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  • Aug 21 2017 2:31PM

समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना ही झालसा का है लक्ष्य

समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना ही झालसा का है लक्ष्य
एक वक्त था जब कानून आम आदमी की पहुंच से दूर था और लोग, खासकर ग्रामीण, कोर्ट और पुलिस के पास जाने से डरते थे. इस कारण उन्हें जल्द न्याय नहीं मिल पाता था. इस खामी को दूर करने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने के लिए झालसा यानी राज्य विधिक सेवा प्राधिकार का गठन किया गया
 
. झालसा के अथक प्रयास से आज समाज में एक नयी क्रांति दिख रही है. ‘न्याय आपके द्वार’ की सोच से समाज के आखिरी व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने की पहल की जा रही है और इसका लाभ भी उन्हें मिल रहा है. झारखंड के मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) न्यायमूर्ति डीएन पटेल बदलाव और नये प्रयोग में विश्वास रखते हैं. यही वजह है कि झालसा के द्वारा ही न्यायिक प्रणाली में कई तरह के बदलाव किये जा रहे हैं. न्यायिक प्रक्रिया में बदलाव करने की सोच और इसके लिए उठाये जा रहे कदम उनकी विशिष्ट कार्यशैली को दर्शाता है. 
 
इन्हें विश्वास है कि नये प्रयोग के जरिये न्याय और भी सुलभ और सस्ता हो सकता है. मध्यस्थता केंद्रों में जज और वकील को छोड़ कर समाज के बुद्धिजीवियों को इस प्रक्रिया में शामिल करना और बेहतर परिणाम हासिल करना न्यायमूर्ति डीएन पटेल की इच्छाशक्ति को दर्शाता है. झालसा कैसे काम करता है. इसका उद्देश्य क्या है. इसके माध्यम से लोगों तक कानून की सही जानकारी कैसे पहुंचे और सभी के साथ न्याय कैसे हो. इन तमाम मुद्दों पर पंचायतनामा के संपादक संजय मिश्रा ने झारखंड के मुख्य न्यायाधीश (कार्यवाहक) न्यायमूर्ति डीएन पटेल से विशेष बातचीत की. पेश है बातचीत का मुख्य अंश.
 
सवाल : झालसा (झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार) का उद्देश्य क्या है और किस तरह यह आम जनों को कानूनी लाभ पहुंचा रहा है.
जवाब : झालसा यानी झारखंड स्टेट लीगल सर्विसज अथॉरिटी. राजधानी रांची में इसका कार्यालय है. यह नालसा यानी नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के दिशा-निर्देश पर कार्य करता है. पूरे राज्य में व्यवस्था के सफल संचालन के लिए जिले के सिविल कोर्ट में डीएलएसए (जिला विधिक सेवा प्राधिकार) का कार्यालय है. सबका एक ही उद्देश्य है कि किसी के साथ अन्याय न हो, सभी को न्याय मिले. कोर्ट का काम काफी खर्चीला होता है. कोर्ट जाना, वकील को फीस देना, कोर्ट फीस देना एक गरीब आदमी के लिए काफी मुश्किल है. कई लोगों के पास पैसे होते हैं तो समय नहीं होता है. 
 
कुछ लोगों के पास समय है तो पैसे नहीं रहते हैं. ऐसे में गरीबों एवं पीड़ितों को नि:शुल्क कानूनी मदद दी जाती है. निर्धारित आय सीमा वाले लोगों को भी कानूनी मदद मिलती है. इसके तहत एक से पांच लाख तक की आय वाले लोग कानूनी लाभ ले सकते हैं. किसी गरीब को पुलिस पकड़ लेती है तो उसे कोर्ट में मुकदमा लड़ने के लिए नि:शुल्क वकील दिया जाता है. इसके लिए जाने-माने वकील झालसा एवं डीएलएसए के साथ जुड़े होते हैं. ऐसी कई योजनाएं लागू हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में इसका लाभ गरीबों को नहीं मिल पा रहा है. 
 
