gram savraj

  • Apr 22 2017 12:59PM

परियोजना, बेहतर सामाजिक-आर्थिक विकास संबंधी आदर्श पंचायतों का निर्माण, सशक्त पंचायत व विकसित गांव की अवधारणा

परियोजना, बेहतर सामाजिक-आर्थिक विकास संबंधी आदर्श पंचायतों का निर्माण, सशक्त पंचायत व विकसित गांव की अवधारणा
मजबूत और पारदर्शी ग्राम पंचायतों तथा सक्रिय ग्रामसभाओं के माध्यम से ही स्थायी लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ ग्रामीण सुशासन को बढ़ावा दिया जा सकता है. व्यापक स्तर पर तथा सहभागितापूर्ण नियोजन के द्वारा ‘ग्राम विकास योजना’ तैयार करने और उसके गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन में पंचायत सदस्यों के नेतृत्व और ग्राम स्तर पर सामुदायिक भागीदारी से ही आदर्श पंचायतों के निर्माण की योजना सफल हो सकती है.
 
भारत गांवों का देश है तथा आदिकाल से ही यहां पंचायतों का विशेष महत्व रहा है. स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही पंचायतों को मजबूत करने का सतत् प्रयास किया जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में पंचायतों की भूमिका को सुदृढ़ करने के लिए 73वें संविधान संशोधन के द्वारा इन्हें संवैधानिक दर्जा भी दिया गया है.
 
झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग एवं झारखंड के ग्रामीण विकास में कार्यरत विभिन्न स्वैच्छिक संस्थानों के द्वारा राज्य के चयनित जिलों से कुल 43 ग्राम पंचायतों को आदर्श पंचायत में तब्दील करने की योजना प्रस्तावित है. इन 43 पंचायतों में से प्रदान कुल 15 पंचायतों में गाम पंचायत के नेतृत्व में ‘पंचायती राज सशक्तीकरण परियोजना- आदर्श पंचायतों का निर्माण’ में सहयोगात्मक भूमिकाएं निभाएगा तथा अपनी पंचायतों को मजबूत करने का काम करेगा. ग्राम पंचायतों को अपने पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत सभी गांवों के समस्त परिवारों के सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु ग्रामीण विकास एवं इससे संबंधित कार्यक्रमों, गतिविधियों एवं योजनाओं के नियोजन, क्रियान्वयन, निगरानी एवं अवलोकन की जिम्मेदारी संविधान एवं सरकार द्वारा दी गयी है. 
रणनीतिक हस्तक्षेप के मुख्य क्षेत्र
1. नागरिक साक्षरता : नागरिक अधिकारों एवं कर्तव्यों पर जागरूकता फैलाना तथा जन-शिक्षण
 
2. महिलाओं एवं उनके संगठनों की पंचायती राज सशक्तीकरण की दिशा में सहभागिता सुनिश्चित करना
 
3. समुदाय आधारित संगठनों एवं पंचायती राज संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों के द्वारा लोगों के अधिकारों एवं प्रावधानों को उपलब्ध करवाना
 
4. ग्राम-पंचायत संगठन के विकास की प्रक्रियाओं के द्वारा पंचायती राज संस्थाओं का सशक्तीकरण
 
5. ग्राम-पंचायतों के द्वारा अवसंरचनात्मक कार्यक्रमों का क्रियान्वयन
6. ग्राम-पंचायतों में सूचना तथा सहायता केंद्रों की स्थापना
 
7. गवर्नेंस की निगरानी तथा नीतिगत हस्तक्षेप
 
परियोजना का उद्देश्य
 
इस परियोजना के माध्यम से निम्नलिखित लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में कार्य किये जायेंगे.
पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त करना, ताकि वे अपने क्षेत्र के लोगों के प्रति संवेदनशील, उत्तरदायी एवं जवाबदेह बन सके. इसके तहत पंचायती राज संस्थाओं को संगठनात्मक विकास के परिप्रेक्ष्य एवं नजरिये से समर्थ करना.
 
