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  • Dec 1 2017 1:44PM

झारखंड की छिपी खूबसूरती को विश्व के सामने लाने की कोशिश : राजीव

झारखंड की छिपी खूबसूरती को विश्व के सामने लाने की कोशिश : राजीव
कश्मीर की वादियों की तरह प्राकृतिक सौंदर्य. अकूत खनिज संपदा. अनगिनत दर्शनीय धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल. नदी, पहाड़, जंगल, झरने एवं घाटियां. प्रकृति की गोद में बैठे झारखंड में क्या कुछ नहीं है. पर्यटन स्थलों को थोड़ा और विकसित किया जाये, तो ये राज्य का सबसे बड़ा उद्योग बन सकता है. झारखंड पर्यटन विकास निगम या जेटीडीसी राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने को लेकर प्रयासरत है. इसके लिए पर्यटन स्थलों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध की जा रही हैं. पर्यटकों की यात्रा आनंददायक बनाने के लिए बेहतर इंतजाम किये जा रहे हैं. राजीव रंजन जेटीडीसी के महाप्रबंधक हैं. विवेक चंद्र ने झारखंड में पर्यटन की वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजनाओं को लेकर बातचीत की. पेश है मुख्य अंश.
 
सवाल : झारखंड में पर्यटन के विकास की क्या संभावनाएं हैं.
जवाब : झारखंड में पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं. यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अतुलनीय है. पर्यटन की दृष्टि से विकसित दूसरे पहाड़ी राज्यों की तुलना में झारखंड की खूबसूरती किसी भी सूरत में कम नहीं है. प्राचीन मंदिर, घने जंगल, सुंदर जलप्रपात राज्य की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं. पर्यटन की दृष्टि से देखें, तो झारखंड स्वर्ग से कम नहीं है.
 
सवाल : इतना कुछ होने के बाद भी पर्यटकों के मामले में पिछड़ा क्यों है.
जवाब : कई बातें हैं. पहले राज्य में विधि-व्यवस्था की दिक्कत थी. पूर्व की सरकारों ने भी पर्यटन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं समझा, पर अब चीजें बदल गयी हैं. कानून-व्यवस्था दुरुस्त हो गयी है. आधारभूत संरचनाओं का विकास हुआ है. सरकार पर्यटन को उद्योग के रूप में विकसित करने के लिए काम कर रही है. सरकार की कोशिशों का असर भी है. पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है.
 
सवाल : पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए क्या किया जा रहा है?
जवाब : जेटीडीसी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि के लिए प्रयास कर रहा है. पर्यटन स्थलों पर मूलभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. आधारभूत संरचनाओं को बेहतर किया जा रहा है. पर्यटन स्थलों पर समारोह आयोजित कर पर्यटकों को आकृष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है. महोत्सव के माध्यम से राज्य की परंपरा और लोक कलाओं का प्रसार किया जा रहा है. पर्यटकों के लिए ऑनलाइन व्यवस्था तैयार की गयी है. पर्यटन स्थलों पर ठहरने के साथ पूरा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है. ऑनलाइन बुकिंग हो रही है. स्थानीय लोगों को पर्यटक मित्र बना कर सुरक्षा व्यवस्था बेहतर की गयी है. पर्यटन स्थलों का सर्किट बना कर परिवहन सुविधा बेहतर की जा रही है. धार्मिक स्थलों पर प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर की गयी है. इसके अलावा केंद्र सरकार से भी सहयोग लेकर पर्यटकों के लिए सर्किट तैयार किया जा रहा है.
 
सवाल : सरकार केवल देवघर के श्रद्धालुओं की संख्या दिखा कर पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होने का दावा करती है.
जवाब : देखिये, निश्चित रूप से देवघर में आनेवाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी बड़ी है. देवघर को मिला कर इस वर्ष तीन करोड़ पर्यटक झारखंड आये हैं, लेकिन देवघर के अलावा अन्यत्र दर्शनीय स्थलों पर भी अब पर्यटक पहुंच रहे हैं. बड़ी संख्या में पर्यटक नेतरहाट, बेतला जैसी जगहों पर जा रहे हैं. दशम फॉल, पंचघाघ जैसे जलप्रपातों पर रोजाना लाेग पहुंच रहे हैं. मलूटी, ईटखोरी जैसे धार्मिक स्थलों पर भी पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसा नहीं है कि झारखंड में आनेवाले लोग केवल देवघर ही जाते हैं.
 
सवाल : झारखंड की खूबसूरती को दुनिया के सामने लाने के लिए क्या कुछ हो रहा है?
जवाब : यह सही है कि अब तक हमारे राज्य की खूबसूरती दुनिया से छिपी है. इसे लोगों के सामने लाने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है. हम आधारभूत संरचना बेहतर कर रहे हैं. बुनियादी सुविधाएं हर पर्यटन स्थल पर बहाल की जा रही हैं. महोत्सव आयोजित कर राज्य की परंपरा और लोक कलाओं का व्यापक प्रचार किया जा रहा है. पर्यटन विभाग ने सभी चीजें ऑनलाइन कर दी हैं. इससे भी काफी मदद मिल रही है. दूसरी ओर, हम इस िमथक को तोड़ने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं कि राज्य में कानून व्यवस्था खराब है. झारखंड में आज तक किसी भी पर्यटक को कोई परेशानी नहीं हुई है. अब तो हर जगह पर्यटक मित्र बहाल कर दिये गये हैं. बेहतर माहौल का प्रचार किया जा रहा है. आनेवाले समय में झारखंड को पर्यटक हब बनने से कोई नहीं रोक सकता है.