gram savraj

  • Feb 2 2018 11:42AM

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने किया वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट पेश, ग्रामीण परिवारों की आय होगी दोगुनी

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने किया वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट पेश, ग्रामीण परिवारों की आय होगी दोगुनी

 पंचायतनामा डेस्क

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट पेश किया. ग्रामीण विकास व पंचायती राज के साथ-साथ शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है. सरकार ने पशुपालन, मछली पालन और कौशल विकास के सहारे ग्रामीणों की आमदनी दोगुनी कर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है. राज्य के समग्र विकास के लिए पांच बिंदुओं पर फोकस किया गया है. ग्रामीण परिवारों की आय दोगुनी करना, रोजगार-स्वरोजगार के अवसर पैदा करना, अनुसूचित जाति/जनजाति एवं वंचित वर्गों का विकास, महिला सशक्तीकरण और पिछड़े जिलों/प्रखंडों का समेकित विकास करने के अलावा वर्ष 2018-19 में फ्लोराइड एवं आर्सेनिक प्रभावित टोलों में शत-प्रतिशत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जायेगा. राज्य के छह अति पिछड़े जिलों में प्राथमिकता के आधार पर पेयजलापूर्ति योजनाओं का क्रियान्वयन किया जायेगा. इस बजट के माध्यम से सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों व लोगों के विकास से संबंधित कई योजनाओं पर बल दिया है. 

इस बार के बजट में आपके लिए है कुछ खास 

1. शिक्षा, शैक्षणिक गुणवत्ता एवं कौशल विकास 

- शिक्षा के क्षेत्र में 11,181.49 करोड़ रुपये प्रस्तावित है, जो चालू वित्तीय वर्ष की तुलना में 6.31 फीसदी की दर से 663.85 करोड़ रुपये अधिक है.

- वित्तीय वर्ष 2017-18 में शिक्षा के लिए 10,517 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया था.

- तकनीकी एवं कौशल विकास के बजट में सरकार ने 127.40 करोड़ रुपये की वृद्धि की है. पिछली बार इस मद में सरकार ने 704 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया था, जिसे बढ़ा कर इस बार 831.40 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

वर्ष 2014 और 2017 की तुलनात्मक स्थिति 

- वर्ष 2014 तक 38,904 विद्यालयों में से मात्र 7,000 विद्यालयों में बेंच एवं डेस्क की व्यवस्था उपलब्ध थी, जिसे बढ़ा कर अब 31,705 विद्यालयों में बेंच एवं डेस्क उपलब्ध करायी गयी है.

- वर्ष 2014 तक 38,904 विद्यालयों में से मात्र 3,500 विद्यालयों में बिजली की सुविधा उपलब्ध थी, जिसे बढ़ा कर अब 26,788 विद्यालयों में बिजली की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है.

- वर्ष 2014 तक 22,636 विद्यालयों में शौचालय की व्यवस्था थी, जिसे बढ़ा कर सभी 38,904 विद्यालयों में शौचालय की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है.

- वर्ष 2014 तक 30,803 विद्यालयों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध थी, जिसे बढ़ा कर 38,132 विद्यालयों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है.

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता 

- स्कूली शिक्षा के लिए 3999.99 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसके तहत प्राथमिक शिक्षा के लिए 3105.24 करोड़ रुपये और सेकेंडरी एजुकेशन के लिए 894.75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

- उच्च शिक्षा के लिए 523 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

- स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में 31 दिसंबर तक 4341.53 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं.

- माध्यमिक शिक्षा को बेहतर करने के लिए मुख्यमंत्री उच्च माध्यमिक शिक्षा प्रोत्साहन योजना की शुरुआत होगी. 

- राज्य में पुस्तकालयों की स्थिति और बेहतर होगी.

- राज्य के आठ अनुमंडलीय पुस्तकालय को राज्य स्तरीय पुस्तकालय में अपग्रेड किया जायेगा.

- जिला स्तरीय पुस्तकालय को अगले तीन वर्षों में मोटिवेशनल केंद्र और ई-लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया जायेगा.

- राज्य के 89 मॉडल स्कूलों को इंग्लिश माध्यम के रूप में विकसित करने लक्ष्य है.

- सभी प्रखंडों के एक विद्यालय में योग शिक्षा की शुरुआत होगी. 

- रामगढ़ व खूंटी जिले में नवोदय विद्यालय और पलामू जिले में केंद्रीय विद्यालय शुरू करने की योजना है.

- नक्सली गतिविधियों से प्रभावित परिवार के बच्चों के लिए चार आवासीय विद्यालय बनाने की घोषणा.

- पलायन से मुक्त करायी गयी बालिकाओं के लिए दो आवासीय विद्यालय बनाने की घोषणा.

- स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग द्वारा हाटगम्हरिया व रेहला में बीएड कॉलेज खोला गया.

