gram savraj

  • Feb 16 2017 9:32AM

अब महाजन के आगे नहीं फैलाते हाथ

अब महाजन के आगे नहीं फैलाते हाथ
सोनम साहू
झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है, जहां आज भी सुदूर गांवों में लोग गरीबी से जूझ रहे हैं. ऐसे में दीनदयाल अन्त्योदय राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत राज्य के गांव में आजीविका सखी मंडल बनाये गये हैं. इन सखी मंडलों के सदस्य समूह से ऋण लेकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में सक्षम हो रही हैं. 
 
पहले जहां गरीब महिलाओं को जब पैसों की जरूरत पड़ती थी, तो उन्हें महाजन से उधार मांगना पड़ता था, जिसके लिए भारी किस्त भी चुकाना होता था, लेकिन अब यह स्थिति बदलती नजर आ रही है. जब से राज्य के सुदूर गांवों तक आजीविका सखी मंडल का आगमन हुआ है, वहां की गरीब महिलाओं को अब किसी महाजन के आगे हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती. अब वो अपने सखी मंडल से आसानी से ऋण लेकर अपनी जिंदगी गुजार रही है. ना केवल उनकी छोटी-मोटी जरूरतें पूरी हो रही है, बल्कि वो अब बड़ा ऋण लेकर व्यापार साथी (एमइसी) द्वारा अपना व्यापार शुरू करने में भी कामयाब हो रही है. खुद का व्यापार शुरू करने से अब ये गरीब महिलाएं आत्मनिर्भर हो गयी है. लोग उन्हें पहचानने लगे हैं और समाज में सम्मान भी मिलने लगा है. 
 
व्यापार साथी को जेएसएलपीएस द्वारा चुनकर प्रशिक्षण दिया गया है. इसमें उन्हें सर्टिफिकेशन इन रूरल एंटरप्राइज एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट का मिनी कोर्स करवाया गया. चुने हुए प्रशिक्षित व्यापार साथी का काम है कि वो अपने जोन के सभी  आजीविका सखी मंडल या फिर ग्राम संगठन में जाकर उनसे जुड़ी सदस्यों, जो अपना व्यापार करने को इच्छुक हो, उनके लिए एक बिजनेस प्लान बनाये या फिर अगर पहले से कोई बिजनेस कर रही है, तो उसे किस प्रकार मजबूत बनाते हुए आगे बढ़ाये, उसको सलाह और सहयोग प्रदान करे. 
 
व्यापार साथी गरीब महिलाओं को अपना व्यापार शुरू करने से लेकर, उसके बाद तक मदद करते हैं और हर परिस्थिति में साथ देते हैं. व्यापार साथी के आ जाने से इन गरीब महिलाओं को एक सहारा मिल गया है. एक वक्त था जब ये अशिक्षित महिलाएं काफी डरी और सहमी-सी रहती थी. हर वक्त यह भय रहता था कि कौन-सा व्यापार शुरू करे, जिसमें उन्हें घाटा उठाना ना पड़े. इसी मुश्किलों से जूझती हुई अब ये गरीब अशिक्षित महिलाएं व्यापार साथियों की मदद से अपना व्यापार शुरू कर अच्छी आमदनी कर रही है और आज वो पुरुषों को मात देकर उनसे आगे बढ़ती जा रही है.  चाईबासा स्थित व्यापार साथी शिमला बानरा कहती है कि पहले तो महिलाएं अपने पैसों का कहीं भी निवेश करने में बहुत डरी और सहमी रहती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है. वो हमारे जैसे व्यापार साथी पर पूरा विश्वाश करती है. 
 
शिमला कहती है कि ना केवल उसके व्यापार करने में उसकी मदद करती है बल्कि उन्हें व्यापार शुरू करने के बाद भी पूरी सहायता प्रदान की जाती है. काफी संख्या में गरीब महिलाएं अब लघु उद्यमियों के रूप में सामने आ रही है और यही महिलाएं आज अपने लक्ष्य तक पहुंच भी  रही है. साथ ही अपना उदाहरण देकर दूसरे गांवों की महिलाओं का प्राेत्साहित भी कर रही है.
 
 पायलट प्रोजेक्ट के तहत व्यापार साथी द्वारा तीन जिले रांची, पाकुड़ और पश्चिमी सिंहभूम में कार्य किया जा रहा है. इसे बढ़ाते हुए अब  नये साल में तीन अन्य जिलों गिरिडीह, पलामू और सिमडेगा में भी इसे शुरू किया जायेगा. राजधानी रांची के गलेक्सिया मॉल में रातू प्रखंड के जोहार आजीविका महिला  समूह की सदस्यों ने ‘आजीविका दीदी कैफे’ नाम से फूड कोर्ट चला रही है. हर  कठिनायों को मात देकर आज गांव में महिलाएं उद्यमी के रूप में निकल कर सामने  आ रही है.   
 
(लेखक जेएसएलपीएस की यंग प्रोफेशनल
मीडिया एवं कम्युनिकेशन हैं)
सदस्यों ने शुरू िकया व्यापार
 
साल 2016 में करीब 2000 सखी मंडल के सदस्यों को व्यापार साथी द्वारा कई सेवाएं उपलब्ध करायी गयी है. इसमें से कुल 1746  सदस्यों ने विभिन्न क्षेत्रों में अपना व्यापार भी शुरू किया है. 
 
