ssakshtkaar

  • Oct 31 2016 7:51AM

मेहमान का पन्ना

मेहमान का पन्ना
लोगों की बीच बढ़ी हकदारी
 
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के आने से
 
खाद्य सुरक्षा की बात होते ही सबसे पहले लोगों का ध्यान जन वितरण प्रणाली और उसकी व्यवस्था की विसंगतियों की ओर जाता है लेकिन पीडीएस व्यवस्था ही खाद्य सुरक्षा का आयाम नहीं है बल्कि इस कानून का व्यापक आयाम है. सरकार ने दो करोड़ 64 लाख लोगों के बीच राशन कार्ड वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित  किया है. 20 फीसदी संपन्न लोगों के बने राशन कार्ड को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गयी है लेकिन संपन्न लोगों की राशन कार्ड रखने की चाहत को देखते हुए सफेद राशन कार्ड बनाने की पहल भी शुरू की गयी है. अंत्योदय योजना में आने वाले लाभुकों के लिए पीला राशन कार्ड और पीएच लाभुकों के लिए गुलाबी राशन कार्ड बनाये गये हैं. नवंबर माह से राशन बायोमीट्रिक मशीन के ही माध्यम से वितरित होंगे. यह कहना है राज्य के खाद्य आपूर्ति, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले के मंत्री सरयू राय का. खाद्य सुरक्षा कानून की राज्य में स्थिति, जन वितरण प्रणाली में आने वाली परेशानियां और सरकार की योजनाओं के संदर्भ में मंत्री सरयू राय से समीर रंजन ने विशेष बातचीत की.
 
सवाल: खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की सरकार की योजना बतायें.जवाब: केंद्र सरकार ने वर्ष 2013 में खाद्य सुरक्षा अधिनियम को पारित किया. इससे पहले भी जन वितरण प्रणाली कार्यरत थी लेकिन लोगों को कोई अधिकार नहीं मिला था. कानून बनने के बाद लोगों को अपना हक मांगने का अधिकार मिला. लोग अपने हक के लिए खड़ा हो सकते हैं और अगर साबित हो जाये कि उसे अनाज नहीं मिला है तो सरकार उसे अनाज के दाम से एक रुपया अधिक की दर से मुआवजा देगी. इस कानून के आने से लोगों की बीच हकदारी बढ़ गयी. खाद्य सुरक्षा आंदोलन से जुड़े कई सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ इस संदर्भ में राय मशविरा की गयी. इस योजना के तहत लोगों के बीच पौष्टिक अनाज की उपलब्धता हो और इसके लिए अनाज के उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना होगा. राज्य में करीब 25 हजार राशन दुकानदार हैं. गांव-गांव में इनकी पहुंच है. ऐसी स्थिति में सरकारी नियंत्रण में बाजार की एक नयी व्यवस्था कायम कर सकते हैं. 
 
सवाल: पीडीएस व्यवस्था अपने उद्देश्यों में सफल हो पायी है?
 
जवाब: अधिनियम बनने और मशीनों के आने के बाद पीडीएस तंत्र में व्यापक परिवर्तन हुआ है. केंद्र सरकार के निर्देशानुसार राज्य की कुल जनसंख्या के 80 फीसदी लोगों को सस्ते दर पर अनाज मुहैया कराने की व्यवस्था की है. इसके भी दो भाग किये गये. ग्रामीण क्षेत्रों की 86.4 प्रतिशत लोगों को अनाज देने की व्यवस्था की गयी वहीं शहरी क्षेत्रों में 60.2 प्रतिशत लोगों को अनाज देने की व्यवस्था की गयी. ऐसी स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में सिर्फ 14 फीसदी लोग ही अनाज से वंचित रहें. पहले वाले व्यवस्था के कारण ही पीडीएस तंत्र में कई विसंगतियां देखने को मिली. पहले के बने राशन कार्ड में कई गड़बड़झाला सामने आये. मंत्री बनने के बाद गड़बड़झाला रोकने के लिए कई सार्थक कदम उठाये. राशन कार्ड सही लाभुकों का बने इसके लिए दो मानक तय किये गये, अपवर्जन और समावेशन मानक. 
 
आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को अपवर्जन मानक में रखा गया और सही लाभुकों को समावेशन मानक में रखा गया. कई विसंगतियों को दूर करते हुए एक बार फिर नये राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई. इस दौरान पहले की अपेक्षा कम शिकायतें मिली. सरकार दो करोड़ 64 लाख लोगों के बीच राशन कार्ड वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित की है. 20 फीसदी संपन्न लोगों के बने राशन कार्ड को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गयी है लेकिन संपन्न लोगों की राशन कार्ड रखने की चाहत को देखते हुए सफेद राशन कार्ड बनाने की पहल शुरू की है. इसके लिए 31 अक्तूबर 2016 तक आवेदन मांगी गयी है. अंत्योदय योजना के आने वाले लाभुकों के लिए पीला राशन कार्ड और पीएच लाभुकों के लिए गुलाबी राशन कार्ड बनाये गये हैं. राशन दुकानदारों का कमीशन बढ़ाया गया है, जहां पहले 26 पैसे प्रति किलोग्राम कमीशन था वहीं 47 पैसे और 80 पैसे से होते हुए अब एक रुपया प्रति किलोग्राम अनाज पर कमीशन दिया जा रहा है. साथ ही केरोसिन तेल पर भी कमीशन बढ़ाने की बात चल रही है. ऐसा इसलिए किया गया ताकि राशन दुकानदार भ्रष्टाचार और चोरी छोड़ अधिक से अधिक राशन लाभुकों के बीच वितरित कर सकें. हमारी कोशिश है कि गोदामों का तंत्र पंचायत स्तर पर विकसित हो ताकि बाजार में हस्तक्षेप करने का एक सार्थक उपकरण बन सकते हैं हमारे राशन दुकानदार.
 
सवाल: पीडीएस तंत्र में बायोमीट्रिक मशीन की क्या उपयोगिता है.
 
जवाब: डीलरों की मनमानी को रोकने और लाभुकों को सही मात्रा में अनाज मिले इस उद्देश्य को लेकर बायोमीट्रिक मशीन लगाने की योजना पर काम हुआ. इस मशीन को लेकर भी लिंक फेल और नेटवर्क नहीं रहने की शिकायतें मिली. इसको ध्यान में रखकर तीन तरह की व्यवस्था की गयी. इसके तहत नेटवर्क रहने वाले जगहों के लिए आॅनलाइन व्यवस्था की गयी. नेटवर्क नहीं रहने वाले जगहों के लिए आॅफलाइन अनाज देने की व्यवस्था की गयी, इसके तहत लाभुकों को राशन बायोमीट्रिक मशीन से ही मिलेगा लेकिन इसमें पीडीएस दुकानदार को सप्ताह में एक बार प्रखंड कार्यालय में डेटा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी. और तीसरी वैसी जगह जहां नेटवर्क कभी-कभार आता हो, वहां आॅनलाइन-आॅफलाइन की व्यवस्था की गयी है. उक्त तीनों प्रकार की व्यवस्था इसलिए सुनिश्चित की गयी है ताकि लाभुक राशन से वंचित नहीं रह जाए. इसके अलावा वैसे लाभुक जिनका बायोमीट्रिक मशीन में अंगुलियों के निशान का मिलान नहीं हो पाता, वैसे लाभुकों के लिए मोबाइल पर ओटीपी यानी वन टाइम पासवर्ड देने की व्यवस्था की गयी है और इसके आधार पर आप राशन लेने के हकदार होंगे.
 
कुष्ठ रोग से पीड़ित लाभुकों को पंचायत सेवक या वार्ड सदस्य द्वारा पहचान करने पर राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है. राशन दुकानदारों के लिए पहले की अपेक्षा अब कमीशन भी अधिक देने की व्यवस्था हुई है, जिसके कारण ही अब दुकानदार राशन वितरण में अधिक रुचि दिखाने लगे हैं. अब राज्य में नवंबर माह से राशन बायोमीट्रिक मशीन के ही माध्यम से वितरित होगा. अब कई दुकानदार आॅफलाइन से आॅनलाइन व्यवस्था में काम करने को आतुर दिख रहे हैं. राशन दुकानदारों की सोच में भी बदलाव आया है, जहां पहले वो राशन बचाना चाहता था, वहीं अब राशन अधिक से अधिक बांटना चाहते हैं ताकि उनको कमीशन अधिक मिल सके. 
 
सवाल: इलेक्ट्रॉनिक तराजू देनी की व्यवस्था क्या है?
 
