yojana

  • Jan 27 2017 6:48AM

आधुनिक खेती की राह बताता है प्लांडू आइसीएआर

आधुनिक खेती की राह बताता है प्लांडू आइसीएआर
दिनेश कुमार
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का अनुसंधान परिसर अनुसंधान केंद्र (आइसीएआर-आरसीइआर) रांची जिले के नामकुम प्रखंड स्थित प्लांडू गांव में स्थित है. यह केंद्र विभिन्न फसलों के लिए शोध एवं उसके उत्पादन में वृद्धि के लिए कार्य करता है. साथ ही मिट्टी व जल प्रबंधन कैसे किया जाए, इससे किसानों को अवगत करता है. इस अनुसंधान केंद्र की स्थापना वर्ष 1979 में बागवानी में शोध के लिए भारत सरकार ने किया था. 
 
इस केंद्र के दो शोध फार्म हैं. 416 एकड़ में फैला पहले फार्म में नर्सरी के लिए काम होता है, वहीं बागवानी से संबंधित शोध के लिए 164 एकड़ क्षेत्रफल में दूसरा फार्म है. यह शोध संस्थान किसानों को उन्नत बीज, तकनीक एवं फसलों से संबंधित कीट पतवार के नियंत्रण पर किसानों को जानकारी उपलब्ध कराता है. इन सभी का इस्तेमाल कर किसान फसलों की उत्पादता को बढ़ा पायेंगे. कृषि तकनीक से संबंधित जानकारी केंद्र आदिवासियों को नि:शुल्क उपलब्ध कराता है. किसान रांची के प्लांडू स्थित केंद्र के बगीचों में लगे आम का नीलामी भी प्राप्त कर सकते हैं. इसके जरिये किसान इन बगीचों के फल को खरीद कर बाजार में बेच सकते हैं. 
 
अनुसंधान केंद्र का कार्य : किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से बागवानी, पशुधन उत्पादन एवं उन्नत किस्म के बागवानी का बीज उपलब्ध कराता है. फल एवं सब्जियों के नये किस्मों का विकास करना व उसका उत्पादन करना, फसलों की उत्पादता बढ़ाना एवं उनमें लगने वाले कीट पतवार पर नियंत्रण के लिए उपाय ढूढ़ना, केंद्र का कार्य है. इसके अलावा यह अनुसंधान केंद्र किसानों को पशुधन (सूकर, मुर्गी, बतख के पालन एवं प्रजनन) के पालन पर किसानों को जानकारी प्रदान करता है.
 
किसानों के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था : केंद्र, किसानों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन करता है. यह प्रशिक्षण छोटी अवधि का होता है, जो तीन से पांच दिनों तक चलता है. 25 किसानों का एक समूह बनाकर प्रशिक्षण दिया जाता है. झारखंड राज्य के किसान प्रशिक्षण का लाभ लेकर कृषि को एक व्यवसाय के रूप में विकसित कर सकते हैं. 
 
खाद की बिक्री : खेतों में यूरिया के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति दिन प्रति दिन घट रही है. फलस्वरूप फसलों का उत्पादन घट रहा है. उत्पादन को बढ़ाने के लिए किसान कई तरह के रसायनिक खाद का उपयोग कर रहे हैं. इन रासायनिक खादों के नकारात्मक प्रभाव से खेतों और फसलों को बचाने का एक ही उपाय है. जैविक खाद का प्रयोग किया जाए. रांची स्थित केंद्र के विक्रय कांउटर से कोई भी किसान जैविक खाद खरीद सकता है. यह खाद 10 रुपये प्रति किलो के मूल्य पर केंद्र से खरीदा जा सकता है. इसके प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है. विक्रय कांउटर से किसानों के अलावा साधारण व्यक्ति विभिन्न प्रकार के फल, उन्नत बीज, जैविक खाद, फूल एवं बागवानी के पौधे आदि भी खरीद सकते हैं.
 
सिंचाई की पटवन विधि का वैज्ञानिक सच : देश के अधिकतर किसान खेतों की सिंचाई पटवन विधि से करते हैं. इसमें किसान पानी को पूरे खेत में फैलने देते हैं. इससे पानी का लगभग 62 फीसदी हिस्सा फसलों या पौधों को नहीं मिलता, अर्थात केवल 38 फीसदी पानी ही फसलों को मिल पाता है. 
 
49 फीसद पानी धरातल के नीचे चला जाता है और 12 फीसदी पानी वाष्पित हो जाता है. इसलिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को आधुनिक विधियां अपनाने की सलाह देते हैं. आप स्प्रिंकल या माइक्रो एरिगेशन विधि अपनायें, जिसमें फसलों को पानी 60-90 फीसदी तक मिलता है. 
साभार वैज्ञानिक बीके िसंह