mehmaan panna

  • Apr 2 2019 5:49PM

झारखंड में आज भी स्कूल से बाहर हैं 2.60 लाख बच्चे

झारखंड में आज भी स्कूल से बाहर हैं 2.60 लाख बच्चे


पंचायतनामा डेस्क

लीड्स के निदेशक एके सिंह ने कहा कि आज भी दो लाख साठ हजार बच्चे स्कूल से बाहर हैं. पूर्व में जब स्कूलों की संख्या में बढ़ोतरी हुई थी, तब बच्चों के ड्रॉप आउट की संख्या में काफी कमी आयी थी. स्कूलों के विलय करने के बाद बच्चों के ड्रॉप आउट की संख्या बढ़ गयी है. उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में देश के दक्षिण हिस्से के राज्य काफी अच्छा कर रहे हैं, जबकि पूर्वी भारत में शिक्षा की स्थिति अच्छी नहीं है. यह बातें उन्होंने रांची में आयोजित झारखंड में शिक्षा में असमानता विषयक कार्यशाला में कहीं. इस कार्यशाला में वरिष्ठ पत्रकार मधुकर, सत्य प्रमाणिक, सच्चिदानंद, मानस दास समेत अन्य ने विचार रखे.

महज एक शिक्षक के भरोसे हैं एक चौथाई स्कूल
लीड्स के आशुतोष जायसवाल ने कहा कि राज्य में आदिवासी समुदाय की जनसंख्या लगभग 26 प्रतिशत है. इनकी साक्षरता दर 57 प्रतिशत है, जबकि राज्य की शिक्षा दर 66.41 फीसदी है. राज्य में लगभग 84 फीसदी सरकारी विद्यालय हैं, जिनमें 75 प्रतिशत बच्चे पढ़ते हैं. झारखंड के एक चौथाई स्कूल ऐसे हैं, जो एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं.

प्रयोगशाला बना दी गयी प्राथमिक शिक्षा
प्राथमिक शिक्षक संघ के संजय सिंह ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा को प्रयोगशाला बनाकर रख दिया गया है. पहले बुनियाद, फिर प्रयास और उसके बाद ज्ञान सेतु चल रहा है. आंगनबाड़ी में तीन से छह साल के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के लिए तैयार करना था, लेकिन पांच से छह साल के बच्चों के लिए स्कूल में ही शिशु सदन खोल दिया गया, लेकिन कोई अतिरिक्त शिक्षक नहीं दिया गया. आंगनबाड़ी सेविका को प्रशिक्षण देकर योग्य बनाने की जरूरत है.

बेहतर मानव संसाधन तैयार करने की जरूरत
सिटीजन फाउंडेशन के निदेशक गणेश रेड्डी ने कहा कि मौजूदा वक्त में बेहतर मानव संसाधन तैयार करने की जरूरत है. यह समय की मांग है. इसके लिए अच्छी शिक्षा व्यवस्था होनी चाहिए.