नागरिकता क्या है तथा नागरिकों को उनके अधिकारों एवं कर्तव्यों के बारे में जागरूक तथा संवेदनशील बनाना. साथ ही भारतीय संविधान के बारे में एक व्यापक समझ विकसित करना, ताकि आधुनिक लोकतांत्रिक तरीकों से सामाजिक परिवर्तन का कार्य किया जा सके.
एक जीवंत तथा मजबूत समुदाय आधारित महिला संगठनों का निर्माण करना, जिससे वो जाति, वर्ग, लिंग के संगम पर रहनेवाले लोगों के बीच एक जिम्मेदार नागरिक निकाय के रूप में काम कर सके.
 
समुदाय आधारित संगठनों एवं पंचायती राज संस्थाओं के बीच एक पारस्परिक एवं साझेदारी विकसित करना, जिससे वो वंचित परिवारों तक सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों एवं योजनाओं को पहुंचाने के साथ-साथ उसकी निगरानी भी कर सके.
 
मुख्य रूप से दो आधारभूत सुविधाओं के कार्यक्रम जैसे-मनरेगा तथा पेयजल सुरक्षा से संबंधित योजनाओं को ग्राम पंचायतों एवं समुदाय आधारित संगठनों के संयुक्त प्रयासों के माध्यम से क्रियान्वित करना, ताकि सहभागी तरीके से जनता की मांग के अनुरूप सरकारी व्यवस्था के द्वारा आपूर्ति संभव हो सके.
 
जमीनी स्तर पर नागरिक और सार्वजनिक सेवा संस्थाओं के बीच सूचनाओं से संबंधित विषमताओं को समाप्त करने के विभिन्न उपायों जैसे ग्राम पंचायत के स्तर पर प्रभावी एवं मुकम्मल सूचना केंद्रों एवं हेल्प-डेस्क की स्थापना कराना.
 
सामाजिक जवाबदेही के विभिन्न संस्थागत तरीकों एवं साधनों के द्वारा अन्य सहमना संगठनों, समूहों एवं संस्थाओं के साथ एक प्रभावी गठबंधन (नेटवर्क) करना, जिससे जनता की शिकायतों के निबटारे के साथ-साथ नीतिगत हस्तक्षेपों को भी बढ़ावा मिल सके.
पंचायती राज सशक्तीकरण परियोजना 
 
एनोड गवर्नेंस लैब
एनोड गवर्नेंस लैब, कर्नाटक राज्य के बेंगलुरु की एक संस्था है, जो सामाजिक-आर्थिक विकास में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं, समूहों एवं संगठनों को तकनीकी मदद उपलब्ध कराती है. साथ ही एनोड, विकेंद्रीकृत शासन को मजबूत बनाने और प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए सार्वजनिक संस्थाओं को सक्षम करने की दिशा में काम करती है. एनोड की टीम 2009 के बाद से ही ग्रामीण स्थानीय सरकारों अर्थात ग्राम पंचायतों के साथ काम कर रही है. इस क्रम में विकास से संबंधित संस्थागत चुनौतियों को समझने और समाधान से संबंधित प्रक्रियाओं पर कार्य कर रही है. एनोड विभिन्न विषयों पर विभिन्न लोगों के साथ काम करती है जैसे-प्रबंधन के क्षेत्र के पेशेवरों, योजनाकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों आदि के साथ पंचायतों के सशक्तीकरण की दिशा में प्रयास करती आ रही है. एनोड मुख्य रूप से ग्राम-पंचायत संगठनात्मक विकास के मॉडयूल पर काम करती है तथा इस मॉडयूल को केंद्र सरकार के राजीव गांधी पंचायत सशक्तीकरण अभियान के तहत नयी खोज के रूप में भी कर्नाटक राज्य में मान्यता प्रदान की गयी है.
 
