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  • Feb 16 2017 9:07AM

पंचायत व गांवों के विकास की बनी योजना

पंचायत व गांवों के विकास की बनी योजना

दलहन और तिलहन की खेती में जुटे दुमका के किसान

शैलेंद्र सिन्हा

दुमका जिला के किसान पहले एक फसली खेती करते थे, लेकिन अब खरीफ के बाद रबी फसल लगाने में जुट गये हैं. रबी की फसल दलहन और तिलहन में पानी की आवश्यकता कम पड़ती है. ग्रामीण क्षेत्रों में जोरिया, झरना, चेकडैम, तालाब और डोभा में पानी की उपलब्ध्ता होने के कारण किसान आधुनिक तकनीक अपना कर सब्जी की खेती से भी अपनी आय बढ़ा रहे हैं. जिले में सब्जी की खेती अधिक मात्रा में होती है. यहां की सब्जी बिहार और बंगाल भेजे जा रहे हैं. 

 वर्षों पूर्व दुमका जिला में जल है जान है योजना के तहत हजारों कुएं किसानों की जमीन पर बनाये गये थे, इसी कारण यहां सब्जी बहुतायत मात्रा में होती है. इस वर्ष जिले के किसानों ने दलहन व तिलहन की खेती पर जोर दिया है. 

इसके तहत गेहूं, चना व मसूर की खेती की गयी वहीं सरसों की खेती भी बड़े पैमाने पर कर रहे हैं. 15 हजार हेक्टेयर में इस वर्ष सरसों की खेती की गयी है. झारखंड में दलहन व तिलहन की कमी है. अगर राज्य के हरेक किसान रबी फसल में ध्यान दें तो राज्य दलहन के मामले में आत्मनिर्भर बन जायेगा. जिला के किसान आत्मा से जुड़कर आधुनिक तकनीक से खेती कर रहे हैं. आत्मा किसानों को जल संचयन एवं संचित जल के प्रयोग के लिए प्रेरित कर रही है. जिला के किसानों के समक्ष सिंचाई का अभाव है. पानी की कमी को देखते हुए सूक्ष्म सिंचाई जैसे डीप इरिगेशन और स्प्रींकलर सिंचाई को आत्मा द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है. 

आत्मा परती भूमि पर खेती के लिए भी किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. 

प्रधानमंत्री फसल बीमा का मिलता लाभ : जिला के किसान रबी फसल में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ ले रहे हैं. किसानों को गेहूं के लिए 320 रुपये, चना के लिए 249 रुपये, सरसों के लिए 181 और आलू के लिए 287 रुपये प्रति एकड प्रीमियम केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित है. खरीफ में भी जिला के लाखों किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा कराया और अब रबी में भी बीमा करा रहे हैं. 

वर्ष 2017 में दुमका जिला के गांव के विकास के लिए आत्मा की ओर से एक्सन प्लान बनकर तैयार हो चुका है. किसान आधुनिक तकनीक से खेती के गुर जान चुके हैं, जिससे किसानों की जिंदगी में अब बदलाव होकर रहेगा.

किसानों के लिए वरदान साबित होता डोभा : डॉ दिवेश कुमार सिंह

आत्मा के परियोजना निदेशक डाॅ दिवेश कुमार सिंह बताते हैं कि कृषि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी किसानों को कृषि गोष्ठी, किसान मेला और प्रशिक्षण के माध्यम से दिया जाता है. 

वे बताते हैं कि डोभा किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है. डोभा के पानी का इस्तेमाल किसान सब्जी उत्पादन और तिलहन में करने लगे हैं. जिला के एक लाख 17 हजार किसान अब डोभा का लाभ ले रहे हैं. किसान मित्र के माध्यम से उन्हें रबी खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. किसानों को कृृषि से संबंधित जानकारी कृषक मित्र द्वारा मिलता है और किसानों के प्रतिनिधि प्रखंड कृृषक सलाहकार समिति की बैठकों में भी दिया जाता है. प्रखंड स्तर पर प्रखंड तकनीकि प्रबंधक द्वारा भी किसानों की समस्या का समाधान होता है. 

आत्मा के परियोजना निदेशक बताते हैं कि किसानों का पोर्टल है जहां जिला के 48 हजार किसानों का निबंधन हो चुका है. इसके माध्यम से भी उन्हें कई प्रकार की जानकारी मिलती है. यदि किसान फसल के रोग से संबंधित प्रश्न करते हैं तो उन्हें जवाब मिलता है जैसे- आलू की खेती में झुलसा नामक रोग हो जाता है तो उन्हें उसका निदान बताया जाता है. हरेक किसान मोबाइल के माध्यम से अपनी समस्या बताते हैं.