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  • Oct 18 2016 11:23AM

सही मुद्दों पर न्यायालय को लिखी आपकी चिट्ठी भी बन जाती है जनहित याचिका

सही मुद्दों पर न्यायालय को लिखी आपकी चिट्ठी भी बन जाती है जनहित याचिका
जनहित से जुड़े व्यापक महत्व के मुद्दे को हल करने में जनहित याचिका यानी पीआइएल एक कारगर हथियार है. यह एक ऐसा टूल्स है, जो व्यापक संसाधन व व्यापक स्तर पर किये गये डॉक्यूमेंटेशन के बिना भी आपके हितों की रक्षा में सहायक होता है. हर नागरिक को संविधान की ओर से छह मूलभूत अधिकार मिले हैं. 
 
जिसमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के खिलाफ अधिकार, संस्कृति और शिक्षा का अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार और मूल अधिकार पाने का रास्ता मुख्य है. यदि कोई व्यक्ति पीड़ित है परंतु उसमें न्यायालय में न्याय के लिए जाने की क्षमता नहीं है तो वैसी स्थिति में अन्य व्यक्तियों तथा स्वैच्छिक संगठनों की यह अधिकार है कि वे पीड़ित व्यक्ति के बदले न्याय के लिए न्यायालय में याचिका पेश कर सकते हैं. यह व्यवस्था देश के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए उपलब्ध करायी गयी है जिससे उन्हें न्याय मिल सके.
 
कहां करें याचिका दाखिल 
 
भ्रष्टाचार के खिलाफ कारगर लड़ाई लड़ने में पीआइएल काफी सहायक सिद्ध हो रहा है. अगर किसी नागरिक के किसी भी मूल अधिकार का हनन हो रहा हो तो उच्च या सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर मूल अधिकार की रक्षा का गुहार लगा सकता है. 
 
अनुच्छेद 226  के तहत पहले उच्च न्यायलय में याचिका डाल कर न्याय की गुहार लगायी जा सकती है, यहां से याचिका खारिज होने की स्थिति में अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जा सकता है. हालांकि कई बार मामला व्यापक जनहित से जुड़ होता है, तो ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय सीधे भी पीआइएल पर अनुच्छेद 32 के तहत ही सुनवाई करता है. आपको बता दें कि व्यापक जनहित के मुद्दों पर ही जनहित याचिका डाली जाती है. साथ ही याचिकाकर्ता को यह भी बताना पड़ता है कि कैसे उस मामले में आमलोगों का हित जुड़ा है.
 
ऐसे दाखिल करें याचिका
 
पत्र के माध्यम से कोई भी व्यक्ति आम आदमी से जुड़े मामले उच्च या सर्वोच्च न्यायालय में प्रेषित करता है तो न्यायालय यह सुनिश्चित करता है कि दाखिल की गयी याचिका सही में आम आदमी से जुड़ी है या नहीं. न्यायालय के संतुष्ट होने की स्थिति में जारी पत्र को पीआइएल के तौर पर सुनवाई  के लिए लिया जाता है. पत्र उच्च या सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखा जाता है. वहीं सुनवाई के दौरान अगर याचिकाकर्ता के पास वकील नहीं होता है, तो एेसी स्थिति में न्यायालय वकील भी मुहैया करा सकता है.
 
अटपटे याचिका पर
 
पिछले कुछ वर्षों में उच्चतम न्यायालय में भारत का नाम बदलकर हिंदुस्तान करने, अरब सागर का नाम परिवर्तित कर सिंधु सागर रखने और यहां तक कि राष्ट्रगान को बदलने तक के लिए जनहित याचिकाएं दाखिल हो चुकी है, हालांकि अदालत ने इन्हें हस्तक्षेप करने वालों की संज्ञा दे चुकी है और कई बार इन याचिकाओं को खारिज करने का डर भी दिखाया जा चुका है.
 
लोकायुक्त 
 
भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से झारखंड में भी वर्ष 2001 में लोकायुक्त कानून को पारित कर 4 दिसंबर 2004 से कार्यान्वित किया गया. झारखंड के लोकायुक्त से भी भ्रष्टाचार संबंधी शिकायत की जा सकती है. इसके लिए याचिकाकर्ता लोकायुक्त कार्यालय में पत्र के माध्यम से शिकायत भेज सकते हैं.
 
निगरानी
 
भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से झारखंड में निगरानी विभाग काफी सक्रिय है. अगर अापसे कोई रिश्वत मांगे या फिर देने की पेशकश करे तो आप सीधे निगरानी ब्यूरो में इसकी शिकायत कर सकते हैं.  इस दौरान शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है. हाल के दिनों में आपने देखा होगा कि निगरानी ने कई लोगों को गिरफ्तार भी किया है. 
 
लोकायुक्त के अधिकार
 
लोकायुक्त के पास किसी मामले में जांच एजेंसी के निरीक्षण करने और उसे निर्देश देने का अधिकार है.
कार्यालय का पता 
 
ओल्ड जेल रोड, रांची- 834001. 
फोन नंबर- 0651-2563056. फैक्स- 2563075
ई-मेल- lokayukta-jhr@nic.in 
इस संस्था में मुखिया से लेकर प्रशासनिक अधिकारी, राजनेता तक की शिकायत आप बेधड़क कर सकते हैं. 
इन नंबरों व पते पर कर सकते हैं शिकायत-
अपर पुलिस महानिदेशक
पता : निगरानी ब्यूरो, आड्रे हाउस, रांची
फोन : 0651–2281530(कायार्लय), 2281570 (फैक्स), 2540502 (आवास)
मोबाइल नंबर : 9431172045
 
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ)
 
सीबीआइ भारत सरकार की प्रमुख एजेंसी है, जो भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करती है. यह आपराधिक एवं राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हुए विभिन्न प्रकार के मामलों की जांच करने के लिए लगायी जाती है. सीबीआइ राज्य सरकार के निर्देश, उच्चतम व उच्च न्यायालय के अादेश पर ही काम करती है.
 
हालांकि इसका संगठन अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन से मिलता-जुलता है लेकिन इसके अधिकार एवं कार्यक्षेत्र एफबीआइ की तुलना में बहुत सीमित है. हालांकि भारत के लिए सीबीआइ ही इंटरपोल की आधिकारिक इकाई भी है. सीबीआइ किसी भी छद्म नाम से शिकायतों की सुनवाई नहीं करता. ऐसे में आप सीबीआइ के पास शिकायत कर भ्रष्टाचार काे दूर करने में मददगार साबित हो सकते हैं. सीबीआइ को आप पत्र लिखकर, मेल कर या फोन कर शिकायत कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आपको अपना वास्तविक परिचय और पूरी स्थिति बताकर कर सकते हैं.
 
इन 
 
स्थानों पर करें शिकायत
पता- एसीबी रांची 2, बूटी रोड, रांची- 834008
फोन : 0651-2360093, मोबाइल : 9470590421
ई-मेल: hobacrnc@ cbi.gov.in 
पता- इओडब्ल्यू रांची, सीबीआइ काली बाबू स्ट्रीट, रांची- 834001.
फोन: 0651-2213888, 2213030 मोबाइल: 94317 06804/05.
ई-मेल : hobeornc@cbi.gov.in
पता- एसीबी धनबाद, VII/2, कार्मिक भवन, पीओ: आइएसएम कैंपस, धनबाद. फोन नंबर : 0326-2204455, 2203106. मोबाइल : 9431123033, 9431706808
ई मेल: hobacdnd@cbi.gov.in