mehmaan panna

  • Aug 19 2019 5:26PM

अगली पीढ़ी के लिए जल बचायें

अगली पीढ़ी के लिए जल बचायें

रघुवर दास, मुख्यमंत्री, झारखंड 

सहभागी लोकतंत्र के सहभागी परिवेश में हर आदमी की भूमिका अहम होती है. हम एक ऐसे समाज में रहते हैं, जहां हर कोई जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभाता है. सहभागिता का अर्थ एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ देना और एक-दूसरे की मदद करना है. यही इस सरकार का मूलमंत्र भी है. पिछले ही दिनों विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया. हमारे राज्य में आदिवासी समाज के लोगों के साथ-साथ हम सभी ने इस दिवस पर अपने कल को संवारने का संकल्प लिया. हमारी संस्कृति हमें अपने ऊपर गर्व करने का अवसर देती है. विश्व में जब आदिवासी समुदाय अपने भविष्य के लिए नये-नये प्रतिमान गढ़ने में लगा है, तो हमें भी अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए अपने राज्य और समाज के लिए जी-जान से जुटना होगा. सभी को साथ लेकर चलना होगा. जो हाशिये के लोग हैं, उनकी मदद करनी होगी. उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए हम जहां भी हैं, वहीं से प्रयास करना होगा

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हमारी सरकार ने आदिवासी कल्याण को लेकर कई कदम उठाये हैं. बच्चों और युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर जुटाना हमारी प्राथमिकता है. पहले देखा जाता था कि स्कूल में बच्चों का ठहराव कम होता था. इसका कारण था कि जागरूकता की कमी थी. शिक्षा का महत्व क्या है, इसे समझना जरूरी है. जब हमने स्कूली बच्चों के ड्रॉप आउट रोकने के प्रयास किये. बच्चों को स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं जैसे उनके बैठने के लिए बेंच-डेस्क, समय पर कक्षा की किताबें, उनके घर से विद्यालय आने-जाने के लिए साइकिल की व्यवस्था, स्कूलों में शौचालय एवं पीने का पानी आदि उपलब्ध कराना शुरू किया, तो आश्चर्यजनक रूप में राज्यभर में विद्यालयों में ड्रॉप आउट की दर गिर गयी. गांव-गांव जाकर सहिया बहनों एवं शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों एवं शिक्षकों ने लोगों से मिल कर शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया, तब लोगों ने अपने बच्चों की शिक्षा पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू किया. यह समस्या अब धीरे-धीरे काफी हद तक दूर हो गयी है. जागरूकता तो इतनी आयी है कि अब बच्चियां पढ़ाई करने के लिए समय से पहले परंपरागत तरीके से होनेवाले विवाह से भी इनकार कर देती हैं. वे अपने माता-पिता से कहती हैं कि पहले पढ़ूंगी फिर आगे विवाह की बात सोचूंगी. यह एक बहुत बड़ा बदलाव है, जिसे हम अपनी आंखों के सामने पूरा होते हुए देख रहे हैं. इस बदलाव से मुझे काफी संतोष होता है.

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सरकार ने व्यापक स्तर पर उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि जिन स्थानों पर मानकी, मुंडा एवं ग्राम प्रधान के पद रिक्त हैं, वहां सीएनटी एवं एसपीटी एक्ट के प्रावधानों के तहत नियुक्ति की जाये. यह काम अविलंब करने को कहा गया है. इसके अलावा डाकुआ, परगनैत, पराणिक, जोगमांझी, कुड़ाम सहित अन्य परंपरागत ग्राम प्रधानों को सम्मान राशि के भुगतान में जहां परेशानी आ रही है, वहां मानकी, मुंडा या ग्राम प्रधान के माध्यम से और जहां ये भी नहीं हैं, वहां मुखिया से सत्यापित करा कर परंपरागत ग्राम प्रधानों को चिह्नित करने को कहा गया है. उनकी सूची बनायी जा रही है. राज्य के सभी अंचलों में लगान व सेस के ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था लागू है. इस व्यवस्था से पूर्व कोल्हान एवं संताल परगना प्रमंडल में मानकी, मुंडा एवं ग्राम प्रधान द्वारा लगान की वसूली की जाती थी. इसलिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने पर इन ग्राम प्रधानों को टैबलेट मुहैया कराये गये हैं, ताकि वसूली का काम पारदर्शी तरीके से और बिना किसी झंझट के हो सके. उन्हें इसका प्रशिक्षण भी दिया गया है और मुझे संतोष है कि यह व्यवस्था अब सुचारू रूप से चल रही है. उनकी सम्मान राशि में वृद्धि कर मानकी को तीन हजार रुपये, मुंडा एवं ग्राम प्रधान को दो हजार रुपये प्रतिमाह देने का निर्णय लिया गया है. इसके अलावा राज्य में लगभग 27,043 परंपरागत ग्राम प्रधानों को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सम्मान राशि दी जा रही है. इसके लिए 12.19 करोड़ रुपये की राशि जिलों को उपलब्ध करा दी गयी है.

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सहभागिता से क्रांति की ओर एक और शुरुआत हुई आरा-केरम गांव से. इसकी तस्वीर अब बदल गयी है. आदर्श ग्राम आरा-केरम के ग्रामीणों को राज्य सरकार ने जरा-सा हौसला दिया और उन्होंने अपने गांव की तकदीर ही बदल दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों मन की बात कार्यक्रम में इस गांव का नाम लिया. इस गांव के ग्रामीणों ने जल प्रबंधन के क्षेत्र में मिसाल कायम की है, जिसकी प्रधानमंत्री ने भी सराहना की है. यहां के लोगों ने श्रमदान से पहाड़ से गिरते झरने को दिशा देकर मिट्टी का कटाव और फसलों की बर्बादी रोकी. इन प्रयासों से इलाके का जलस्तर तेजी से बढ़ा है. इसके पूर्व प्रधानमंत्री ने हजारीबाग की लुपुंग पंचायत के मुखिया की तारीफ की थी. इन दिनों जल संरक्षण को लेकर पूरे देश में और अपने राज्य में भी गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं. जल संरक्षण किये बिना हम अपने भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकते. दुनिया भर में जल संकट तेजी से पसरता जा रहा है. अगर आज हमने जल संरक्षण की दिशा में काम नहीं किया, तो आनेवाले दिन काफी मुश्किल भरे हो सकते हैं. मुझे इस बात का संतोष है कि राज्य में जल संरक्षण अब आंदोलन का रूप ले रहा है. यहां का हर नागरिक जल संरक्षण को लेकर जागरूक है. सरकार ने पिछले दो साल में तीन लाख से अधिक डोभा निर्माण एवं जलाशयों का निर्माण कराया है. इसके सुखद परिणाम सामने आये हैं. इस साल कम वर्षा के बावजूद कई गांवों में जलस्तर कम नहीं हुआ और सिंचाई के लिए किसानों के पास पानी की उपलब्धता है. जल संरक्षण सिर्फ सरकार के स्तर पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर से भी होना चाहिए. हम सभी का कर्तव्य है कि पानी बचायें, ताकि हमारी अगली पीढ़ी के लिए पानी उपलब्ध रहे.