ssakshtkaar

  • Apr 16 2018 3:30PM

सजग होंगे पंचायत प्रतिनिधि, तो समृद्ध होगी पंचायत

सजग होंगे पंचायत प्रतिनिधि, तो समृद्ध होगी पंचायत

झारखंड में पंचायती राज व्यवस्था को लागू हुए महज सात साल हुए हैं, लेकिन इसके खाते में कई सफलताएं दर्ज हैं. राज्य सरकार पंचायतों को मजबूत करने की दिशा में प्रयासरत है. इसके लिए जरूरी सभी कदम उठाये जा रहे हैं. राज्य की कई पंचायतों के प्रतिनिधि बेहतर कार्य कर रहे हैं. उनकी लगन व मेहनत से पंचायत की तस्वीर बदलने लगी है. इससे अन्य पंचायत प्रतिनिधियों को प्रेरणा लेने की जरूरत है. पंचायत प्रतिनिधि जागरूक व सजग होंगे, तभी गांव की सरकार सशक्त होगी. इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों को बेहतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है. मास्टर ट्रेनर तैयार कर प्रशिक्षण व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है. सरकार की हर संभव कोशिश है कि झारखंड की पंचायतें मजबूत बनें. पंचायती राज विभाग के निदेशक वीरेंद्र भूषण से पंचायतनामा ने विशेष बातचीत की


पंचायतों को दी जा रही है राशि
झारखंड की पंचायतों को राशि दी जा रही है. केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2015 में ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) की शुरुआत की गयी थी. हर राज्य में इसका अलग-अलग नाम है. झारखंड में इसका नाम हमारी योजना, हमारा विकास है. 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा के आलोक में वर्ष 2015 से पंचायतों को राशि दी जा रही है. इस राशि के सदुपयोग को लेकर जीपीडीपी की परिकल्पना की गयी थी. दो वित्तीय वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 के लिए योजना बनायी गयी थी. अब इसे बढ़ा कर वित्तीय वर्ष 2019-20 तक कर दी गयी है.

19
वें पायदान पर था झारखंड
पंचायती राज मंत्रालय, भारत सरकार हर वर्ष पंचायतों का मूल्यांकन कराता है. इसमें झारखंड बेहतर स्थान पर रहा. वित्तीय वर्ष 2015-16 में झारखंड पूरे देश में 19वें पायदान पर रहा था. पांच साल के छोटे सफर के बावजूद ये उपलब्धि सुकून देती है. पंचायतों की बेहतरी के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है.

पंचायत प्रतिनिधियों के प्रशिक्षण की है व्यवस्था
पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया जाता है. इसके लिए उन्हें पंचायत की बेहतरी के लिए जरूरी सभी जानकारियां दी जाती हैं. इसका असर भी पंचायतों में दिखने लगा है. पंचायत प्रतिनिधि जब जागरूक होंगे, तभी विकास योजनाएं धरातल पर उतरेंगी. उनके पास विजन होगा, तो पंचायतें विकास के साथ कदमताल कर सकेंगी. वित्तीय वर्ष 2017-18 में 4400 वार्ड सदस्य, 3800 मुखिया, 2021 पंचायत सचिव, 3852 पंचायत समिति सदस्य और 28 जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को प्रशिक्षण दिया गया है. प्रशिक्षण देने की यह प्रक्रिया जारी है.

तैयार हो रहे हैं मास्टर ट्रेनर
प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किये जा रहे हैं. देश का पहला राज्य है झारखंड, जहां मास्टर ट्रेनर को तैयार किया जा रहा है. अब तक करीब 150 मास्टर ट्रेनर तैयार हो चुके हैं. इनमें से अधिकतर पंचायत, ब्लॉक व जिला स्तर पर पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित भी कर रहे हैं. इससे प्रशिक्षण देने में आसानी हो रही है. पंचायत प्रतिनिधियों को भी स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण लेने में काफी सुविधा हो रही है. एनआइआरडी (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट) की ओर से मास्टर ट्रेनर्स का असेस्मेंट भी किया जाता है. इसके बाद इनकी ग्रेडिंग की जाती है. सुखद पक्ष है कि रांची के हेहल नॉर्थ कैंपस स्थित केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षित अधिकतर मास्टर ट्रेनर्स को ए ग्रेड मिला है.

प्रशिक्षण से बढ़ी है जागरूकता
पंचायत प्रतिनिधियों में प्रशिक्षण से जागरूकता बढ़ी है. नये-नये पंचायत प्रतिनिधियों को पंचायती राज व्यवस्था की कोई खास जानकारी नहीं होती है. इससे उन्हें काफी परेशानी होती है. उन्हें अपनी शक्ति की भी जानकारी नहीं होती है. प्रशिक्षण के बाद डॉक्यूमेंटेशन और विकास योजनाओं समेत अन्य पहलुओं से वह अवगत हो पाते हैं. सक्षम और सशक्त पंचायत के लिए पंचायत प्रतिनिधि का सजग होना बेहद जरूरी है.

पुरस्कृत कर बढ़ाया जाता है मनोबल
राज्य की कई पंचायतों के पंचायत प्रतिनिधियों ने बेहतर कार्य किया है. विकास योजनाओं को ससमय धरातल पर उतारा है. इससे न सिर्फ इलाके में उनकी लोकप्रियता बढ़ी है, बल्कि पंचायती राज विभाग ने भी उनके कार्य को सराहा है. यही वजह है कि उन पंचायत प्रतिनिधियों को पुरस्कृत किया जाता रहा है.