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  • Oct 25 2017 1:58PM

हक के लिए लोगों में जागरूकता जरूरी

हक के लिए लोगों में जागरूकता जरूरी
झारखंड के लोगों को राशन दुकान से उचित मूल्य पर अनाज मिले, इसके लिए सरकार प्रयासरत है. लोग अपने अधिकारों को समझें. अगर लोग अपने हक और अधिकार के प्रति सचेत हो जायेंगे, तो वो दिन दूर नहीं जब राशन दुकानदार लाभुकों को उनके घर जाकर राशन पहुंचाने को बाध्य होंगे. अगर आपको कम राशन मिल रहा है या सही समय पर अनाज उपलब्ध नहीं होता है, तो इसकी क्षतिपूर्ति के रूप में मुआवजा देने का प्रावधान है. इसके लिए शिकायत की भी व्यवस्था की गयी है, जहां आप अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. बस जरूरत है आपको अपने हक और अधिकार को जानने की. राज्य में खाद्य व्यवस्था की क्या स्थिति है, अनाज होने के बावजूद जरूरतमंदों को क्यों नहीं मिलता राशन, राशन मिलने की प्रक्रिया, लोगों के अधिकार समेत अन्य मुद्दों पर राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय से समीर रंजन ने विशेष बातचीत की. पेश है बातचीत पर आधारित यह आलेख. 
 
झारखंड में कोई भूखा नहीं रहे. हर किसी को भरपेट भोजन मिले, इसके लिए केंद्र व राज्य सरकार प्रयत्नशील है. वर्तमान में ग्रामीण इलाकों में 86.4 फीसदी लोगों को राशन दिया जाता है, वहीं शहरी इलाकों में 60.4 फीसदी लोगों को राशन वितरण किया जाता है. इस तरह से राज्य के करीब 80 फीसदी लोगों के बीच राशन दुकान से उचित मूल्य पर अनाज वितरण किया जा रहा है. राज्य में मांग के अनुरूप अनाज का उत्पादन नहीं होता है, फिर भी राज्य के अधिक-से-अधिक लोगों को उचित मूल्य पर अनाज मिले, इसके लिए विभाग प्रयासरत है. मांग के अनुरूप सूबे में अनाज का उत्पादन नहीं होने के कारण सरकार राज्य के बाहर से अनाज मंगाती है. एफसीआइ (फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) के माध्यम से अनाज मंगाया जाता है. एफसीआइ से आये अनाज को एसएफसी (स्टेट फूड कॉरपोरेशन) के गोदाम में रखा जाता है. वहां से जन वितरण प्रणाली की दुकान और फिर वहां से उपभोक्ताओं के बीच अनाज का वितरण किया  जाता है. इस व्यवस्था में लगातार अनियमितता की शिकायतें आती रहती हैं. 
राज्य में करीब दो करोड़ 60 लाख लोगों को राशन दिया जा रहा है. इसके तहत राज्य के लोगों के बीच दो तरह के राशन कार्ड का वितरण किया गया है. पीला कार्ड और गुलाबी कार्ड. अंत्योदय योजना में शामिल लोगों को पीला कार्ड दिया गया है. यह कार्ड राज्य के साढ़े नौ लाख परिवार के पास है. शेष लोगों को प्राथमिकता के आधार पर राशन कार्ड दिया गया है. इसकी संख्या राज्य में करीब 48 लाख है. इस तरह राज्य में करीब 58 लाख राशन कार्ड जारी किया गया है. 
 
