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  • Feb 1 2019 6:35PM

शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से ही रुकेगा बाल विवाह

शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से ही रुकेगा बाल विवाह

पंचायतनामा डेस्क

बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है. बाल विवाह रोकने के लिए सरकार, सरकारी संस्थाएं और कई गैर सरकारी संस्थाएं कार्य कर रही हैं. इसके बावजूद झारखंड बाल विवाह मुक्त नहीं हो सका है. कई संस्थाएं सिर्फ खानापूर्ति कर रही हैं. झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग बाल विवाह को पूरी तरह से खत्म करने को लेकर प्रतिबद्ध है

शहरी क्षेत्रों में भी बाल विवाह का होना चिंताजनक
आयोग त्वरित कार्रवाई करते हुए बाल विवाह को रोकने का कार्य करता है. लेकिन, उसके बाद का फॉलोअप नहीं हो पाता है. इसके कारण रेस्क्यू करके लाये जाने के बाद फिर से उन बच्चियों की शादी हो जाती है. सिर्फ गांव ही नहीं कई शहरों में भी बाल विवाह के मामले सामने आते हैं, जो चिंता का विषय है.

गांवों में जागरूकता और शिक्षा का अभाव
बाल विवाह जैसी कुप्रथा झारखंड के गांवों में हावी है. गरीबी, अशिक्षा, जागरूकता का अभाव और सामाजिक ताना-बाना इसके प्रमुख कारण हैं. गांवों में बच्चों की सुरक्षा के लिए ग्राम स्तरीय बाल सुरक्षा समिति का गठन किया गया है, पर यह सिर्फ कागजों तक ही सीमित है. यहां तक कि इस समिति के सदस्यों को भी इसकी जानकारी नहीं है. अब राज्य बाल संरक्षण आयोग के प्रयास से सभी स्तर की समितियों को सक्रिय करने का प्रयास किया जा रहा है. पंचायत प्रतिनिधियों व महिला समूह की सदस्यों को भी इससे जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि समय रहते सूचना मिल सके.

सभी विभागों को मिल कर कार्य करना होगा
बाल विवाह रोकने और बच्चों के अधिकारों का हनन नहीं हो, इसके लिए सभी विभागों को एक साथ मिल कर कार्य करना होगा. शिक्षा विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज विभाग और स्वास्थ्य विभाग जैसी संस्थाओं को एक साथ काम करना होगा, क्योंकि अक्सर यह देखा जाता है कि बाल- विवाह के चंगुल से रेस्क्यू की गयी बच्चियों को वापस घर तो भेज दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद उसकी फिर से शादी करा दी जाती है. बच्ची को बचाने के बाद उसके रहने-खाने, पढ़ने-लिखने का इंतजाम सही तरीके से नहीं हो पाता है, क्योंकि विभागों के बीच समन्वय का अभाव है.

नुक्कड़ नाटक, दीवार लेखन के जरिये जागरूकता लाने का प्रयास
आयोग के द्वारा समय-समय पर गांवों में दीवार लेखन और नुक्कड़ नाटकों के जरिये ग्रामीणों में बाल विवाह को लेकर जागरूकता लाने का प्रयास किया जाता है, हालांकि कई बार तो ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनके ऊपर कानून को बचाने की जिम्मेदारी होती है, वो खुद ही बाल विवाह के मामले में संलिप्त होते हैं. कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों के संरक्षण की भी बात सामने आयी है. शादी-विवाह में शामिल ब्राह्मण, मौलवी, बैंड बाजा, टेंट हाउस, फोटोग्राफर आदि को समय-समय पर निर्देश दिया जाता है कि वो उन शादियों का बहिष्कार करें, जब लड़का या लड़की नाबालिग हों.

बाल विवाह पर रोक के लिए यहां दें सूचना
बाल विवाह की जानकारी मिले, तो 100 या 1098 पर फोन कर जानकारी दे सकते हैं. झारखंड राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष के मोबाइल नंबर 9546516884 एवं कार्यालय अवधि में 0651-2223544, 0651-2223545, 0651-2223546 पर संपर्क कर सकते हैं.