प्रगति अभियान (वी द पीपुल)
प्रगति अभियान एक सामाजिक संस्थान है, जो महाराष्ट्र में गरीबी उन्मूलन की दिशा में कार्य करती आ रही है. विशेष रूप से यह अभियान लोगों को उनके अधिकारों एवं जानकारियों के साथ सचेत तथा संवेदनशील बनाता है ताकि वे विभिन्न सरकारी योजनाओं को मुकम्मल तरीके के साथ हासिल कर सकें तथा आम जनता का सशक्तीकरण संभव हो पाये. साथ ही प्रगति अभियान का उद्देश्य ग्रामीण गरीबी एवं पिछड़ापन को कम करने के प्रयासों को तेज करना है. जन-जागरूकता और क्षमता निर्माण के द्वारा लोगों के सशक्तीकरण की दिशा में अभियान के सीखों और अनुभवों पर आधारित प्रक्रियाओं के तहत इस अभियान की शुरुआत हुई. 
 
प्रदान
भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की दिशा में सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समुदाय खास कर महिलाओं, किसानों, मजदूरों एवं अन्य तबकों के साथ उनके मुकम्मल आजीविका संवर्द्धन की दिशा में प्रदान काम कर रहा है. अपने शुरुआती सालों से ही यह युवा प्रोफेशनल के विभिन्न समूहों के साथ स्वयं सहायता समूह को केंद्र में रखते हुए देश के अति पिछड़े क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक उन्नययन की अवधारणा पर कार्य करते हुए वर्तमान में झारखंड सहित सात राज्यों में समावेशी विकास के लिए तत्पर है. प्रदान संस्था का मानना है कि आर्थिक निर्धनता को खत्म करने के लिए गरीबों की आजीविका की क्षमताओं को बढ़ाना अति आवश्यक है, ताकि निर्धन तथा पिछड़े परिवार स्थायी तरीके से आय अर्जन के अवसरों का उपयोग सही रूप से कर सकें. 
 
सोशल ऑडिट
ग्रामीण विकास कार्यों को पारदर्शिता, जिम्मेदारी एवं ईमानदारीपूर्वक किया जाना ग्राम पंचायत का प्राथमिक अधिकार तथा कर्तव्य दोनों है. विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर नियंत्रण के लिए सोशल ऑडिट (पारदर्शिता तथा जवाबदेही) अवधारणा की शुरुआत हुई है. ग्रामसभा द्वारा, ग्राम पंचायत में होनेवाले सभी विकास कार्यों की उपयोगिता, गुणवत्ता एवं उन पर किये गये खर्चे की, लाभार्थियों एवं ग्रामीण समुदाय द्वारा जांच-परख करने एवं सुझाव देने की प्रक्रिया को सोशल ऑडिट या सामाजिक अंकेक्षण कहते हैं. मनरेगा एवं संबंधित ग्रामीण विकास योजनाओं के गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन में सोशल ऑडिट की प्रक्रिया की शुरुआत झारखंड राज्य स्तर पर ग्रामीण विकास विभाग (झारखंड सरकार) के अंतर्गत एक सोशल ऑडिट यूनिट के द्वारा की गयी है. 
 
पंचायती राज विभाग, झारखंड 
 
झारखंड में पंचायती राज विभाग, राज्य के ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत काम करता है. हमारे पंचायती राज सशक्तीकरण परियोजना को अमलीजामा पहनाने में पंचायती राज विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है. यह विभाग राज्य ग्रामीण विकास संस्थान के माध्यम से समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों एवं कार्यशालाओं के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों का विभिन्न विषयों पर क्षमतावर्द्धन का कार्य करेगा. साथ ही विभाग आवश्यकतानुसार पंचायतों को मजबूत बनाने के लिए कानूनसम्मत नीतियों के निर्धारण तथा संबंधित आदेश पारित करेंगे.