खाद्य आपूर्ति विभाग की कोशिश है कि जिन लोगों को राशन कार्ड दिया गया है, उन्हें पूरा राशन मिले. खाद्य सुरक्षा अधिनियम के पारित होते ही  राशन कार्डधारियों को अनाज लेने का कानूनी हक मिल गया है. वर्तमान में जिन कार्डधारियों को राशन कार्ड मिला है, उन्हें पूरा अनाज मिले, इसकी समुचित व्यवस्था की गयी है. फर्जी राशन कार्ड और अनाज की कालाबाजारी की रोकथाम के प्रयास किये गये हैं. इसके तहत जन वितरण प्रणाली की दुकानों में ई-पॉस (इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल) मशीन लगायी गयी है. ई-पॉस मशीन को आधार कार्ड से जोड़ दिया गया है, ताकि सही कार्डधारियों को पर्याप्त अनाज मिल सके. ई-पॉस मशीन के उपयोग में परेशानी भी आयी. इंटरनेट के माध्यम से कार्य करनेवाली यह मशीन कई गांवों में काम ही नहीं कर रही थी, क्योंकि राज्य के कई गांवों में आज भी इंटरनेट की कनेक्टिविटी सही नहीं है. वैसे इलाकों के लिए ऑफ लाइन व्यवस्था कर दी गयी है यानी राशन कार्डधारी पीडीएस दुकान में आयें, ई-पॉस मशीन में अपना अंगूठा लगायें और अपना अनाज लें. ऑफ लाइन के तहत कार्डधारियों द्वारा लिये गये अनाज का डाटा मशीन में जमा होता है और फिर उस मशीन को संबंधित स्थान पर ले जाकर उस डाटा को सर्वर में डाला जाता है. अब राज्य में खाद्यान्न के आंकड़े मशीन के माध्यम से ही आते हैं. मशीन के उपयोग से कालाबाजारी पर कुछ हद तक अंकुश तो लगा है. हालांकि कम राशन देने की शिकायतें अब भी आ रही हैं. ऐसी स्थिति में जिन लाभुकों को डीलरों द्वारा कम राशन दिया जा रहा है, वो राशन नहीं लेकर शिकायत करें. शिकायत मिलते ही विभाग अपने स्तर से जांच कराता है और शिकायत सही पाये जाने पर उक्त डीलर के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, वहीं पीड़ित लाभुकों को बाजार मूल्य के हिसाब से नहीं लिये गये अनाज का मुआवजा देने का भी प्रावधान है. लाभुक जागरूक होंगे, तो कम अनाज देने और कालाबाजारी पर काफी हद तक अंकुश लग जायेगा.
 
अनाज वितरण की बात करें, तो वर्तमान में राज्य में करीब एक लाख 45 हजार मीट्रिक टन चावल व गेहूं का वितरण किया जाता है. इसमें 1.13 लाख मीट्रिक टन अनाज पीएचएच कार्डधारी परिवार और 32 हजार मीट्रिक टन चावल एवं गेहूं का वितरण अंत्योदय कार्डधारी परिवार के बीच किया जाता है. पहले सिर्फ चावल का वितरण होता था, लेकिन अब शहरी क्षेत्रों में भी चावल के साथ-साथ गेहूं का वितरण किया जा रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में भी गेहूं आपूर्ति की मांग की जा रही है. अनाज की बात कर रहे हैं, तो राज्य में कुपोषण की स्थिति पर चर्चा जरूरी है. राज्य में कुपोषण एक गंभीर समस्या है. इसे दूर करने के लिए सभी को एकजुट होना होगा. सिर्फ  विभाग के सहारे राज्य से कुपोषण खत्म नहीं किया जा सकता है. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत तीन विभाग आते हैं. पहला खाद्य आपूर्ति विभाग, दूसरा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, जहां स्कूलों में मिड डे मील का वितरण किया जाता है और तीसरा समाज कल्याण विभाग, जहां आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं से लेकर छह साल के बच्चों की देखभाल व पौष्टिक आहार दिया जाता है. उक्त तीनों विभाग बच्चों समेत लोगों को पौष्टिक आहार देने का कार्य कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में तीनों विभागों को राज्य से कुपोषण दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी. इसके अलावा परोक्ष रूप से स्वास्थ्य और कृषि विभाग को भी विशेष ध्यान देना होगा. कृषि विभाग के तहत राज्य में पौष्टिक आहार जैसे- मोटा अनाज संबंधी अनाजों की पैदावार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. अब विभाग ने नये राशन कार्ड बनाने, रद्द करने, अन्य परिवारों का नाम राशन कार्ड में जोड़ने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की है. इससे आपको कार्यालय या संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. प्रज्ञा केंद्र के साथ-साथ स्मार्ट फोन पर भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए आप अपने स्मार्ट फोन पर aahar.jharkhand.gov.in के पोर्टल को डाउनलोड कर इस व्यवस्था को अपना सकते हैं. इसके अलावा राज्य, जिला, प्रखंड व पंचायत स्तर पर सतर्कता समिति बनायी गयी है. जल्द ही राशन दुकान स्तर पर सतर्कता समिति बनायी जायेगी, जिसके माध्यम से राशन दुकान से अनाज वितरण की निगरानी और मॉनिटरिंग की जायेगी. वर्तमान में निगरानी समितियों को कोई अधिकार नहीं मिला है. निगरानी समितियों के सदस्यों का कार्य है कि कहीं कोई गड़बड़ी दिखे, तो अपर समाहर्ता के पास शिकायत करें. इसके अलावा अगर राशन कार्ड लाभुकों को भी कोई शिकायत हो, तो आप अपने जिले के अपर समाहर्ता के पास शिकायत कर सकते हैं. राज्य खाद्य आयोग का गठन किया गया है, इसका कार्य हर महीने यह पता करना है कि खाद्यान्न संबंधी जिले से कितनी शिकायतें आयीं और कितनी शिकायतों का निपटारा हुआ. लंबित मामलों का निपटारा राज्य खाद्य आयोग भी कर सकता है और इसी पद्धति से लाभुकों को राशन नहीं मिलने पर मुआवजा तय किया जायेगा. 
 
