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  • Sep 13 2017 1:22PM

मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड: ग्रामीणों को रोजगार दिला स्वावलंबी बनाना लक्ष्य

मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड: ग्रामीणों को रोजगार दिला स्वावलंबी बनाना लक्ष्य

सरकार की कल्याणकारी योजनाएं आमजनों के विकास के लिए बनायी जाती हैं. खासकर, ग्रामीणों और गांव के विकास के लिए बनायी जाती हैं. इन योजनाओं के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं, पर परिणाम क्या होता है. योजनाएं गांव तक नहीं पहुंच पाती हैं. कई बार ऐसा भी होता है कि योजनाएं धरातल पर उतरती हैं, लेकिन उन योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से नहीं हो पाता है. कई बार ऐसा भी होता है कि ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ने के लिए उपक्रम बनाये जाते हैं और उन छोटे उपक्रमों से उत्पादन  होता है, पर उस उत्पाद को बेचने के लिए उपयुक्त बाजार नहीं मिल पाता है. इससे उत्पादन में लगे लोगों का मनोबल कम होता है और धीरे-धीरे उत्पादन बंद हो जाता है और सब कुछ फिर से पहले जैसा हो जाता है. लोग फिर बेरोजगार हो जाते हैं और योजना में खर्च हुई राशि यूं ही बेकार हो जाती है. इन समस्याओं को देखते हुए और गांव-गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड का गठन किया गया. बोर्ड की योजना का खाका पिछली गलतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है. इस संबंध में मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी रेणु गोपीनाथ पणिक्कर से पवन कुमार ने विस्तार से बातचीत की. पेश है बातचीत का मुख्य अंश.

सवाल मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड का उद्देश्य क्या है.

जवाब गांव के लोगों के हाथों में सीधे काम पहुंचे और वो रोजगार से जुड़ पायें, इस उद्देश्य से वर्ष 2016 में मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड का गठन हुआ. बोर्ड के माध्यम से राज्य के सभी गांवों के ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ना इसका मुख्य लक्ष्य है. गांव  में उपलब्ध प्राकृतिक संपदाओं और ग्रामीणों की योग्यता के मुताबिक ग्रामीणों को कार्य दिये जायेंगे. काम से पहले ग्रामीणों को प्रशिक्षण मिलेगा. लघु एवं कुटीर उद्योग के तहत कोई भी काम जैसे-मछली पालन, मधुमक्खी पालन, लाह उत्पादन, लाह की चुड़ियां बनाना, खेती करना एवं तसर उत्पादन जैसे कार्य, जो गांव की प्राकृतिक संपदाओं के अनुरूप मेल खाते हों. ग्रामीणों को उनके पसंद के हिसाब से काम दिया जायेगा. बोर्ड एक खास लक्ष्य के साथ कार्य कर रहा है ताकि ग्रामीणों को उनके पसंद के मुताबिक काम मिले और वो रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन नहीं करें.

सवाल आमजनों को बोर्ड से क्या लाभ मिलेगा.

जवाब बोर्ड के तहत बनी योजनाएं सिर्फ बंद कमरे में बैठकर नहीं बनायी गयी हैं. इसके लिए राज्य के सभी 32,623 गांवों तक हमारे लोग गये. गांव की भौगोलिक स्थिति, शिक्षा का स्तर, शहर से दूरी आदि देखते हुए योजना तैयार की गयी. इसके तहत गांवों को तीन श्रेणी में बांटा गया. ए श्रेणी में उन गांवों को रखा गया है, जो शहर से नजदीक हैं. बी श्रेणी में उन गांवों को रखा गया है, जो शहर से दूर हैं, लेकिन शहरों जैसी छोटी-मोटी सुविधाएं वहां उपलब्ध हैं. यातायात के लिए अच्छी सड़कें हैं. बिजली की व्यवस्था है. सी श्रेणी में उन गांवों को रखा गया है, जो गांव और शहर से काफी दूर हैं. गांवों को कैटेगरी में बांटने का फायदा यह हुआ है कि हम हर गांव के बारे में जान रहे हैं. इससे गांव में उपलब्ध सुविधाएं, प्राकृतिक संपदाएं एवं असुविधाओं की जानकारी मिल रही है. इस तरीके से हमारे पास हर गांव का आंकड़ा मिल गया है. हम जान पा रहे हैं कि किस गांव के लिए योजनाएं किस तरह से बनायी जायें. जैसे- ए श्रेणी के गांव, जो शहर से नजदीक हैं, वहां दुग्ध और मछली उत्पादन को बढ़ावा दे सकते हैं. इससे उत्पाद सीधे शहर पहुंच जायें और उत्पादों की बिक्री के लिए बाजार मिल जाये. शहर से नजदीक होने के कारण ग्रामीणों का उत्पाद जल्द शहरों तक पहुंच पायेगा. अगर सी श्रेणी के गांवों की बात करें, तो ये गांव शहर से काफी दूर होते हैं. इन गांवों के लिए अलग तरह की योजनाएं बनायी जायेंगी.

सवाल बाजार की उपलब्धता सुनिश्चित कराने संबंधी बोर्ड की क्या योजना है.

