुकता भी कर दिया. वर्तमान में लगभग 580 परिवार मुर्गी पालन के व्यवासाय से जुड़ चुके हैं और यहां गांव में मुर्गी पालन के 27 शेड बने हैं. पॉल्ट्री पालन व्यवसाय से जुड़े लोग अपना और अपने परिवार का जीवन यापन कर रहे हैं. अपने बच्चों को स्कूल पढ़ने के लिए भेज रहे हैं. जुनूल बताते हैं कि व्यवसाय से जुड़े लोगों को हर महीने हजारों की आमदनी हो रही है वहीं हर साल एक करोड का टर्न ओवर भी हो रहा है. कहते हैं, पूरे राज्य में यहां से मुर्गियों की आपूर्ति होती है.