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  • Apr 21 2017 1:03PM

2020 तक 50% ग्रामीणों को पाइप से मिलेगा पानी

2020 तक 50% ग्रामीणों को पाइप से मिलेगा पानी

पानी सभी को मिले, इसको लेकर सरकार काफी गंभीर है. पेयजल की समस्या के समाधान के लिए कंट्रोल रूम के नोडल पदाधिकारियों को उत्तरदायी बनाया गया है. हर दिन मॉनेटरिंग हो, इसकी व्यवस्था की गयी है. सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने को कहा गया है. जल संरक्षण के मामले में जल सहिया और पंचायत जनप्रतिनिधियों को सचेत किया गया है. पानी की किल्लत न हो, इसके लिए पंचायत जनप्रतिनिधियों से सक्रिय रहने की अपील की गयी है. ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप से जलापूर्ति योजना को धारदार बनाने के लिए लक्ष्य आधारित काम पर जोर दिया जा रहा है. सरकार की कोशिश है कि किसी भी सूरत में लोग पानी के लिए परेशान न हों. राज्य में पेयजल की स्थिति, उसके उपाय, लोगों की सहभागित आदि विषयों पर विस्तार से राज्य के जल संसाधन, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी से समीर रंजन ने बातचीत की. पेश है इस दिशा में सरकार की योजना व कार्यप्रणाली संबंधी मुख्य अंश.

सवाल : झारखंड में पेयजल की क्या स्थिति है.

जवाब : पेयजल एवं स्वच्छता मानव जीवन का अभिन्न अंग है. एक-एक व्यक्ति को पानी मिले, इसके लिए सरकार गंभीर और वचनबद्ध है. पेयजल की अगर बात करें, तो झारखंड में जलाशय के तहत सतही जल, भूमिगत जल, पाइप जलापूर्ति योजना, ताल-तलैया के माध्यम से लोग पानी का उपयोग करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग ताल-तलैया यानी तालाबों पर विशेष रूप से आश्रित रहते हैं. ग्रामीण तालाबों से पीने का पानी और खेतों में सिंचाई का उपयोग करते हैं. वहीं, चेकडैम और आहार के माध्यम से भी ग्रामीण पानी की आपूर्ति करते हैं. शहरी क्षेत्रों में लोग जलाशयों पर निर्भर हैं. जलाशयों के माध्यम से ही लोगों के घरों में पानी पहुंच पाता है. राज्य में ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता का कार्यक्रम एक ही विभाग पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधीन है. वर्तमान सरकार ने दो वर्ष के अंदर वार्षिक बजट में भी लगभग दोगुना वृद्धि प्राप्त किया है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में नये जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण एवं पुराने स्त्रोतों का जीर्णोद्धार कर राज्य के सभी नागरिकों को शुद्ध एवं समुचित मात्रा में पेयजल सुलभ कराने को प्रयासरत है. राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का संचालन झारखंड में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा किया जा रहा है. 2011 की जनगणना के अनुसार पाइप जलापूर्ति योजना के मामले में झारखंड राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे रहा है. ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में अंतर भी काफी अधिक है. राज्य की लगभग 52 फीसदी आबादी गरीबी रेखा से नीचे है. राज्य में अनुसूचित जाति एवं जनजाति की आबादी लगभग 38 से 40 प्रतिशत है. आबादी का घनत्व काफी कम है. आबादी फैलाव के कारण एक योजनाबद्ध समेकित विकास में प्रति व्यक्ति व्यय काफी अधिक अनुमानित होता है. इस तरह सीमित संसाधनों से तीव्र विकास जैसे आधारभूत संरचना का निर्माण एक चुनौती है.

सवाल : पेयजल का प्रमुख आधार क्या है.