जवाब: सरकार सभी राशन दुकानदारों को इलेक्ट्रॉनिक तराजू देने जा रही है. गोदामों में यह व्यवस्था शुरू की गयी है. राशन दुकानदारों के लिए जैप आइटी के माध्यम से निविदा निकाली गयी है. जल्द ही सरकार मशीन खरीदकर दुकानदारों को देगी. यह मशीन बायोमीट्रिक मशीन से जुड़ी रहेगी. इस तराजू की खासियत यह है कि पांच ग्राम से अधिक का अंतर आने पर मशीन रीड ही नहीं करेगा. आपको बता दें कि विभाग किसी भी सामानों की खरीद के लिए निविदा आमंत्रित नहीं करेगा. इसके लिए निदेशालय को जिम्मा सौंपा गया है. नमक और चीनी के लिए एनइएमएल के माध्यम से निविदा निकाली गयी. कम से कम बोली लगाने वाले को कार्य के लिए आमंत्रित किया गया है. 
 
सवाल: आपूर्ति श्रृखंला प्रबंधन की उपयोगिता बतायें.
 
जवाब: भ्रष्टाचार और चोरी पर लगाम लगाने के उद्देश्य से इस व्यवस्था को अपनाया गया है. इसके तहत राज्य सरकार के गोदामों से निकलने वाली गाड़ियों में जीपीएस की व्यवस्था करते हुए रूट तय कर दी गयी है. साथ ही जन प्रतिनिधियों समेत राशन उपभोक्ताओं को मोबाइल के माध्यम से आपूर्ति श्रृखंला प्रबंधन के तहत जोड़ा जा रहा है ताकि जब गोदाम से गाड़ियां डीलर के लिए निकले तो डीलर समेत उक्त जन प्रतिनिधियों और उपभोक्ताओं के मोबाइल पर एसएमएस आ जायेगा कि उक्त क्षेत्र के डीलर के पास अनाज पहुंच रहा है. 
 
सवाल: राज्य में मार्केटिंग ऑफिसर और प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी की क्या स्थिति है ?
 
जवाब: हमारे विभाग में मार्केटिंग ऑफिसर और प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों की बहुत कमी है. पूरे राज्य में मार्केटिंग ऑफिसर के 129 पद हैं लेकिन वर्तमान में मात्र 17 अधिकारी ही कार्यरत हैं. 
 
वहीं प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के 260 पद हैं लेकिन वर्तमान में 75 पदाधिकारी  ही कार्यरत हैं. पदाधिकारियों की कमी के कारण ही एक-एक पदाधिकारी तीन-चार प्रखंडों के प्रभार में रहते हैं. योग्य एमओ और बीएसओ का प्रमोशन किया गया है. सरकार गोदामों के आधुनिकीकरण पर भी विचार कर रही है. इस समस्या को देखते हुए इस कार्य का जिम्मा एनसीडीइएक्स को सौंपा गया है और जल्द ही कैबिनेट से पास होने की उम्मीद है. राजधानी रांची के कडरू गोदाम को भी पीपीपी मोड पर देने पर विभाग विचार कर रहा है. 
 
सवाल: जयपुर माॅडल क्या है और आपने क्या अनुभव प्राप्त किया ?
 
जवाब: जयपुर से पहले हैदराबाद और कोलकाता के पीडीएस व्यवस्था को देखने कामौका मिला. कोलकाता में जहां राशन दुकानदार राशन के अलावा अन्य 26 सामानों को बेचते हैं, वहीं हैदराबाद तो दो कदम आगे बढ़ते हुए बायोमीट्रिक मशीन को जनोपयोगी बनाते हुए इसे जन-धन योजना से भी जोड़ दिया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सके. अब यह माइक्रो एटीएम की तरह काम कर रहा है. 
 
जयपुर में तो राशन दुकानदार अपने दुकानों में सरकारी अनाज के अलावा करीब दो सौ सामानों को बेचते हैं. दुकान के साथ-साथ बेहतरीन आउटलेट बनाया जहां उक्त सामानों को सस्ते दर पर बेच रहे हैं, जिसके कारण यहां के दुकानदारों को महीने में करीब तीस हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है. इस योजना को झारखंड में भी लागू करने की इच्छा है ताकि यहां के उपभोक्ताओं को भी सस्ते दर पर सामान उपलब्ध हो सके. इस संबंध में बातचीत की प्रक्रिया शुरू हो गयी है.