ground zero

  • Aug 16 2019 1:59PM

9400 मीट्रिक टन मछली का हो रहा उत्पादन

9400 मीट्रिक टन मछली का हो रहा उत्पादन

दुर्जय पासवान
गुमला

गुमला जिले के आठ हजार किसान मछली पालन करते हैं. ये आंकड़ा सरकारी है. जमीनी हकीकत ये है कि इनकी संख्या 10 हजार से अधिक है. मछली पालन से इनकी तकदीर संवर रही है. पालकोट व भरनो प्रखंड के कई किसान हैं, जो मछली उत्पादन से आज आत्मनिर्भर हैं और आर्थिक रूप से मजबूत हैं. जिला मत्स्य कार्यालय की ओर से किसानों को मछली पालन के प्रति जागरूक किया जा रहा है. यहां रोहू, कतला, मृगल व पंगास यानी पंगेसियस मछली का पालन बड़े पैमाने पर होता है. रोहू व कतला की मांग सबसे अधिक है. मत्स्य विभाग ने वर्ष 2018-19 में गुमला जिले में 9500 मीट्रिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया था. इसके एवज में जिले के मत्स्य पालकों ने लक्ष्य से काफी नजदीक यानी 9400 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन किया

मछली पालन की स्थिति
सबसे अधिक रोहू, इसके बाद कतला, मृगल व पंगास का उत्पादन
एक साल में 5500 टन मछली का उत्पादन
यहां की मछली की बिक्री गुमला के अलावा रांची व सिमडेगा में
एक मत्स्य विभाग व छह निजी हेचरी है.
367
तालाब, जलाशय 22 व डोभा 4750 है. नदी भी है.

यह भी पढ़ें: कभी करते थे मजदूरी, आज मछली पालन से ग्रामीणों को रोजगार दे रहे चरवा उरांव

मछली पालन के लिए भावी योजना
बेंदोरा, अपरशंख डैम, धनसिंह डैम व पारस डैम में 18 केज बनेगा
मछली पालकों के लिए मछुआ आवास का निर्माण होगा
मछली उत्पादन का लक्ष्य 5500 टन से बढ़ा कर छह हजार टन करना है
बेकार पड़े 81 तालाबों व बांधों को पुनर्जीवित करना है
निजी क्षेत्रों में मत्स्य हेचरी का निर्माण कर मछली पालन को बढ़ावा देना

डैम, तालाब व मत्स्य उत्पादक
विभागीय तालाब : 367
सरकारी छोटे-बड़े डैम : 55
निजी तालाब : 6500
विभाग से जुड़े किसान : 4500
व्यक्तिगत मत्स्य पालक : 3500

गुमला जिले के किसानों को मछली पालन में हर तरह की मदद की जाती है. अधिक से अधिक किसानों को मछली पालन से जोड़ने का प्रयास है. अभी मछली पालन का समय है. किसानों को मछली बीज का वितरण किया जा रहा है. अभी तक करीब डेढ़ लाख मछली बीज बांटे जा चुके हैं.
पंचानन उरांव, डीपीआरओ, गुमला