अब एक नयी शुरुआत की गयी है, जिसके तहत कोर्ट के समन के साथ अब वकील का नाम और नंबर दिया जायेगा. साथ ही अन्य कागजात भी दिये जायेंगे, ताकि उस व्यक्ति को तुरंत कानूनी लाभ मिल सके. अगर आप किसी मामले में न्याय के लिए कोर्ट नहीं जाना चाहते हैं, तो कोर्ट के बाहर विवाद के निपटारे के लिए सिविल कोर्ट स्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार के मध्यस्थता केंद्र जा सकते हैं. यहां नि:शुल्क कानूनी मदद मिलने से न सिर्फ पैसे बचेंगे, बल्कि कोर्ट की तुलना में समय की भी काफी बचत होगी. इससे कोर्ट पर मुकदमों का दबाव भी कम होगा. यह गरीबों के लिए काफी लाभकारी है. हमें गरीब लोगों के बारे में सोचना चाहिए और उनके लिए काम करना चाहिए, क्योंकि झालसा और नालसा का भी यही उद्देश्य है कि किसी के साथ अन्याय नहीं हो. 
 
सवाल : जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड किस तरह कार्य करता है. किसी कारणवश जो बच्चे बाल सुधार गृह में आते हैं, उन्हें न्याय कैसे मिलता है और समाज से इसे कैसे दूर किया जाये.
 
जवाब : देखिये, जब बच्चे कोई अपराध करते हैं तो सचमुच वो बच्चों द्वारा नहीं किया जाता है. आज हर जगह बच्चों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है. बच्चे अपराध नहीं करते हैं. यही कारण है कि इन्हें अपराधी नहीं कहा जाता है. 
 
इनके मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट की बजाय जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में होती है. इन्हें जेल में नहीं बल्कि बाल सुधार गृह में रखा जाता है. कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं, जिनका कोई दोष नहीं होता है. ये बच्चे सड़क, रेलवे स्टेशन या मेले में छूट जाते हैं या इन्हें छोड़ दिया जाता है, इन बच्चों को सुरक्षित रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. इन बच्चों को चाइल्ड लाइन में रखा जाता है. बच्चे नाजुक होते हैं. उनका पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए. जिस तरह हम अपने घर के बच्चों का ख्याल रखते हैं, उन्हें अच्छा खाना देते हैं. 
 
अच्छी शिक्षा देते हैं और अच्छे कपड़े देते हैं. ठीक उसी तरह इनका भी ख्याल रखना चाहिए. जमशेदपुर के बाल सुधार गृह में काफी सुविधाएं बढ़ायी गयी हैं. मैं लगातार वहां जाता हूं और उन मासूम बच्चों से मिलता हूं. रांची के बाल सुधार गृह में भी सुविधाएं बढ़ायी गयी हैं. मैं खुद समय-समय इसका निरीक्षण करता रहता हूं. रांची में मैंने देखा है कि कुछ बच्चे दोबारा बाल सुधार गृह में आ जाते हैं जो नहीं होना चाहिए. यह हमारी भी सामाजिक जिम्मेदारी है कि समाज में ऐसी चीजों को रोका जाए. ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए ताकि बच्चे दोबारा बाल सुधार गृह में नहीं आयें. बच्चे काफी चंचल होते हैं. 
 
उनमें काफी ऊर्जा होती है. उनका दिमाग भी तेज होता है. उनमें किसी भी चीज को जानने-समझने की काफी जिज्ञासा होती है. बच्चों को किसी भी कार्य में लगा दिया जाये, जो उनके लिए नुकसानदेह न हो, वो बेहतर कर सकते हैं. बच्चों के इन्हीं गुणों को देखते हुए रांची में एक नयी शुरुआत की गयी है. इसके तहत बच्चों को हुनरमंद बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है और इसका असर भी दिख रहा है. 
 
इस पहल के लिए झारखंड की खूब सराहना हुई है. इस सफलता के लिए मेरी टीम के साथ-साथ झारखंड के लोग भी बधाई के पात्र हैं. जिन बच्चों को इस योजना के तहत लाभ मिला, उनके माता-पिता काफी खुश दिखे क्योंकि ऐसे बच्चों के माता-पिता उनके भविष्य को लेकर काफी चिंतित होते हैं. बाल सुधार गृह में रह रहे बच्चों के लिए दस कंप्यूटर लगाये गये हैं. इन बच्चों को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
 
बच्चों को फोटोग्राफी सिखाने की भी योजना है. इस पर काम हो रहा है. कंप्यूटर के साथ- साथ बच्चों को ट्राइबल पेंटिंग आर्ट (सोहराई पेंटिग) की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि राज्य की अनमोल कला संरक्षित रहे और बच्चों को रोजगार भी मिलता रहे. बच्चों को काम मिल जायेगा, तो वे मुख्यधारा से जुड़ जायेंगे. दूसरी चीजों की ओर उनका ध्यान नहीं जायेगा और अतीत को भी बच्चे भूल पायेंगे. 
 
