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  • Feb 16 2017 9:02AM

युवाओं को स्वावलंबी बनाने में जुटा कौशल विकास मिशन

युवाओं को स्वावलंबी बनाने में जुटा कौशल विकास मिशन
राज्य के बेरोजगार एवं अप्रशिक्षित युवाओं को समुचित रोजगारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की गयी है. कौशल विकास का प्रशिक्षण प्राप्त कर युवाओं को राेजगार एवं स्वरोजगार की दिशा में झारखंड कौशल विकास मिशन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. राज्य के युवा आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनें, इसके लिए मिशन कार्य कर रहा है. युवाओं में कौशल विकास हो, इसके लिए मिशन ने 26 सेक्टर के 60 ट्रेडों में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की है. नि:शुल्क प्रशिक्षण के कारण कौशल विकास की ओर युवाओं का रूझान तो बढ़ा ही है. साथ ही दूसरे राज्यों के िलए पलायन करनेवाले युवाओं के पैर भी रूकने लगे हैं. 
 
समीर रंजन ने झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी का उद्देश्य, लक्ष्य, प्रशिक्षण और इसके फायदे के संबंध में मिशन के निदेशक रवि रंजन से विस्तार से बातचीत की. पेश है बातचीत का मुख्य अंश. झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी का उद्देश्य क्या है.
 
झारखंड सरकार के उच्च, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी का उद्देश्य राज्य में बेरोजगार युवाओं को कौशल विकास के माध्यम से सशक्त करते हुए उन्हें रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है. साथ ही प्रशिक्षण के उपरांत नियोजन उपलब्ध कराना व स्वरोजगार में युवाओं को सहयोग प्रदान करना है. साथ ही पाठ्यक्रमों में मानकीकरण लाने, ट्रेनिंग पार्टनर के भुगतान में समरूपता और प्रशिक्षित युवाओं को प्लेसमेंट देने में सहयोग प्रदान करना है. झारखंड में कौशल विकास की रूपरेखा क्या है.
 
राज्य के करीब 18 विभागों द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में अपने तरीके से कौशल का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. पूरे राज्य में कौशल प्रशिक्षण में समन्वय, गुणवत्ता नियंत्रण, आकलन संबंधी कार्यों में मानकीकरण करने के उद्देश्य से झारखंड में कौशल विकास मिशन सोसाइटी का गठन हुआ है. आगामी पांच साल में 20 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके तहत 12 लाख युवाओं को मिशन सोसाइटी अपने स्तर पर प्रशिक्षित करेगी और आठ लाख युवाओं को विभिन्न विभागों द्वारा प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित है. इस कार्यक्रम के तहत करीब 50 प्रतिशत युवाओं को रोजगार देने की व्यवस्था होगी और 20 प्रतिशत युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार किया जायेगा. 
 
कौशल विकास प्रशिक्षण क्या है इसके तहत युवाओं को ज्ञान, क्षमता एवं सोच के अनुसार उनका कौशल प्रशिक्षण करते हुए उन्हें रोजगार तथा स्वरोजगार के योग्य बनाना है. उक्त सभी क्षेत्रों का प्रशिक्षण राष्ट्रीय कौशल योग्यता फेमवर्क (एनएसक्यूएफ) पर आधारित है. युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में 200 घंटे से दो वर्ष तक का प्रशिक्षण दिया जाता है. 
 
राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) से क्या तात्पर्य है. राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क यानी एनएसक्यूएफ निरपेक्ष है. इसके तहत विभिन्न ट्रेडों का प्रशिक्षण एक समान दिया जाता है, जैसे- अगर कोई युवा पाइप लाइन यानी प्लंबिंग की ट्रेनिंग रांची में ले रहा हो, तो उसी तरह का प्रशिक्षण सिमडेगा में प्रशिक्षण ले रहे युवाओं को मिलेगा. इतना ही नहीं, इसी तरह का प्रशिक्षण दूसरे राज्यों में युवाओं को दी जाती है. इसके अलावा ट्रेनर की क्वालिटी भी सभी जगह एक समान होगी, तो इस तरह पूरे देश में एक समान ही कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है. एक समान कौशल प्रशिक्षण को देखते हुए झारखंड में भी इसे अपनाया गया है. इस प्रशिक्षण का लाभ कौन-कौन ले सकते हैं.
 
कौशल विकास प्रशिक्षण का लाभ राज्य के 18 से 35 साल के सभी युवा उठा सकते हैं. यह प्रशिक्षण नि:शुल्क है. इस प्रशिक्षण की सुविधा ड्राॅप आउट, अकुशल, अप्रशिक्षित, प्रशिक्षित व बेराजगार युवाओं को मिलेगी. 
 
आवासीय और गैर आवासीय ट्रेनिंग क्या है.
 