जवाब : पेयजल का प्रमुख आधार ग्रामीण क्षेत्र में नलकूप/कुआं है. राज्य के 98 प्रतिशत से अधिक टोलों में नलकूप/कुओं से शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गयी है. राज्य में नलकूप/कुआं निर्माण का कार्य वर्तमान में लगभग बंद कर दिया गया है. 12वीं पंचवर्षीय योजना में कुल 94 बड़े तथा 3665 छोटे (सोलर सहित) ग्रामीण पाइप जलापूर्ति का निर्माण किया गया. वित्तीय वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में कुल 51 बड़े तथा 2274 छोटे स्तर पर ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजनाएं पूरी हुई है. यह दर्शाता है कि राज्य के ग्रामीण आबादी को ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना से परिपूर्ण करने को लेकर हम प्रतिबद्ध हैं. वर्तमान में लगभग आठ-10 फीसदी प्रतिवर्ष की दर से पाइप जलापूर्ति योजना के तहत वृद्धि दर्ज की गयी है. एक अप्रैल 2012 में मात्र छह-12 प्रतिशत ग्रामीणों को ही पाइप लाइन के माध्यम से जलापूर्ति होती थी, वह वर्तमान में बढ़ कर 26 फीसदी हो गयी है. राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप लाइन के माध्यम से मार्च 2020 तक 50 फीसदी जलापूर्ति करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. राज्य में सालोंभर पानी बहाव युक्त नदियां सीमित है. खनन क्षेत्र में माइन्स पिट से भी जलापूर्ति की जाती है. इसके विस्तार के लिए विभाग द्वारा डीपीआर तैयार किया जा रहा है. वर्तमान में लगभग 2200 करोड़ रुपये का डीपीआर तैयार कर लिया गया है. इससे लगभग 18 लाख आबादी को पानी मिल पायेगा. वित्तीय संसाधन के लिए राज्य सरकार ने डीएमएफटी-पीएमकेकेवाई अंतर्गत 1180 करोड़ की 26 बड़े तथा 552 लघु पाइप जलापूर्ति की स्वीकृति दी जा रही है. राज्य सरकार अपने संसाधन से पेयजल के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना में 1166 करोड़ रुपये खर्च की है.

सवाल : सरकार पाइप लाइन के माध्यम से जलापूर्ति योजना पर ही विशेष जोर क्यों दे रही है.

जवाब : ग्रामीण क्षेत्रों में पाइप लाइन के माध्यम से जलापूर्ति करने की दिशा में सरकार का प्रयास है कि शत-प्रतिशत ग्रामीण इस योजना का समुचित लाभ उठा सके. इस दिशा में लक्ष्य आधारित कार्यों पर विशेष जाेर दिया गया है. इस योजना को समुचित स्तर पर करने के पीछे सरकार की मंशा यह है कि इससे भूमिगत जल के दोहन पर अंकुश लगाया जा सके. पलामू, गढ़वा जैसे जिलों में मॉनसून में भी पानी की दिक्कत को देखते हुए सरकार ने सोन नदी से पाइप लाइन के माध्यम से जलापूर्ति की व्यवस्था शुरू करने की योजना पर काम शुरू कर दी है.  

सवाल : झारखंडवासियों को पानी की दिक्कत ना हो, इसके लिए विभाग क्या कर रहा है.

जवाब : राज्यवासियों को पेयजल की संकट न हो, इसके लिए विभाग युद्धस्तर पर काम कर रहा है. पेयजल समस्या के समाधान के लिए पेयजल विभाग के अभियंताओं की छुट्टी एक अप्रैल से 30 जून तक रद्द कर दी गयी है. किसी भी कीमत पर राज्य में पेयजल संकट नहीं होने दिया जायेगा. राज्यवासियों की सुविधा के लिए संबंधित अभियंताओं और पदाधिकारियों के मोबाइल नंबर सार्वजनिक किया गया है. प्रत्येक विभागीय अंचल में कनीय अभियंता या सहायक अभियंता को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है. प्रत्येक नोडल पदाधिकारी को क्षेत्रवार ह्वाट्स ग्रुप बना कर ग्रुप में जल सहिया, मुखिया, बीडीओ, सीओ एवं सीडीपीओ के साथ-साथ एइ, इइ व एसइ को रखने का निर्देश दिया गया है, ताकि सभी के बीच आपसी समन्वय बना रहे. साथ ही सभी अधिकारियों को यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि कोई भी अपना फोन बंद न रखें. इसके अलावा विभागीय प्रमंडलवार कंट्रोल रूम बनाया गया है. मुख्यालय स्तर पर भी कंट्रोल रूम बनाया गया है. कंट्रोल रूम में प्रतिदिन संबंधित विभाग के अभियंता अपने स्तर से समीक्षा भी कर रहे हैं. साथ ही किसी समस्या पर 24 घंटे में हल करने का निर्देश अधिकारियों को दिया गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में सभी चापानल चालू रहे, इसके लिए पदाधिकारियों को विशेष जवाबदेही दी गयी है. राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना, ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना के तहत काम में अगर किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है, तो तत्काल इसके लिए संबंधित अधीक्षण अभियंता व कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया गया है कि अभियंता प्रमुख से मिल कर इसका समाधान निकालने का प्रयास करें. 