इसके अलावा लोक शिकायत प्रबंधन प्रणाली भी है, जहां आप अपनी शिकायत फोन या व्हाट्सएप नंबर के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं. इसके लिए आपको पीजीएमएस के टॉल फ्री नंबर 1800-212-5512 पर फोन कर और व्हाट्सअप नंबर : 8969583111 पर एसएमएस कर अपनी शिकायत दर्ज करानी है. अभी तक करीब नौ हजार शिकायतें मिल चुकी हैं, जिसमें करीब 82 फीसदी शिकायतों का निपटारा हो चुका है. यह भी व्यवस्था की गयी है कि अगर शिकायतकर्ता अपनी शिकायत के निपटारे से संतुष्ट नहीं है, तो उनकी शिकायतों पर दोबारा ध्यान देकर उन्हें उनका हक दिलाने की कोशिश की जाती है. इतना ही नहीं, अब खाद्य आपूर्ति मंत्री खुद हर सप्ताह राज्य के किसी एक गांव में जाकर वहां के लोगों की समस्या सुनेंगे और यथासंभव समाधान का प्रयास करेंगे. पूर्वी सिंहभूम जिले से इसकी शुरुआत हो चुकी है. विभाग की कोशिश है कि खाद्यान्न संबंधी शिकायत रहित व्यवस्था की जा सके, तब जाकर सही मायने में भोजन संबंधी लोगों की अपेक्षाओं को विभाग पूरा कर सकेगा. 
 
जन वितरण प्रणाली के दुकानदारों की समस्याओं के समाधान की भी कोशिश की जा रही है. हर बार डीलरों द्वारा गोदाम से कम मात्रा में अनाज मिलने की शिकायत की जाती है. इसके लिए अब हर गोदाम में इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन लगायी गयी है, जहां अनाज के बोरे को तौल कर देने की व्यवस्था है. जल्द ही सभी बोरों पर तौल संबंधी स्टिकर लगाने की भी व्यवस्था की जा रही है. अनाज ले जानेवाले वाहनों में जीपीएस लगाया जा रहा है, ताकि अनाजवाले वाहनों का मूवमेंट पता किया जा सके. इतना ही नहीं जल्द ही राज्य के हर राशन दुकान में इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन लगाने की भी व्यवस्था की जा रही है, ताकि राशन कार्डधारियों को कम मात्रा में अनाज मिलने की शिकायत को भी खत्म किया जा सके.