maati k rang

  • Mar 16 2020 5:07PM

डोकरा आर्ट से अपनी पहचान बना रहीं सुनीता

डोकरा आर्ट से अपनी पहचान बना रहीं सुनीता

पंचायतनामा टीम
जिला : रांची

हाथ में ब्रश लेकर अपनी कल्पनाशीलता से कैनवास को आकार देतीं सुनीता. मानो सुनीता बागवार की यही दिनचर्या है. हर रोज सुनीता अपनी कल्पनाओं में रंग भरकर उन्हें आकार देती हैं. इसके बाद उस तस्वीर को और जीवंत बनाने के लिए उसमें उभार के साथ भी कुछ तस्वीर लगाती हैं. क्ले के पुतले बनाकर उसे कैनवास पर चिपका देती हैं, ताकि तस्वीर और ज्यादा खुबसूरत दिख सके. सुनीता बताती हैं कि तस्वीर में टच फीलिंग लाने के लिए उन्होंने यह शुरू किया. आज उनकी बनायी तस्वीरें दिल्ली, कोलकाता, मुंबई एवं हैदराबाद जैसे महानगरों की शोभा बढ़ा रही हैं. इसके जरिये वह अपने बचपन के शौक को पूरा कर रही हैं.

अपने घर से हुई शुरुआत
सुनीता बताती हैं कि वो जो पेंटिंग बनाती हैं कि उसमें सोहराई पेंटिंग की झलक होती है, लेकिन उसमें टच फीलिंग देने के लिए वो उसमें क्ले भरती हैं, जो डोकरा आर्ट के तहत आता है. उनकी बनायी गयी पेंटिंग दोनों कला का मिश्रण है. इस कारण वह अपनी पेंटिंग को डोकरा आर्ट का नाम देती हैं. 10-11 वर्ष की उम्र से ही सुनीता अपने घर की दीवारों पर सोहराई पेंटिंग करती थीं. शादी ब्याह और त्योहार के मौके पर पहले दीवार पर सजावट के लिए पेंटिंग बनायी जाती थी. इसमें प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल होता था. लाल मिट्टी, सफेद मिट्टी और काली मिट्टी का इस्तेमाल रंग के लिए होता था. अब मिट्टी की दीवार भी नहीं रही और ना ही रंग के लिए मिट्टी मिलती है. सुनीता बताती हैं कि 14 वर्ष की उम्र में ही उनका विवाह हो गया था, जिसके बाद पेंटिंग का उनका शौक पीछे छूट गया था.

चाहती थीं कुछ अलग करना
सुनीता बताती हैं कि उन्हें दूसरी महिलाओं की तरह अचार बनाना या सिलाई करना पसंद नहीं था. वो कुछ अलग करना चाहती थीं. कला केंद्र भवन में इनकी मुलाकात विनीता तिर्की से हुई. विनीता से सुनीता ने सोहराई पेंटिंग और डोकरा आर्ट के बारे में जाना और बनाना शुरू कर दिया. पिछले दो साल से सुनीता विभिन्न जिलों में आयोजित मेले में जाकर अपनी पेंटिंग की बिक्री करती हैं. इससे उन्हें एक अलग पहचान मिली है.

स्केचिंग नहीं, सीधे पेंट करती हैं
आमतौर पर पेंटिंग करने से पहले कैनवास पर स्केचिंग की जाती है, लेकिन सुनीता कभी भी स्केचिंग नहीं करती हैं, सीधे पेंट करती हैं. उनकी दो पोतियां भी उनके साथ पेंटिंग में हाथ बंटाती हैं. सुनीता बताती हैं कि शायद वो रांची की इकलौती ऐसी महिला हैं जो इस तरह की पेंटिंग बनाती हैं. पेंटिंग में टच फीलिंग के लिए बनाया गया उभार उनकी पेंटिंग को खास बनाता है.

नयी पीढ़ी को प्रकृति से परिचय कराना है : सुनीता बागवार
सुनीता बताती हैं कि डोकरा आर्ट में वो पूरी तरह प्रकृति और झारखंड की संस्कृति को दिखाती हैं. सिर्फ प्रकृति से जुड़ी पेंटिंग बनाने के पीछे उनका मकसद यह है कि आज की नयी पीढ़ी भी प्रकृति के बार में समझे और जाने कि गांव पहले किस तरह के होते थे. खेती कैसे होती थी. हमारी संस्कृति कैसी थी. वह बताती हैं कि अगर उन्होंने पेंटिंग नहीं अपनायी होती तो आज वो एक आम महिला की तरह जिंदगी गुजार रही होतीं, लेकिन आज उनकी पेंटिंग देखने और खरीदने के लिए बड़े-बड़े अधिकारी आते हैं. यह सिर्फ पेंटिंग से संभव हो सका है. इस कार्य में सरकार की ओर से पूरा सहयोग मिलता है. मेला लगने पर आने जाने से लेकर दुकान का खर्च तक सरकार वहन करती है. वर्ष 2018 में राज्यपाल द्वारा बेस्ट देसी भोजन के लिए सुनीता को पुरस्कृत किया गया है.