सवाल : राज्य में बारिश अच्छी होती है, फिर भी लोग पानी के लिए तरसते क्यों हैं.

जवाब : बारिश कम होने पर परेशानी बढ़ जाती है. ऐसी स्थिति में पूर्व की समस्या को ध्यान में रख कर सरकार ने पहले से ही पानी को संजोने को लेकर तैयारी शुरू कर दी है. जिन गांवों में हर बार पानी की गंभीर समस्या होती है, वहां पानी की समुचित व्यवस्था की जा रही है. इसके अलावा जिन क्षेत्रों में पानी की समस्या विद्यमान है, उसे चिह्नित किया गया. विभागीय पदाधिकारियों को इस दिशा में तेजी से काम करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश भी दिया गया है. इस सभी कार्यों का अपने स्तर मॉनेटरिंग भी किया जा रहा है ताकि इस बार कोई पानी के बिना प्यासा न रहे. इसके अलावा विभाग की ओर से राशि का आवंटन भी हुआ है ताकि राशि के अभाव में कोई काम न रूके. खराब चापानलों की मरम्मती करते हुए गेंगमैन सहित चलंत वाहन की व्यवस्था की गयी है. इसके तहत प्रत्येक प्रखंड में एक-एक वाहन की व्यवस्था की गयी है. इस वाहन में चापानल मरम्मती संबंधित सभी कलपूर्जे उपलब्ध हैं, जिससे जहां जैसी जरूरत हो, उसकी व्यवस्था की जा सकती है. रसायन युक्त पानी की समस्यावाले क्षेत्रों में जल्द-से-जल्द पेयजल की व्यवस्था की जा रही है. 

सवाल : जल संरक्षण की दिशा में सरकार पंचायतों को अहम भूमिका क्यों नहीं देती है.

जवाब : ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए जल सहिया की व्यवस्था की गयी है. ग्रामीण पेयजल एवं स्वच्छता समिति भी कार्यरत है. जल संरक्षण की दिशा में जल सहिया की अहम भूमिका है. जल संरक्षण को लेकर पंचायत जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है और उनकी रायसुमारी को भी विशेष तवज्जो दी जा रही है. पेयजल के मुद्दे को लेकर सरकार पूरी तरह से चौकस है. पानी का समुचित उपयोग हो, इसके लिए सभी की सहभागिता जरूरी है. साथ ही जन-जागरण और जागरूकता कार्यक्रम पर भी विशेष जाेर दिया जा रहा है. 

सवाल : पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाने की दिशा में यह प्रयास सालों भर क्यों नहीं रहता.

जवाब : देखिये, ऐसा नहीं है कि इस काम को यूं छोड़ दिया जायेगा. सरकार की अब कोशिश है कि इसे सालों भर क्रियाशील रखा जायेगा ताकि अगले साल दूसरे काम पर जोर दिया जाये. 

सवाल : आपके विभाग में पदाधिकारियों की कमी है, फिर अपने लक्ष्य को कैसे हासिल कर पायेंगे.

जवाब : देखिये, जहां-जहां अभियंताओं की कमी महसूस की जा रही है, वहां-वहां सेवानिवृत कनीय अभियंताओं से सहयोग लिया जा रहा है और इसके लिए सरकार कुछ प्रावधान भी कर रखी है. इसके लिए मुख्य अभियंता को जिम्मेवारी सौंपी गयी है कि उन इलाकों को चिह्नित करें, जहां अभियंताओं की कमी के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है.