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  • Aug 2 2018 4:42PM

वज्रपात की भविष्यवाणी व जागरूकता पर हो जोर

वज्रपात की भविष्यवाणी व जागरूकता पर हो जोर

 पंचायतनामा डेस्क

झारखंड की भौगोलिक स्थिति के कारण यहां ज्यादा वज्रपात या आकाशीय बिजली (ठनका) गिरने की घटनाएं होती हैं. वज्रपात की भविष्यवाणी की पुख्ता व्यवस्था हो और जन-जन को जागरूक करने की तत्परता दिखाई जाये, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, तो बड़ी संख्या में लोगों की जानें बचायी जा सकती हैं.

राज्य में हर साल करीब ढाई सौ लोगों की होती है मौत
झारखंड में (बिजली) ठनका के रूप में आसमान से मौत बरसती है. इससे हर साल करीब 250 लोगों की मौत आसमान से बिजली गिरने से हो जाती है. साल 2017 में बिजली गिरने से तीन सौ से अधिक लोगों की मौत हुई थी. साल 2018 में वज्रपात से अब तक 110 लोगों की जान जा चुकी है.

देश में हर साल 2200 लोगों की जाती है जान
वज्रपात से हर साल देशभर में करीब 2200 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है. वर्ष 2017 में 3500 लोगों की मौत हुई थी. ओड़िशा में इससे सर्वाधिक लोगों की मौत होती है. यहां प्रतिवर्ष 400-450 लोग वज्रपात से मर जाते हैं. वर्ष 2017 में ठनका गिरने से 500 लोगों की मौत हुई थी.

वज्रपात की पूर्व सूचना देने वाला यंत्र लगाना होगा कारगर
झारखंड, बिहार, ओड़िशा, आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में वज्रपात काल बनकर लोगों पर गिरता है और उनकी जान ले लेता है. ऐसे में वज्रपात की पूर्व सूचना देने वाला यंत्र लगाया जाना बेहद जरूरी है. सुरक्षित क्षेत्र तैयार करने की जरूरत है. इसी क्रम में देवघर बाबाधाम समेत अन्य खास जगहों पर लाइटनिंग अरेस्टर लगाया गया है.

ये जिले हैं वज्रपात प्रभावित
झारखंड में पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम, रांची, चतरा, हजारीबाग व रामगढ़ समेत अन्य जिले इससे काफी प्रभावित हैं. यहां सार्वजनिक स्थलों पर हर हाल में तड़ित चालक लगाये जाएं. वैज्ञानिकों के माध्यम से वज्रपात की भविष्यवाणी और इससे बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाये, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में, तो काफी हद तक लोगों के जीवन की रक्षा हो सकेगी.

वज्रपात को गंभीरता से लेने की जरूरत : कर्नल संजय श्रीवास्तव
इसरो के मल्टी हजार्ड वार्निंग प्रोजेक्ट के सदस्य व आपदा प्रबंधन तथा जलवायु परिवर्तन मामलों के विशेषज्ञ कर्नल संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि वज्रपात को गंभीरता से लेने की जरूरत है. जानकारी का अभाव और भविष्यवाणी की सुविधा नहीं होने के कारण वज्रपात की चपेट में आने से न केवल इंसानों की मौत हो रही है, बल्कि जानवरों को भी जान गंवानी पड़ रही है. वज्रपात से बचाव को लेकर पुख्ता कदम उठाएं जाएं, तो बेशकीमती जान-माल की रक्षा हो सकती है.