जवाब देखिये, मैंने पहले ही कहा कि बोर्ड एक सुनियोजित तरीके से विभिन्न पहलुओं की जांच करके योजनाएं तैयार कर रहा है. हर गांव का सर्वे रिपोर्ट हमारे पास है. एक-एक गांव की जरूरत के हिसाब से योजनाएं तैयार हो रही हैं. जहां तक बाजार की बात है, तो हमने पिछले अनुभवों और पिछली गलतियों से बहुत कुछ सीखा है. वर्तमान योजना में इन गलतियों को दूर करने का प्रयास किया गया है. जहां तक बाजार की बात है, उद्योग के लिए बाजार बेहद जरूरी होता है और अगर बाजार नहीं मिलता है तो उद्योग ठप हो जाता है. इसे ध्यान में रखते हुए हमने खास तरीके से बाजार की प्लानिंग तैयार की है. लघु एवं कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बाजार उपलब्ध कराना हमारी पहली प्राथमिकता है. इसलिए कई बड़े शहरों में राज्य के उत्पादों का बाजार बनाने के लिए मैंने खुद बात की है. हमारा लक्ष्य है कि सभी उत्पादों का निर्यात किया जाये. मुख्यमंत्री रघुवर दास भी चाहते हैं कि झारखंड की पहचान पूरे विश्व में एक एक्सपोर्ट हब के तौर पर हो. बोर्ड की योजना के तहत जो भी उत्पाद तैयार होंगे, उन्हें हम सीधे खरीद लेंगे और राज्य से बाहर के बाजारों में बेचेंगे. इससे उत्पादकों को बाजार की चिंता नहीं करनी होगी. सीधे तौर पर कहें, तो अाज तक झारखंड की पहचान खनिज संपदाओं के निर्यात के तौर पर होती थी, पर अब इसके साथ कुटीर उद्योग के निर्यात में भी झारखंड का नाम होगा.

सवाल बोर्ड किस तरीके से काम करता है.

जवाब मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम बोर्ड राज्य का सबसे बड़ा बोर्ड है. इसमें 350 लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं. राज्य के सभी 24 जिलों के लिए 24 डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किये गये हैं, साथ ही 250 ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर नियुक्त हुए हैं. इसके अलावा हर गांव में जल्द ही विलेज को-ऑर्डिनेटर नियुक्त होंगे, जो राज्य के सभी गांवों में घर-घर जाकर सर्वे करेंगे और समस्याओं का पता लगायेंगे. सर्वे के जरिये हमें यह जानकारी मिल जायेगी की ग्रामीण अगर व्यवसाय से जुड़े हैं, तो उनका व्यवसाय क्यों नहीं चल पा रहा है. ग्रामीणों को किस तरह का व्यवसाय करना और किन रोजगार से जोड़ना है, इसकी जानकारी भी विलेज को-ऑर्डिनेटर के माध्यम से मिल जायेगी.  डिस्ट्रिक्ट को-ऑर्डिनेटर सभी प्रखंडों में जायेंगे और वहां की पंचायतों के गांवों में जाकर उद्यमी मंडल बनायेंगे. हर गांव में तीन से चार उद्यमी मंडल बनाये जायेंगे और सभी उद्यमी मंडलों में 25 सदस्य होंगे. इस तरीके से गांव के हर घर को इस दायरे में लाने का प्रयास किया जायेगा.

सवाल राज्य के गांवों में कई समस्याएं आज भी विद्यमान हैं, इसे कैसे दूर किया जा सकता है.

जवाब देखिए, बोर्ड के सर्वे के तहत कई समस्याओं के बारे में ग्रामीणों से पूछा गया है. इससे यह लाभ हुआ कि गांव में विद्यमान मूलभूत समस्याओं की जानकारी हमें मिल गयी है. उन समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जायेगा. बोर्ड का अपना एक एप भी होगा, जो पूरी जानकारी से लैस होगा. इस एप के माध्यम से राज्य के हर गांव के बारे में हमें पूरी जानकारी मिल जायेगी. सर्वे का कार्य हर छह महीने में किया जायेगा, ताकि समय-समय पर आ रही समस्याओं को दूर किया जा सके. q

कौन हैं रेणु गोपीनाथ पणिक्कर

मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम बोर्ड की सीइओ रेणु गोपीनाथ पणिक्कर मूलत: केरल की रहने वाली हैं. हालांकि, इनका बचपन जमशेदपुर में बीता है. पढ़ाई भी जमशेदपुर में हुई है. रेणु कहती हैं कि केरल के गांव और झारखंड के गांवों में जमीन-आसमान का अंतर है. केरल के गांवों में रहने वाले लोग समृद्ध होते हैं, वहीं झारंखड के गांवों में काफी गरीबी हैं. रेणु गोपीनाथ के पास कई बड़ी कंपनियों में काम करने का अनुभव है और उन अनुभवों के जरिये वो झारखंड के गांवों की तसवीर बदलने का प्रयास कर रही हैं. वर्तमान में वो झारक्राफ्ट की सीइओ भी हैं.