किराना दुकान521 
टेलरिंग 192 
होटल168  
फास्ट फूड ठेला/दुकान152  
लेडीज शृंगार दुकान 84 
सब्जी दुकान57  
पोल्ट्री फार्म 57  
बकरी पालन 43  
सूकर पालन 43 
चाय दुकान 41 
राइस मिल 35  
कैटरिंग27 
साइकिल रिपेयरिंग शॉप24 
मछली व्यवसाय 24  
गाय पालन 22  
टेंट हाउस 22  
मुर्गा दुकान 19  
आटा चक्की दुकान14  
बीज दुकान 14  
प्लास्टिक सामान की दुकान11  
 
व्यापार साथी का मिला भरपूर सहयोग : नाजिमा
 
पाकुड़ जिले के महेशपुर गांव निवासी नाजिमा ने अपना अनुभव जाहिर करते हुए कहा कि सखी मंडल की बैठक में एक व्यापार साथी आये थे, जिसने हमें अपना व्यापार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया. 
 
पहले तो हम सब सदस्य बहुत डरे हुए थे कि कैसे होगा, कहीं पैसा डूब तो नहीं जायेगा, लेकिन व्यापार साथी की मदद से आठ सदस्यों ने कैटरिंग ग्रुप शुरू करने का निर्णय लिया. सखी मंडल से ऋण लेकर कैटरिंग ग्रुप शुरू किया. आशा कैटरिंग ग्रुप के नाम से एक कैटरिंग ग्रुप खोला. जेएसएलपीएस की ओर से हम सदस्यों को 13 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया. इस प्रशिक्षण में खाना पकाने से लेकर साफ-सफाई के बारे में सीखाया गया. यहां तक कि व्यापार को कैसे चलाना है और कैसे आगे बढ़ाना है, यह भी सीखने का मौका मिला. नाजिमा कहती है कि आज सभी सदस्य बहुत खुशी से अपने कैटरिंग सर्विस को लोगों तक पहुंचा रहे हैं और इससे हमें काफी लाभ भी हो रहा है.
 
जोहार परियोजना को गरीब हित में चलाएं : सिन्हा
 
ज्योति रानी 
 
कृषि उत्पाद को परियोजना क्रेडिट से जोड़ने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन राजधानी रांची में आयोजित हुआ. यह आयोजन जेएसएलपीएस के अंतर्गत जोहार परियोजना के तहत प्रोड्यूसर्स संस्थान के आर्किटेक्चर पर आधारित था. 
 
जोहार परियोजना झारखंड सरकार द्वारा विश्व बैंक के सहयोग से शुरू की जाने वाली परियोजना है. इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की मौजूदा सामाजिक और संगठनात्मक आधार पर, दीनदयाल अंत्योदय आजीविका मिशन के तहत उनके महासंघों का निर्माण करना और आजीविका को मौका उपलब्ध कराना है. इस उद्देश्य प्राप्ति के लिए उचित रणनीति द्वारा क्लस्टर, वैल्यू चैन और ग्रामीण उत्पादकों को प्रोड्यूसर ग्रुप तथा प्रोड्यूसर आर्गेनाईजेशन से जोड़ना है. साथ ही अनुभवी लोगों को साथ लेकर परियोजना को कार्यान्वित करने के लिए उचित रणनीति बनाना है.
 
इस अवसर पर मुख्य अतिथि ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव एनएन सिन्हा ने कार्यशाला में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए जोहार परियोजना को गरीबों के हित में अच्छी तरह से संचालित करने के लिए सभी से सहयोग की अपील की. जेएसएलपीएस के सीइओ परितोष उपाध्याय ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य संबंधी विस्तृत जानकारी दी और दिनभर के गतिविधियों से अवगत कराया. 
 
इस दौरान जोहार परियोजना के संदर्भ में दो प्रस्तुति दी गयी. पहली प्रस्तुति में जोहार परियोजना की पृष्ठभूमि, पहुंच और कवरेज के बारे में बताया गया तथा दूसरी प्रस्तुति में प्रोड्यूसर ग्रुप के आर्किटेक्चर के विषय में विस्तार से जानकारी दी गयी. एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान कुल पांच परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसमे एक या अनेक उत्पाद जैसे कृषि, एनटीएफपी एवं मछली, प्रोड्यूसर ग्रुप का स्ट्रक्चर, वित्य-समावेसन, रजिस्ट्रेशन और मानव संसाधन पर चर्चा की गयी. 
 
इन सभी मुद्दों पर कार्यशाला में उपस्थित प्रतिनिधियों के बीच अच्छी चर्चा हुई, जिसके आधार पर वृहद योजना बनायी जायेगी. एक दिवसीय कार्यशाला में कुल 50 प्रतिभागी शामिल हुए, जिसमें जेएसएलपीएस के सदस्य, विश्व बैंक के सदस्य और गैर सरकारी संगठन के प्रतिनिधियों ने शिरकत की.जेएसएलपीएस के सीओओ विष्णु परिदा ने धन्यवाद ज्ञापन किया.
(लेखक जेएसएलपीएस की यंग प्रोफेशनल
मीडिया एवं कम्युनिकेशन हैं)