ground zero

  • Feb 18 2020 3:39PM

कई राज्यों में बिकती हैं तीर्थनाथ की जैविक सब्जियां

कई राज्यों में बिकती हैं तीर्थनाथ की जैविक सब्जियां

पंचायतनामा टीम
जिला: रांची
 

खेती-बारी को अक्सर घाटे का सौदा कहा जाता है. अगर आप भी यही सोचते हैं, तो रांची जिले के ओरमांझी प्रखंड के उकरीद के किसान तीर्थनाथ महतो एक हौसला हैं. इनके जैविक उत्पादों की मांग देश के कई राज्यों में है. वह ड्रिप इरिगेशन से साढ़े छह एकड़ में खेती कर रहे हैं. इतना ही नहीं, अन्य किसानों को प्रेरित भी करते हैं.

साढ़े छह एकड़ में खेती

किसान तीर्थनाथ महतो वर्ष 1987-88 से खेती कर रहे हैं. पहले सिर्फ ढाई एकड़ में खेती करते थे. वर्ष 2015 में डेढ़ एकड़ में ड्रिप इरिगेशन से खेती की शुरुआत की. मटर, मिर्च एवं तरबूज लगाया. इससे अच्छी कमायी हुई. धीरे-धीरे पांच एकड़ जमीन लीज पर लेकर यानी साढ़े छह एकड़ में खेती करने लगे.

जैविक खेती पर जोर

वर्ष 2017 से तीर्थनाथ महतो पूरी तरह जैविक खेती कर रहे हैं. कोई रासायनिक खाद व उर्वरक का प्रयोग नहीं करते हैं. जीवामृत एवं केंचुआ खाद खुद से तैयार करते हैं और अपने खेतों में डालते हैं. इससे उन्हें अच्छा उत्पादन हो रहा है. वह कहते हैं कि ड्रिप इरिगेशन से उनकी जिंदगी बदल गयी.

देश के कई राज्यों में है मांग

तीर्थनाथ तरबूज, करैला, खीरा, पूलगोभी, पत्तागोभी, मिर्च व टमाटर समेत अन्य फसल उपजाते हैं. इनके जैविक उत्पादों की मांग रांची ही नहीं, बल्कि पटना, कोलकाता, मुर्शिदाबाद में है.

खेतों में सालोंभर हरियाली

जनवरी में तरबूज लगाते हैं. मार्च में तैयार होता है. फिर जून में करैला, खीरा, फूलगोभी, पत्तागोभी, मिर्च व टमाटर लगाते हैं. ये अगस्त में तैयार हो जाता है. सितंबर-अक्तूबर में मटर लगाते हैं. इस तरह सालोंभर खेतों में हरियाली रहती है. इसके साथ ही अच्छी आमदनी भी होती है. 10 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.

जैविक खेती से अच्छी आय : तीर्थनाथ महतो

किसान तीर्थनाथ महतो कहते हैं कि इच्छाशक्ति हो, तो जैविक खेती में भी अच्छा भविष्य है. प्रशिक्षण लेकर किसान खेती-बारी करें, तो उन्हें काफी फायदा होगा. इसमें कम लागत लगती है, लेकिन ज्यादा मुनाफा होता है.