 मिशन की ओर से युवाओं को दो तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है. गैर आवासीय ट्रेनिंग वैसे युवाआें को दी जाती है जो केंद्र के आसपास रहते हो और हर दिन करीब छह घंटे का प्रशिक्षण लेकर वापस जा सकते हैं. वहीं आवासीय प्रशिक्षण वैसे युवाओं को दी जाती है, जिसमें दूर-दराज के गांवों से आने वाले युवा शामिल होते हैं. आवासीय प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के लिए रहने-खाने की व्यवस्था भी नि:शुल्क है. इसके अलावा एक बार आने-जाने का वाहन खर्च भी मिशन मुहैया कराती है. 
 
अन्य विकास योजनाओं से किस तरह अलग है.
 
अन्य विकास योजनाओं से कौशल विकास योजना की तुलना नहीं की जा सकती है. दूसरे विभाग की कौशल विकास योजनाओं की तुलना हमलोग आपस में कर सकते हैं. पहले सभी विभागों का पाठ्यक्रम अलग-अलग था और सभी अपने-अपने तरीके से ट्रेनिंग देते थे, लेकिन राष्ट्रीय कौशल विकास फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के कॉमन कॉस्ट नार्मस के तहत कम-से-कम प्रशिक्षण की अवधि 200 घंटे कर दी गयी है, जिससे अब जो भी विभाग प्रशिक्षण देगा, उसे कम-से-कम 200 घंटे की ट्रेनिंग जरूरी देनी होगी. साथ ही प्रशिक्षक का भुगतान भी एक समान किया गया है, तो सभी विभाग इसी पैटर्न पर ट्रेनिंग करा रही है, जबकि कौशल विकास मिशन के गठन के पहले ऐसी व्यवस्था नहीं थी. राज्य में किन-किन क्षेत्रों में युवाओं के लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था है.
 
कुल 21 सेक्टर के तहत 60 ट्रेडों में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसके तहत कृषि, मोटर वाहन, बीएफएसआइ, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स, हेल्थ केयर, आइटी, प्लंबिंग, पर्यटन एवं आतिथ्य सत्कार, परिधान, सौंदर्य, पूंजीगत वस्तुएं, घरेलू कामगार, खाद्य प्रसंस्करण, आयरन एंड स्टील, लॉगिस्टक, खुदरा व्यापार आदि मुख्य है. इसके अलावा राज्य के डिग्री, पॉलिटेक्निक एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में सॉफ्ट स्किल की ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की जा रही है. हर जिले में विश्व स्तरीय सेंटर ऑफ एक्सलेंस की व्यवस्था की जा रही है. इसके तहत सिंगापुर, यूरोप आदि देशों से सहयोग लिया जा रहा है. देश में आगामी पांच साल में करीब 60 लाख हेवी मोटर ड्राइवर की आवश्यकता है. इसको ध्यान में रखते हुए एनएसडीसी के सहयोग से लाइट, हेवी एवं कॉमर्शियल मोटर संबंधी संस्थान खोलने की तैयारी की जा रही है. 
मिशन की ओर से पंचायतस्तर पर स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए क्या कुछ किया जा रहा है.
 
पंचायतस्तर के लोगों को रोजगार व स्वरोजगार उपलब्ध कराने में पंचायती राज विभाग अहम भूमिका निभा रही है. कौशल विकास मिशन की कोशिश है कि बेरोजगार युवाओं को तकनीकी स्तर पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है. साथ ही ट्रेनिंग देने में भी सहयोग किया जाता है. 
 
लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में किस तरह का सहयोग दिया जाता है. कौशल विकास मिशन से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद करीब 50 प्रतिशत युवाओं को रोजगार देने की व्यवस्था होती है. साथ ही 20 प्रतिशत युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की व्यवस्था की जाती है. इस तरह कौशल विकास मिनश से प्रशिक्षण प्राप्त करीब 70 प्रतिशत युवाओं को किसी-न-किसी सेक्टर (चाहे वो रोजगार या स्वरोजगार है) से जोड़ने में मिशन मददगार साबित होता है. 
 
मिशन के इस कार्य से पलायन रोकने में किस तरह कारगर साबित होगा.हमारी पहली कोशिश है कि रोजगार के नाम पर राज्य से बाहर जाने वाले युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर उन्हें बाहर जाने से रोके. गांवों से शहरों की ओर पलायन रोकने संबंधी कई पहलुओं पर ध्यान देना होगा, जैसे- कृषि, आधारभूत संरचना आदि. सिर्फ कौशल विकास के माध्यम से गांवों से शहरों की ओर युवाओं के पलायन को नहीं रोका जा सकता है. 
 
राज्य के युवा प्रशिक्षण और रजिस्ट्रेशन संबंधी जानकारी कहां से प्राप्त कर सकते हैं.युवा कौशल विकास मिशन से जुड़ने के लिए अपने जिला कौशल पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. हुनर पोर्टल के माध्यम से भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. इसके लिए मिशन के वेबसाइट http:/hunar.jharkhand.gov.in पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. 
वहीं विभिन्न ट्रेडों में तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए मिशन की  वेबसाइट www.skilljharkhand.org से  जानकारी प्राप्त कर सकते हैं. इसके अलावा 
िमशन की योजनाओं की जानकारी के िलए 0651-2481644 पर संपर्क कर सकते हैं.