gram savraj

  • Oct 5 2017 1:43PM

ग्रामसभा को जानना होगा अपना अधिकार

ग्रामसभा को जानना होगा अपना अधिकार

ग्रामसभा को मजबूत करने से ही पंचायती राज व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव हो सकता है. ग्रामसभा मजबूत होगी, तो व्यवस्था में ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ेगी और हर कोई खुद को इससे जुड़ा हुआ महसूस करेगा. उसे एक शक्ति का एहसास होगा. गैर सरकारी संस्था प्रदान द्वारा गुमला के पांच पंचायतों को आदर्श पंचायत बनाने के लिए कार्य किये जा रहे हैं.

इसी के तहत बसिया के प्रखंड मुख्यालय परिसर में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें पांचों पंचायत के ग्राम प्रधान और कई मुखिया शामिल हुए. कार्यक्रम में ग्रामसभा की समस्याओं को जानने का प्रयास किया गया, साथ ही मुखिया के कार्य संचालन में  आ रही परेशानियों को जानने का प्रयास किया गया़  इसके बाद पंचायती मामलों के जानकार सुधीर पाल ने ग्राम प्रधान और मुखिया को काम करने के तरीके एवं हक और अधिकार के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

अपने अधिकार नहीं जानते ग्राम प्रधान

पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्रामसभा काफी ताकतवर है. ग्रामसभा में बैठकों के जरिये ग्रामीणों की राय लेकर विकास की योजनाएं बनायी जाती हैं, लेकिन जब कार्यक्रम में मौजूद ग्राम प्रधान से इसके बारे में पूछा गया, तो उनके पास कोई जवाब नहीं था. उन्हें अपने हक और अधिकार तक की जानकारी नहीं थी. मौके पर मौजूद पंचायती राज विशेषज्ञ सुधीर पाल ने उन्हें हक और अधिकार की जानकारी दी़  उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान अपने गांव के सरकारी व गैर सरकारी संसाधन, गांव का नजरी नक्शा और गांव की आबादी का लेखा-जोखा अपने पास रखें, ताकि उन्हें काम करने में आसानी हो. इसके बाद ग्रामसभा अगर कोई योजना बना कर उसे पंचायत को भेजती है, तो योजनाएं पूरी होने तक लगातार मुखिया से कार्य प्रगति के बारे में जानकारी लेते रहें. कार्यक्रम में ग्राम प्रधानों ने कहा कि ग्रामीण ग्रामसभा  में दिलचस्पी नहीं लेते हैं़. अगर ग्रामसभा होती भी है, तो ग्रामीण आते हैं और अपना नाम और अपनी जरूरतों को दर्ज करवा कर चले जाते हैं. ग्रामीण ग्रामसभा में सुझाव भी नहीं देते  हैं़  इसके कारण ग्रामसभा की बैठकें सफल नहीं हो पाती हैं.  

मुखिया को मिली खर्च करने की जानकारी
पंचायतों में मुखिया को फंड तो दे दिया जाता है, लेकिन फंड को कैसे खर्च करना है, इसकी कोई गाइडलाइन उन्हें नहीं दी जाती है. इसके कारण कई बार मुखिया राशि खर्च करने के बाद हिसाब नहीं दे पाते हैं और उन पर गंभीर आरोप लग जाते हैं.  इस कारण, योजनाओं की राशि काे चेक के माध्यम से निर्गत करें़  कार्यक्रम में मौजूद कई मुखिया ने बताया कि योजना बनाओ अभियान के तहत योजनाएं तो मांगी जाती हैं, लेकिन उसके बाद ग्रामसभा द्वारा पारित योजनाओं को छोड़ कर अन्य योजनाएं ऊपर से थोप दी जाती हैं.

आदर्श पंचायत बनाने की दिशा में पहल
बसिया प्रखंड के पांच पंचायत पंथा, ओकबा, तेतरा, पोकटा और आरया को आदर्श पंचायत बनाने को लेकर यह पहल की गयी. कार्यक्रम के जरिये मुखिया व ग्राम प्रधानों को उनके हक व अधिकार की जानकारी दी गयी. कार्यक्रम में पंथा के मुखिया बंसत गुड़िया, आरया की मुखिया जंसिता बागे, ओकबा की मुखिया चुमानी उरांव, पोकटा की मुखिया रश्मी टेटे समेत कई गांवों के ग्राम प्रधान शामिल हुए.