- शिक्षा की गुणवत्ता के लिए झारखंड शैक्षणिक शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान को प्रभावकारी बनाते हुए राज्य के प्रशिक्षण संस्थानों को सुदृढ़ किया जायेगा.

2. कृषि, पशुपालन एवं सिंचाई

- ग्रामीण जनता की आय तीन वर्षों में दोगुनी करने का लक्ष्य.

- वित्तीय वर्ष 2018-19 में कृषि बजट 5,807.64 करोड़ प्रस्तावित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.04 फीसदी अधिक है.

- वित्तीय वर्ष 2017-18 में कृषि बजट के लिए 5,375.22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था.

- कृषि से जुड़े क्षेत्रों के लिए वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 2675 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है.

- वित्तीय वर्ष 2017-18 में कृषि विभाग के लिए 3035.95 करोड़ का प्रावधान था, जबकि 31 दिसंबर 2017 तक मात्र 681.32 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाये.

- राज्य में एक सौ छोटे कोल्ड रूम बनाये जाने का प्रस्ताव है.

- किसानों व खेतिहर मजदूरों की सुरक्षा को ध्यान में रख कर सरकार ने सहायता करने की घोषणा की है. इसके तहत सांप काटने, कुआं धंसने जैसी आकस्मिक आपदा राहत के लिए पीड़ित परिवारों को चार लाख रुपये की सहायता राशि दी जायेगी.

- फूलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए रांची समेत देवघर, सिमडेगा एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में नयी योजनाएं चलायी जायेंगी.

- साहेबगंज जिले में कृषि महाविद्यालय स्थापित किये जाने का प्रस्ताव है.

- रेशम का उत्पादन तीव्र गति से बढ़े, इसी उद्देश्य से दुमका प्रमंडल में रेशम प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना होगी.

- रांची, देवघर, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर तथा रजरप्पा में हस्तशिल्प इंपोरियम की स्थापना होगी.

- पीपीपी मोड में रांची व खरसावां में सिल्क पार्क की स्थापना होगी.

- बायोगैस प्लांट की स्थापना किये जाने का प्रस्ताव है, ताकि किसानों को मुफ्त ईंधन मिलने के साथ-साथ जैविक खाद का उत्पादन हो सके.

- किसानों के लिए सिंचाई की समुचित व्यवस्था हो, इसके लिए अलग से बिजली फीडर लाइन की व्यवस्था के साथ आवश्यकतानुसार सौर ऊर्जा की व्यवस्था की जायेगी.

- सिंचाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो हजार सोलर पंप लगाने की योजना है.

- मत्स्य पालन में राज्य आत्मनिर्भर हो गया है.

- आगामी वित्तीय वर्ष में जमशेदपुर, देवघर, पलामू, साहेबगंज और गिरिडीह में 50-50 हजार लीटर के डेयरी प्लांट की शुरुआत होगी.

- राज्य को कुपोषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से सभी विधायकों के सहयोग से गिफ्ट मिल्क योजना शुरू करने का प्रस्ताव है, इसके तहत कुपोषण से पीड़ित बच्चों को हर दिन मुफ्त में दूध उपलब्ध कराया जायेगा.

3. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज

- वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए प्रस्तावित कुल बजटीय उपबंध 80 हजार 200 करोड़ रुपये में से सबसे अधिक ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को दिये गये.

- ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के क्षेत्र में 11,771.16 करोड़ रुपये प्रस्तावित किये गये हैं.

- यह राशि चालू वित्तीय वर्ष 2017-18 की तुलना में 12.39 फीसदी की दर से 1,297.46 करोड़ रुपये अधिक है.

- दीनदयाल ग्राम स्वावलंबन योजना के तहत राज्य के सभी पंचायतों में मुख्यमंत्री ग्राम विकास फेलो विशेषज्ञ के रूप में पदस्थापित किये जायेंगे.

- इनका दायित्व पंचायत के अधीन आनेवाले सभी राजस्व ग्राम/टोले के ग्रामीणों को प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, जनसंख्या नियंत्रण, स्वच्छता, वैज्ञानिक चिंतन, संगठन का महत्व, नशाबंदी, कुल्हाड़ीबंदी (पेड़-पौधों की कटाई नहीं करना), चराईबंदी (पशुओं को खुले में नहीं छोड़ना), श्रमदान, बालश्रम उन्मूलन, बाल विवाह उन्मूलन, जलछाजन, जैविक खेती योग्य व आध्यात्मिक जीवन शैली के माध्यम से संबंधित विषयों पर ग्रामीणों को जागरूक करना है.

- योजना बनाओ अभियान के तहत ग्रामीणों द्वारा छोटी-छोटी योजनाओं के निर्माण की जवाबदेही ग्राम विकास समिति/आदिवासी विकास समिति को सौंपी जायेगी.

- ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों विशेष कर बच्चों के लिये पंचायत स्तर पर चरणबद्ध तरीके से छोटे-छोटे पार्कों का निर्माण कराया जायेगा.