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  • Mar 18 2019 5:25PM

लेमन ग्रास से महिलाओं को मिला रोजगार

लेमन ग्रास से महिलाओं को मिला रोजगार

पवन कुमार

प्रखंड: खूंटी
जिला: खूंटी

 

खूंटी जिला अंतर्गत खूंटी प्रखंड में लगभग 26 एकड़ में लेमन ग्रास की खेती की गयी है. कुल 12 समूह की 144 महिलाएं प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर से इससे जुड़ी हुई हैं. लेमन ग्रास से उन्हें अच्छी आमदनी भी हो रही है. अब समूह की महिलाएं काफी खुश हैं कि इसके जरिये इन्हें रोजगार का साधन मिल गया है. इन महिलाओं को स्वावलंबी बनाने में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी का महत्वपूर्ण भूमिका है. लेमन ग्रास एक प्रकार का घास है. इसकी चाय काफी लाभदायक है. इसका तेल काफी फायदेमंद है और कई प्रकार की बीमारियों में दवा का काम करता है.

प्रोसेसिंग यूनिट से बढ़ी उम्मीद
जेएसएलपीएस की ओर से अनिगड़ा गांव में पांच लाख रुपये की लागत से लेमन ग्रास प्रोसेसिंग यूनिट लगायी गयी है, जहां से लेमन ऑयल निकाला जाता है. काफी देर तक गर्म करने के बाद लेमन ऑयल पानी के साथ बाहर निकलता है, जिससे तेल अलग हो जाता है. बाजार में यह तेल तकरीबन 1500 रुपये लीटर बिकता है. पांच सौ किलो लेमन ग्रास से लगभग ढाई से तीन लीटर लेमन ऑयल निकला जाता है. इसके बाद लेमन ऑयल को मेले में जाकर बेचा जाता है. समूह की महिलाएं ही इसे बेचती हैं. अभी तक लेमन ऑयल बेचने के लिए कोई खुला बाजार नहीं मिल पाया है. महिलाएं कहती हैं कि अगर खुला बाजार उन्हें मिलता, तो अपने उत्पाद को वे आसानी से बेच सकती थीं.

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लागत और मुनाफा
लेमन ग्रास को प्रोसेस करने के लिए यूनिट तक लाना पड़ता है, जिसमें खर्च आता है. लेमन ग्रास एक रुपये प्रति किलो की दर से ग्रामीण सेवा केंद्र, अनिगड़ा द्वारा खरीदा जाता है. जिसके बाद उसकी प्रोसेसिंग की जाती है. प्रोसेसिंग के तहत गर्म करने के लिए समूह की दो महिलाओं को काम दिया जाता है, जिन्हें प्रतिदिन 200 रुपये दिये जाते हैं. लेमन ग्रास काटने के लिए भी महिलाओं को प्रतिदिन 200 रुपये की दर से मजदूरी दी जाती है. लेमन ग्रास की खेती से किसान बंजर जमीन से भी पैसे कमा रहे हैं. प्रोसेसिंग कार्य से जुड़ी महिलाओं को रोजगार का एक अवसर मिल गया है. समूह की महिलाओं को जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर प्रोसेसिंग यूनिट में काम लिया जाता है.

लेमन ग्रास के फायदे
लेमन ग्रास बंजर जमीन में भी हो सकता है, इसलिए इसकी खेती के लिए कृषि योग्य जमीन बर्बाद नहीं होती और बंजर जमीन से ही मुनाफा हो सकता है. लेमन ग्रास में सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती हैं. बरसाती पानी और जमीन की नमी से यह हो जाता है. एक बार लगाने के बाद तीन साल तक लेमन ग्रास की कटाई की जाती है. तीन सालों तक खेत में कोई खर्च नहीं करना पड़ता है. लेमन ग्रास की खेती में खाद और कीटनाशक का प्रयोग नहीं होता है, जिससे लागत में कमी आती है.

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लेमन ऑयल के फायदे
सर्दी, खांसी और बुखार होने पर लेमन ऑयल की दो बूंद गुनगुने पानी में मिला कर पीने से लाभ होता है. किसी प्रकार के दर्द में लेमन ऑयल मालिश करने से फायदा मिलता है. घर की साफ-सफाई के दौरान पानी में लेमन ऑयल मिला कर घर को पोछने पर अच्छी सुगंध आती है. घर में खुशबू के लिए पानी के बरतन में लेमन ऑयल डाल कर रखने से घर में अच्छी खुशबू आती है.

बंजर जमीन में हरियाली ला रही है लेमन ग्रास की खेती : बिंदु देवी
अनिगड़ा की वनोपज मित्र बिंदु देवी बताती हैं कि लेमन ग्रास के जरिये बंजर जमीन में भी हरियाली लाने का प्रयास किया जा रहा है. हालांकि कुछ ग्रामीण लेमन ग्रास की खेती करने के लिए तैयार नहीं थे, पर काफी समझाने के बाद ग्रामीण अब लेमन ग्रास की खेती करने के लिए तैयार हुए हैं. अभी बाजार की समस्या है. बाजार मिल जायेगा, तो काफी ग्रामीण इस कार्य से भी जुड़ जायेंगे, जिससे उन्हें काफी लाभ होगा. ज्यादा मात्रा में खेती होगी, तो ज्यादा उत्पादन होगा और वे बाजार में लेमन ग्रास की मांग को पूरा कर पाने में सक्षम होंगी.

घर बैठे रोजगार मिला है : दालमुनी देवी
दालमुनी देवी बताती हैं कि लेमन ग्रास प्रोसेसिंग यूनिट में काम करके उन्हें रोजगार मिल गया है. इसके अलावा उन्होंने 25 डिसमिल जमीन में श्यामा तुलसी की खेती की है, जिसे सूखा कर और पैकेजिंग करके बेचने पर उन्हें पांच सौ रुपये की आमदनी हुई थी. इस बार वह तुलसी का अर्क निकाल कर बेचेंगी, ताकि अधिक आमदनी हो सके.

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सुगंध के बीच में मिला रोजगार: सरोज देवी
प्रोसेसिंग यूनिट में काम कर रहीं सरोज देवी ने बताया कि यहां काम करने में मजा आता है. समूह से जुड़े होने पर यह काम मिल रहा है. बाजार की समस्या है. अगर बेहतर बाजार मिल जाये, तो लेमन ग्रास का ज्यादा उत्पादन होगा और कमाई भी बढ़ जायेगी.

प्रसंस्करण और बाजार उपलब्ध कराना है लक्ष्य : पारितोष उपाध्याय
जेएसएलपीएस के सीइओ पारितोष उपाध्याय कहते हैं कि झारखंड में पहले से ही कुछ औषधीय पौधों की खेती होती रही है, लेकिन उसे बेचने के लिए बाजार की व्यवस्था नहीं है. जेएसएलपीएस का प्रयास है कि वैज्ञानिक तरीके से औषधीय पौधों की खेती हो. उसके लिए प्रसंस्करण की व्यवस्था हो. इसके साथ ही बाजार भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इससे जुड़ सकें और अपनी आमदनी बढ़ा सकें. कुछ नयी प्रजाति के पौधों को लाया गया है, जिनपर काम चल रहा है.