gram savraj

  • Oct 25 2017 1:11PM

रासायनिक खाद से खाद्य सुरक्षा कैसे : पद्मश्री सिमोन उरांव

रासायनिक खाद से खाद्य सुरक्षा कैसे : पद्मश्री सिमोन उरांव
औद्योगिक क्रांति और बढ़ती जनसंख्या के कारण पंजाब-हरियाणा में हरित क्रांति हुई. रासायनिक खाद का अधिकाधिक उपयोग हुआ. इस दौरान भूगर्भ जल का अंधाधुंध दोहन हुआ. आज नतीजा क्या है, सभी को पता है. जिन जगहों पर भूगर्भ जल का स्तर नीचे जा रहा है, वहां की जमीन बंजर होती जा रही है. बड़ी-बड़ी कंपनियों को लगाने के लिए जंगलों को अंधाधुंध काटा जा रहा है. धरती लगातार गर्म होती जा रही है. उत्पादन पर इसका खासा असर पड़ रहा है. झारखंड की बात करें, तो यहां भी किसान गोबर-खाद को छोड़ कर सिर्फ रासायनिक खाद का ही उपयोग कर रहे हैं. इसके उपयोग से जमीन ठोस होती जा रही है. किसानों को सिंचाई के लिए पानी की सुविधा नहीं मिल पा रही है. ऐसे में उत्पादन कहां से होगा. अगर रासायनिक खाद के जरिये उत्पादन हो भी गया, तो उस रासायनिक खाद वाले जहरीले अनाज से कितना पोषण होगा और कितना उसका शारीरिक विकास होगा. राज्य में खाद्य सुरक्षा की स्थिति और उसे लोगों तक पहुंचाने के उपाय के संबंध में पद्मश्री सिमोन उरांव से बातचीत की गयी. पेश है बातचीत के आधार पर यह आलेख.
 
कोई व्यक्ति भूखा ना रहे, इसी उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा कानून बनाया गया है. झारखंड में इसकी तस्वीर सही नहीं दिखती है. सरकार अनाज देने की बातें कहती हैं, लेकिन धरातल पर सही लाभुकों तक आज भी अनाज नहीं पहुंच रहा है. खाद्य सुरक्षा को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए किसान पहली सीढ़ी हैं. किसान दिन-रात खेतों में मेहनत करके अनाज का उत्पादन करते हैं, तब जाकर खाद्यान्न सरकार को मिलता है. उसके बदले किसानों को क्या मिलता है. 
 
अधिक उत्पादन के बढ़ते दबाव के बीच किसान अपनी पारंपरिक खेती से दूर होते चले जा रहे हैं. रासायनिक खाद के उपयोग से जमीन कड़ी होती जा रही है. इस कारण अब जुताई के लिए ट्रैक्टर का इस्तेमाल होता है. ऐसे में घर की गाय और भैंस का महत्व घर तक ही सिमट कर रह गया है. गाय-भैंस का महत्व घटने के कारण किसानों के घर से गाय-भैंस गायब होने लगे हैं. इस प्रक्रिया में किसानों को बड़ा नुकसान हुआ. पहले किसानों को घर में ही दूध मिलता था, लेकिन अब वो और उसका परिवार दूध पीने से वंचित हो गया है. खाद के लिए गोबर उपलब्ध होता था. अब वो भी खत्म हो गया. इन कारणों से लगातार किसान और गरीब परिवार के स्वास्थ्य में गिरावट आ रही है.

पहले घर के आस-पास फल के पेड़ लगे होते थे. लोग भी फल के पेड़ लगाते थे. इस कारण लोगों को हर मौसम में फल खाने के लिए मिल जाता था, पर अब धीरे-धीरे वो पेड़ भी कटते जा रहे हैं. इस कारण हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं. प्रकृति के साथ चले बिना खाद्य सुरक्षा के उद्देश्य को हम पूरा नहीं कर सकते हैं. राज्य में खाद्य सुरक्षा को सही मायने में लागू करना है, तो इसके लिए सरकार को जल, जंगल और जमीन तथा किसानों के प्रति संवेदनशील होना पड़ेगा. रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देना होगा. सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि जिस जगह पर नयी फैक्ट्री लगायी जाये, वो कृषि योग्य जमीन नहीं हो. फैक्ट्री लगने के कारण किसानों को पानी की समस्या नहीं हो. इन तमाम चीजों पर सरकार को विशेष ध्यान देना होगा.
 
सबसे पहले सरकार को राज्यवासियों की जरूरतों को समझना होगा. किसान और लोगों की जरूरतों के मुताबिक सरकार को योजनाएं बनानी होंगी. खेती को प्राथमिकता में लाना होगा, तब जाकर राज्य के सभी लोगों को पोषणयुक्त भोजन देने का सपना पूरा हो पायेगा. इसके साथ ही जल संसाधनों के संरक्षण पर सरकार को जोर देना होगा. तालाब व डोभा में मछली पालन को बढ़ावा देना होगा. इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण चीज है शिक्षा. शिक्षा के बिना कुछ नहीं हो सकता है. इसलिए सभी को शिक्षित होना जरूरी है. शिक्षा को खाद्य से इसलिए जोड़ा जा रहा है, क्योंकि  लोग शिक्षित होंगे, तो बेहतर खान-पान के प्रति जागरूक होंगे.