gram savraj

  • Jul 17 2018 12:09PM

नरसंडा पंचायत में नैपकिन बनाकर महिलाएं बन रहीं स्वावलंबी

नरसंडा पंचायत में नैपकिन बनाकर महिलाएं बन रहीं स्वावलंबी

 सुकेश कुमार 

प्रखंड : सदर
जिला : पश्चिमी सिंहभूम

पश्चिमी सिंहभूम अंतर्गत सदर प्रखंड की नरसंडा पंचायत में महिलाओं की सक्रियता से पूरा पंचायत फलफूल रहा है. अधिकतर घर की महिलाओं ने सेनेटरी नैपकिन बनाने का प्रशिक्षण लिया है. महिलाएं घरों से ही सेनेटरी नैपकिन बना कर बेचती हैं. मुखिया जयंती सुंडी के नेतृत्व में कई महिलाओं को प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग मिल रहा है. इस पहल से आसपास के गांवों की महिलाओं को न्यूनतम कीमत पर नैपकिन उपलब्ध करायी जा रही है. इस तरह की पहल से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है.

सस्ता और अच्छा सेनेटरी नैपकिन
घरों में बनने वाले सेनेटरी नैपकिन बाजार में बिकने वाले अन्य नैपकिन से कहीं बेहतर और सस्ता हैं. यह इको फ्रेंडली नैपकिन है. इस नैपकिन में प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया है. बाजार में बिकने वाले नैपकिन में रूई और नेट का प्रयोग होता है, लेकिन इस सेनेटरी नैपकिन में टिशु पेपर का प्रयोग किया गया है. इससे यह अन्य नैपकिन से 60 प्रतिशत बेहतर है. इसकी कीमत भी सबसे कम है. सेनेटरी नैपकिन का एक पैकेट 20 रुपये का है, जिसमें 8 नैपकिन दिया जाता है. इतना ही नहीं, गरीब तबके की महिलाओं और लड़कियों को इससे भी कम दाम पर नैपकिन दी जाती है.

सरकारी योजनाओं पर भी हो रहा कार्य
नरसंडा पंचायत में सरकारी योजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है. पंचायत सेवक जगबंधु दास के मुताबिक, 14वें वित्त योजना के तहत चलनेवाले सभी कार्य पूरे हो चुके हैं, वहीं मनरेगा के तहत डोभा, तालाब, समतलीकरण, नाली आदि का कार्य भी पूरा कर लिया गया है. पीएम आवास का कार्य शत प्रतिशत हो चुका है. 2016-17 में 45 पीएम आवास आवंटन था, जिसमें 44 को पूरा कर लिया गया है. तकनीकी कारणों से एक पीएम आवास लंबित है.

पूंजी व जगह का है अभाव
पंचायत में स्थायी सरकारी आवास नहीं होने के कारण महिलाएं अपने-अपने घरों में ही नैपकिन बनाने में लगी हैं, हालांकि कई महिलाएं तो ऐसी हैं, जो प्रशिक्षण लेने के बावजूद पूंजी और जगह नहीं होने की वजह से अपना रोजगार नहीं कर पा रही हैं. अनीता पूर्ति कहती हैं कि अगर जगह उपलब्ध करायी जाये, तो इस नैपकिन को विभिन्न विभागों में सप्लाई भी कर सकती हैं. बजट कम होने की वजह से अधिक स्टॉक नहीं रख पाती हैं. अनीता कई महिलाओं को प्रशिक्षण भी दे चुकी हैं.

सरकारी सहयोग देने की हो रही कोशिश : बीडीओ
प्रखंड विकास पदाधिकारी रवींद्र कुमार कहते हैं कि नरसंडा पंचायत में महिलाओं की एकता एक मिसाल है. महिलाएं सेनेटरी नैपकिन का प्रशिक्षण लेकर कम दाम में यह सुविधा उपलब्ध करा रही हैं. सरकारी सहयोग मिले, इस पर प्रशासन स्तर से कोशिश की जा रही है.

महिलाएं स्वावलंबी बनें : जयंती सुंडी
नरसंडा पंचायत की मुखिया जयंती सुंडी कहती हैं कि पंचायत क्षेत्र में यह प्रयास है कि यहां की महिलाएं स्वावलंबी बनें. उन्हें रोजगार से जोड़ा जाये. सरकारी योजनाओं के अलावा महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए उन्हें नैपकिन बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है. सरकारी योजनाओं के तहत विकास कार्य किये जा रहे हैं.

घर का कामकाज देख नैपकिन से भी कर रहीं कमाई
नरसंडा पंचायत के संकोसाई गांव में सुशीला के नेतृत्व में चाईबासा-चक्रधरपुर रोड पर नैपकिन का उद्योग लगाया गया है. जिसमें सुमती सुंडी, पिंकी सुंडी, रिता सुंडी, सरिता सुंडी व लक्ष्मी सुंडी कार्य करती हैं. इसमें ग्रामीण महिला भी शामिल हैं, जो गृहिणी होने के साथ-साथ नैपकिन के उद्योग में भी काम कर रही हैं.

नैपकिन से मिला रोजगार : सुशीला सुंडी
नैपकिन बनाने वाली महिला सुशीला सुंडी कहती हैं कि वह रोजाना 500 नैपकिन बना लेती हैं, लेकिन फिलहाल घर में काम होने की वजह से इसमें कमी आयी है, लेकिन उनकी कोशिश है कि इसमें और महिलाओं को जोड़ा जाये. यह रोजगार का एक बेहतर साधन है. यहां बाजार से कम कीमत पर नैपकिन उपलब्ध कराया जाता है.