gram savraj

  • Feb 27 2018 5:45PM

उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, पोकल टिकरा कभी पढ़ते थे 100 बच्चे, अब आते हैं मात्र दो बच्चे

उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, पोकल टिकरा कभी पढ़ते थे 100 बच्चे, अब आते हैं मात्र दो बच्चे

 पंचायत : नेहालु कपरिया

प्रखंड : बेड़ो

जिला : रांची

पवन कुमार


रांची जिले के बेड़ो प्रखंड की नेहालु कपरिया पंचायत में एक गांव है पोकल टीकरा. इस गांव में करीब सौ लोग रहते हैं. गांव तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़कें नहीं हैं. ऊबड़-खाबड़ रास्ते से होकर ही इस गांव में पहुंचा जा सकता है. इस लिहाज से गांव काफी पिछड़ा हुआ है. गांव में शिक्षा की स्थिति और भी खराब है. वर्ष 2002 में इस गांव में प्राथमिक विद्यालय खोला गया. भवन बनकर तैयार भी हो गया, लेकिन जिस उद्देश्य के साथ विद्यालय की स्थापना की गयी थी, वह उद्देश्य आज भी पूरा नहीं हुआ. गांव के अधिकांश बच्चे या तो जेजे टोली के विद्यालय में जाते हैं या फिर विद्यालय जाते ही नहीं हैं. उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, पोकल टीकरा में मात्र दो ही बच्चे पढ़ने जाते हैं, जबकि इस विद्यालय में 45 बच्चे नामांकित हैं.

एक पारा टीचर के भरोसे है यह विद्यालय
उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, पोकल टीकरा विद्यालय जब खुला था, उस वक्त यहां लगभग सौ बच्चे पढ़ने के लिए आते थे, लेकिन धीरे-धीरे बच्चे कम होते गये और वर्तमान में 45 बच्चे ही नामांकित हैं, जबकि मात्र दो से पांच बच्चे हर रोज विद्यालय आते हैं. शुरुआती दौर में पारा शिक्षक के रूप में कमलू प्रधान ने अपना योगदान दिया था. वर्तमान में उनकी जगह पर एक अन्य पारा शिक्षिका इस विद्यालय में योगदान देंगी.

टूटा फर्श, टूटी खिड़की, क्लास रूम भी गंदा
विद्यालय भवन को देखने से लगता है कि यह भवन काफी दिनों से वीरान पड़ा है. बरामदा और कमरों में गंदगी फैली हुई है. सभी कमरों में सूखे पत्ते और धूल हैं. खिड़कियां या तो टूटी हुई थीं या चोरी कर ली गयी थीं. दरवाजों पर ताले नहीं लगे हुए थे. यहां तक कि विद्यालय भवन में झाड़ू तक नहीं था. विद्यालय भवन में स्कूल के नाम पर सिर्फ दीवारों पर टंगे हुए कुछ महापुरुषों की तस्वीरें थीं और एक घंटी थी.

डेढ़ दशक तक नहीं गया विभाग का ध्यान
ग्रामीणों के मुताबिक, बच्चों के इस विद्यालय में नहीं आने के पीछे कई कारण है. एक तो मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, वहीं दूसरी ओर एकमात्र पारा शिक्षक कमलू प्रधान का हमेशा नशे में धूत रहना है. विद्यालय का चापाकल पिछले एक साल से खराब है, लेकिन आज तक उसकी मरम्मत नहीं करायी गयी है. बच्चे खाना खाने के बाद दूसरों के घर के चापाकल पर जाकर पानी पीने को मजबूर होते हैं. शौचालय भी काफी जर्जर है. स्कूल में बोर्ड और घंटी के अलावा कुछ नहीं है.

ग्रामसभा के बाद मुखिया ने की कार्रवाई
हमेशा नशे की हालत में पारा शिक्षक के विद्यालय आने की शिकायत पर नेहालु कपरिया पंचायत की मुखिया बसंती कुमारी ने ग्रामसभा बुलायी. इस ग्रामसभा में ग्रामीणों ने पारा शिक्षक कमलू प्रधान को हटाने पर सहमति जतायी. इसके बाद ही अभिभावक अपने बच्चों को विद्यालय भेजने की बातें कहीं. ग्रामसभा के निर्णय के आलोक में उक्त पारा शिक्षक कमलू प्रधान का किसी अन्य विद्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है. इसके जगह पर एक पारा शिक्षिका को पठन-पाठन का जिम्मा सौंपा गया है.

पिछले एक साल से नहीं मिला मानदेय : कमलू प्रधान
विद्यालय के एकमात्र पारा शिक्षक कमलू प्रधान से जब विद्यालय परिसर में मुलाकात हुई, तो वे नशे में थे. इस कारण वो कुछ भी नहीं बता पा रहे थे. काफी कुरदने पर कहते हैं कि पहले स्कूल में काफी बच्चे आया करते थे, लेकिन अब संख्या काफी कम हो गयी है.