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  • Jun 28 2019 8:20PM

हाइब्रिड बीज से धान पैदावार में हुई बढ़ोतरी

हाइब्रिड बीज से धान पैदावार में हुई बढ़ोतरी

पंचायतनामा टीम
प्रखंड: मांडर
जिला: रांची

पूरी जिंदगी खेती-बारी में गुजार दिये. अब बेटा खेती करता है. गांव में सबसे पहले हाइब्रिड धान रोपने की शुरुआत की. तब से उत्पादन में काफी फर्क पड़ा है. हाइब्रिड से पैदावार में बढ़ोतरी होती है. अपने खेत में मौजूद पेड़ की छांव में सुस्ताते हुए सूरजू उरांव ने यह बात कही. अब सूरजू उरांव के बेटे विजय उरांव खेती करते हैं. पिता के साथ खेती में हाथ बटाते हैं. ब्राम्बे-ठाकुरगांव पथ पर स्थित सेवाडीह गांव के पहले ही सड़क किनारे इनके खेत हैं. इनकी खेती को देखने के लिए आस-पास के किसान आते हैं. सालोंभर इनके खेतों में हरियाली रहती है. खरीफ के मौसम में धान और बाकी समय सब्जियों की खेती करते हैं

हाइब्रिड से बढ़ी पैदावार
सूरजू उरांव बताते हैं कि वर्ष 1999-2000 तक तो गांव के किसान देसी धान की ही खेती करते थे, जिससे पैदावार अधिक नहीं हो पाती थी. उस समय तक धान की खेती से सिर्फ सालभर के खाने का जुगाड़ हो पाता था. जब से हाइब्रिड धान का प्रचलन शुरू हुआ तब से पैदावार में शानदार बढ़ोतरी हुई. इसका फायदा यह हुआ कि धान बेच कर भी किसान मुनाफा कमाने लगे. उन्होंने खुद सबसे पहले अपने गांव में हाइब्रिड धान की खेती की शुरुआत की थी. जिसके बाद से धीरे-धीरे सभी लोग इसे अपनाने लगे.

प्रखंड से वक्त पर धान नहीं मिलता
इस इलाके के किसानों का कहना है कि प्रखंड में धान बांटने के लिए तो आता है, लेकिन सही समय पर किसानों को धान नहीं मिल पाता है. अक्सर 15-20 दिन की देरी से धान का वितरण होता है जिसके कारण किसान खुद से स्थानीय बाजार से बीज खरीद कर बिचड़ा तैयार कर लेते हैं.

लैंपस से सही समय पर नहीं मिलता पैसा
विजय उरांव ने कहा कि धान उनके लिए एटीएम की तरह है. जब जरूरत होती है, बेच कर पैसे मिल जाते हैं. स्थानीय बाजार में ही धान को बेचते हैं. लैंपस में धान नहीं देते हैं. लैंपस में धान देने की प्रक्रिया थोड़ी जटिल है. पहले जाकर रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है. इसके बाद सूखा हुआ धान बोरा में भर कर पहुंचाना पड़ता है. बोरा खरीदने में और केंद्र तक पहुंचाने में अतिरिक्त पैसे खर्च होते हैं. इसके बाद पैसे भी देरी से मिलते हैं, जबकि धान काटने के बाद रबी फसल लगाने के लिए तुरंत पैसों की जरूरत पड़ती है.

श्रीविधि से करते हैं खेती
विजय उरांव जागरूक किसान हैं. प्रखंड की ओर से आयोजित किसान भ्रमण कार्यक्रम के तहत उन्होंने प्लांडू और गेतलसूद में जाकर खेती की उन्नत तकनीक सीखी है. तीन एकड़ में धान की खेती करते हैं. कुछ खेतों में श्रीविधि से खेती करते हैं. श्रीविधि में समय की बचत होती है. बीज की बचत होती है, पैदावार में कुछ ज्यादा बदलाव नहीं आता है.

धान के लिए गोबर खाद सबसे बेहतर : विजय उरांव
विजय उरांव बताते हैं कि उन्होंने मिट्टी की जांच करायी है. धान के खेत में सिर्फ गोबर खाद डालते हैं क्योंकि रासायनिक खाद और कीटनाशक से मिट्टी को नुकसान पहुंचता है. सब्जियों में निर्धारित मात्रा में एनपीके का इस्तेमाल करते हैं. तीन एकड़ में धान की खेती करने के एवज में जो पूंजी लगती है, उससे अधिक मुनाफा हो जाता है. धान की खेती में फायदा है. बस सही समय को पहचानना पड़ता है.