yojana

  • Jan 27 2017 8:21AM

बच्चों के चेहरों पर आयी मुस्कान

बच्चों के चेहरों पर आयी मुस्कान
आशा के बच्चों ने मनाया पांचवीं वार्षिकोत्सव
राजधानी रांची जिले के नामकुम प्रखंड स्थित नया भुसुर में अवस्थित है आशा सेंटर. आशा यानी एसोसिएशन फॉर सोशल एंड ह्यूमन एवरनेंस एक गैर सरकारी संगठन है. ह्यूमन ट्रेफेकिंग पर रोकथाम के साथ-साथ गांवों के विकास में अपनी अहम योगदान देने वाले आशा संस्था के सदस्यों ने अपने बच्चों के चेहरे पर खुशी बिखरने के उद्देश्य से पांचवी वार्षिकोत्सव मनाया. कल तक ईंट-भट्ठों या मानव तस्करी के कारण दूसरे के घरों में बदतर जिंदगी बिताने वाले ये बच्चे आज इस संस्था में पहुंचकर अपने सुनहरे भविष्य बनाने में मशगूल हैं. इस संस्था में करीब 150 बच्चे-बच्चियां हैं. 
 
संस्थान परिसर में आयोजित रंगारंग कार्यक्रम में जहां बच्चों ने एक से बढ़कर एक कार्यक्रमों को लोगों के बीच रखा, वहीं पढ़ाई के लिए ग्रामीण परिजनों को जागरूक भी किया. कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने परित्यगता विषय पर नाटक का मंचन किया. इस नाटक में एक पत्नी के रहते दूसरी पत्नी को घर लाने और उससे होने वाली परेशानियों को रेखांकित करते हुए इससे दूर रहने की सलाह दी. एक गीत हमर सोना रकम पिया, काहे रूस गइले न... ने उपस्थित लोगों को जमकर थिरकने पर मजबूर कर दिया. 
 
वहीं बच्चों ने इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना के गाने गाकर अपने हौसलों का परिचय दिया. साथ ही नाटक और छऊ नृत्य के माध्यम से भी लोगों का मन मोह लिया. 
 
एक िदवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों के साथ-साथ ग्रामीणों को जागरूक करने का काम िकया. ग्रामीणों ने कहा िक ऐसे कार्यक्रम से बच्चों में पढ़ने की ललक पैदा होती है.
 
आशा ने हमें पढ़ना-लिखना सिखाया : सुमरी
 
सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली सुमरी कुमारी कहती है कि नाटक के माध्यम से यह बताने की कोशिश की गयी कि हम जैसे बच्चों की पहले और वर्तमान में क्या स्थिति है. जहां पहले पढ़ना-लिखना तो दूर की बात, कई बच्चे बुरी लत में लगे थे, वहीं आशा संस्था में आने के बाद उसके जीवन में किस तरह से आमूल-चूल परिवर्तन आया. गुमला जिले के सिसई की रहने वाली सुमरी कुमारी वर्ष 2011 में इस संस्था में आयी. अभी से ही धाराप्रवाह बोलने वाली सुमरी ने बताया कि ईंट-भट्ठों में रहनेवाले बच्चों की क्या स्थिति है और किस तरह से बच्चों के साथ व्यवहार किया जाता है. सुमरी ने गांव के सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को किसी तरह भी शिक्षित करने की अपील की है ताकि वो भी सफल इनसान बन सके.
 
बच्चों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाना उद्देश्य : अजय व पूनम
 
आशा संस्था की चेयरपर्सन पूनम टोप्पो और सचिव अजय कुमार कहते हैं कि बच्चों के लिए इस तरह का कार्यक्रम हर साल किये जाते हैं ताकि ये बच्चे अपने हुनर को लोगों के बीच रख सके. 
 
दोनों कहते हैं कि संस्था की कोशिश रहती है ऐसे ग्रामीण बच्चे, जो ईंट- भट्ठों या मानव तस्करी के कारण दूसरों के घरों में दयनीय स्थिति में रहते हैं, उसे यहां लाकर पढ़ाई-लिखाई समेत सभी संस्कारों से परिपूर्ण करते हैं ताकि वो बच्चे भी अन्य बच्चों की भांति अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकें. बच्चों के चेहरों पर हमेशा मुस्कुराहट रहे, इसी कोशिश में संस्था हमेशा लगी रहती है और इसी के तहत इस बार भी पांचवीं वार्षिकोत्सव धूमधाम से मनायी गयी है.
 
पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड स्थित शंकरदा पंचायत के संथाल समुदाय बहुल गांव है दामूडीह. इस गांव को पूर्णरूपेण नशामुक्त करने की विशेष अभियान शुरू हुई है. मॉडल गांव के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से इसका बीड़ा उठायी है गांव की 11 शिक्षित बेटियां. ग्राम प्रधान ठाकुर मांझी के आवास पर आयोजित बैठक में 11 शिक्षित बेटियों का एक दल बनाया गया है. इस कार्य में मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के उपसमाहर्ता संजय कुमार की भी महत्वपूर्ण भूमिका है. इसके अलावा धनीराम  टुडू, बादल हेंब्रम, जीतराय मुर्मू, अमित सरदार, व वृन्दावन का भी सहयोग मिल रहा है. 
 
दामूडीह गांव में पिछले कई वर्षों से मदिरा पान प्रतिबंधित है, इसलिए यहां का कोई भी ग्रामीण शराब का सेवन नहीं करता है, पर अब अन्य प्रकार के नशा के खिलाफ भी ग्रामीणों ने बिगुल फूंक दी है. गांव  को पूर्ण नशामुक्त बनाने के उद्देश्य से विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. हाईस्कूल से लेकर ग्रेजुएशन तक शिक्षित आदिवासी छात्राएं अपने गांव के युवाओं तथा बुजुर्गों को नशा के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए व उन्हें हर प्रकार के नशा से दूर रहने के लिए प्रेरित करते हुए स्वच्छ, स्वस्थ एवं खुशहाल गांव बनाने की अपील कर रही है. इनके इस आंदोलन को संरक्षण देने के लिए ग्रामसभा की बैठक में नौ लोगों की एक समिति बनी है. 
 
इन बेटियों का मिलता है सहयोग  
 
नशामुक्त गांव बनाने में जिन लड़कियों का अहम योगदान है उसमें महिमा हांसदा, माला हांसदा, मालती मुर्मू, पार्वती हांसदा, साकरो मुर्मू, विमला टुडू, अनीता सरदार, सुमित्रा महतो, रानी हांसदा, दुलारी हांसदा तथा रानी सरदार मुख्य हैं. 25 वर्ष से कम आयु की इन लड़कियों में चार स्नातक, दो इंटरमीडिएट तथा पांच हाईस्कूल तक पढी हैं.