सवाल : झालसा की कार्यप्रणाली क्या है. मध्यस्थता के फायदे क्या हैं, इसके तहत जो मामले निपटाये जाते हैं, उनकी सफलता का प्रतिशत क्या है.
 
जवाब : झालसा पारिवारिक विवादों का भी निपटारा करता है. इसके साथ-साथ दो कर्मियों के बीच के विवाद को भी निपटाता है. कई लोग मनी सूट के मामले लेकर आते हैं. भाई-भाई के झगड़े के मामले भी आते हैं. 
 
जो लोग कोर्ट नहीं जाना चाहते हैं, वे झालसा में आते हैं. मस्जिद को लेकर चल रहा मामला भी झालसा में आ चुका है और इस मामले में सुलह कराया गया है. झालसा में आये मामलों में 74 प्रतिशत का निपटारा हो चुका है. इसके चलते लोगों का विश्वास बढ़ा है. 
 
करोड़ों रुपये के विवाद के मामले भी झालसा में आते हैं, जिनका निपटारा मध्यस्थता के जरिये किया गया है. इसके अलावा झालसा ने एक नयी शुरुआत की है. जिसकी जानकारी आम लोगों को अवश्य होनी चाहिये. हत्या और दुष्कर्म जैसे मामले में पीड़ित पक्ष ठगा महसूस करता है, क्योंकि जब तक फैसला नहीं आता है तब तक पीड़ित पक्ष को किसी प्रकार का मुआवजा नहीं मिलता है, लेकिन अब नयी योजना के तहत पीड़ित पक्ष को तुरंत मुआवजा राशि दे दी जाती है,ताकि घटना के बाद जो पीड़ित परिवार टूट जाता है, उसे टूटने से बचाया जा सके. 
सवाल : आम जनता को कानून का लाभ कम मिल पाता है. इस क्षेत्र में अब तक क्या कार्य हुए हैं और किस तरह लोगों को न्याय मिल रहा है. लीगल लिट्रेसी क्लब क्या है.
 
जवाब : पीड़ित परिवार या पीड़ित की मुआवजा राशि में सरकार ने अब बढ़ोतरी कर दी है.  ग्रामीण इलाकों में लोगों को कानून की जानकारी देने, उन्हें जागरूक करने एवं उन तक कानून का लाभ पहुंचाने के लिए पारा लीगल वोलेंटियर्स नियुक्त किये गये हैं. सभी पारा लीगल वोलेंटियर्स को पांच दिनों का प्रशिक्षण दिया जाता है. पारा लीगल वोलेंटियर्स आम लोगों को नुक्कड़ नाटक, मोबाइल वैन, छोटी फिल्में एवं मेले में जाकर जागरूक करते हैं. अगर बच्चों को कानून की जानकारी दी जाये, तो वे इसे जल्दी सीखते हैं और कानून को जाननेवाला व्यक्ति अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से समझ सकता है. अपने अधिकारों को समझनेवाला व्यक्ति एक अच्छा नागरिक साबित होता है. वो देश और राज्य के प्रति अपना फर्ज बेहतर तरीके से समझता है. लीगल लिट्रेसी क्लब की बात करें, तो 10 दिसंबर, 2016 को एक साथ 500 स्कूलों में लीगल लाइब्रेरी का उदघाटन किया गया था. 
 
लाइब्रेरी में कानून और अधिकारों की जानकारी को लेकर पुस्तकें और बुकलेटस रखे गये हैं. बच्चे इससे खुद भी जागरूक हो रहे हैं और अपने माता-पिता को भी इसकी जानकारी दे रहे हैं. इससे एक फायदा यह हुआ है कि पूरा समाज जागरूक हो रहा है. बच्चों को मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने के लिए समय-समय पर निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है.
 
इससे पूरी तसवीर बदलने का प्रयास किया जा रहा है. मैंने अभी तक जो भी सीखा है, अपने कार्यों से जो भी अनुभव मिला है, मैं उस तरीके से कार्य कर रहा हूं ताकि समाज में बदलाव लाया जा सके. समाज का अंतिम व्यक्ति अपने अधिकारों को जाने और उस तक न्याय पहुंचाना ही मेरा और झालसा का लक्ष्य है