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  • Feb 18 2020 3:31PM

लंदन तक है किसान कृष्णकांत पाठक के जैविक उत्पादों की मांग

लंदन तक है किसान कृष्णकांत पाठक के जैविक उत्पादों की मांग

पंचायतनामा टीम
जिला: लातेहार 

एक किसान, जो जैविक खेती को जी रहे हैं. यूं कहें कि वह जैविक खेती को लेकर पूरी तरह समर्पित हैं. सोते, जागते, उठते, बैठते, बातचीत करते. हर वक्त जैविक खेती. नाम है- कृष्णकांत पाठक (52 वर्ष). युवावस्था से ही प्रयोगधर्मी रहे श्री पाठक के जैविक उत्पादों की डिमांड देश के कई राज्यों के साथ-साथ लंदन तक है. वह झारखंड के लातेहार जिले के बारियातू प्रखंड के फुलसू गांव के रहने वाले हैं. रांची में वह कांके डैम के किनारे सर्वोदय नगर में रहते हैं. अपने उत्पादों को वह रांची लाकर भी बिक्री करते हैं.

नौकरी छोड़ की जैविक खेती की शुरुआत

16 वर्षों तक विभिन्न एग्रो बिजनेस कंपनियों में यूनिट सेल्स लीड कम टेक्निकल एडवाइजर की नौकरी करने के दौरान कृष्णकांत पाठक को अहसास हुआ कि रासायनिक खेती को प्रोत्साहित कर वह न तो समाजहित और न किसानहित में कार्य कर रहे हैं, बल्कि सेहत से खिलवाड़ व किसानों के आर्थिक शोषण के साझीदार बन रहे हैं. आखिरकार एक दिन उन्होंने नौकरी छोड़ने का निर्णय कर जैविक खेती करने का संकल्प लिया.

कभी करते थे रासायनिक खेती

किसान कृष्णकांत पाठक यूं तो वर्षों पहले से ही खेती-किसानी करते थे, लेकिन जानकारी के अभाव में रासायनिक खाद एवं उर्वरकों का उपयोग अन्य किसानों की तरह ही किया करते थे. गौ विज्ञान अनुसंधान केंद्र, देवलापार, नागपुर (महाराष्ट्र), बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, कांके (रांची) एवं विभिन्न एग्रो बिजनेस कंपनियों में काम करने के दौरान मिले प्रशिक्षण से स्नातक पास श्री पाठक की आंखें खुलीं और उन्होंने रासायनमुक्त खेती का निश्चय किया.

शुरुआत में ही बंपर उत्पादन

लातेहार जिले के बारियातू प्रखंड के फुलसू गांव निवासी कृष्णकांत पाठक ने वर्ष 2016 में जैविक खेती की शुरुआत की. 25 डिसमिल जमीन में टमाटर की खेती की. इसमें सिर्फ गोमूत्र, गोबर और गुड़ से बने अमृत जल का ही प्रयोग किया. करीब छह माह की अवधि में 25 क्विंटल टमाटर का उत्पादन हुआ. रासायनिक खेती करने वाले अन्य किसानों के टमाटर का पौधा या तो मर गया था या फिर करीब 10 क्विंटल टमाटर का उत्पादन हुआ था. बंपर उत्पादन से कृष्णकांत का मनोबल काफी बढ़ गया. इसी दौरान पांच डिसमिल जमीन में हरी मिर्च लगायी. 10 माह की अवधि में श्री पाठक ने करीब तीन क्विंटल हरी मिर्च और 25 किलो सूखी मिर्च की बिक्री की.

पाला व कुहासा पर भारी पड़ा अमृत जल

कृष्णकांत पाठक बताते हैं कि सितंबर-अक्तूबर, 2019 में मौसम अनुकूल नहीं था. आखिरी अक्तूबर में उन्होंने आलू लगाया. पाला व कुहासा के कारण अधिकतर किसानों के आलू की फसल बर्बाद हो गयी, जबकि 25 डिसमिल में उनके द्वारा अमृत जल से किये जा रहे आलू का बंपर उत्पादन करीब 20 क्विंटल हुआ. डेढ़ एकड़ में वह खेती (सरसों, चना, हरी मिर्च, पालक, टमाटर) करते हैं. एक एकड़ में बगीचा (आम, अमरुद) है. इनके जैविक आम की डिमांड देश के कई राज्यों के साथ-साथ लंदन तक है.

किसानों को करते हैं प्रशिक्षित

टमाटर की खेती के लिए प्रसिद्ध फुलसू गांव के कृष्णकांत पाठक न सिर्फ जैविक खेती करते हैं, बल्कि आस-पास के कई गांवों के ग्रामीणों को प्रशिक्षित कर जागरूक भी करते हैं. इसका असर हुआ. लातेहार जिले के बारियातू प्रखंड के लाटू गांव में 20 एकड़, फुलसू में पांच एकड़, करमा में 10 एकड़ में किसान जैविक खेती कर रहे हैं. लातेहार के साथ-साथ रांची के करीब 20 गांवों में जैविक कृषि का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं.

जैविक खेती है आखिरी विकल्प : कृष्णकांत पाठक

किसान कृष्णकांत पाठक कहते हैं कि पोषण, अच्छी आय और टिकाऊ खेती के लिए वरदान है जैविक खेती. इसमें सेहत में सुधार के साथ-साथ अच्छी आमदनी भी है. किसान अभी भी जागरूक होकर जैविक की ओर नहीं लौटे, तो अपनी ही जमीन में मजदूरी की नौबत आ जायेगी. इससे 50 से 150 प्रतिशत तक उत्पादन में वृद्धि हो रही है.